एक बार फिर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने ऑपरेशन सिंदूर (7-10 मई 2025) के दौरान सशस्त्र सेनाओं की वीरता का राजनीतिकरण करने का प्रयास किया। इस बार, पार्टी ने यह धारणा बनाने की कोशिश की कि ऑपरेशन सिंदूर के छह बलिदानी नायकों को रक्षा मंत्रालय द्वारा पहली बार हाल में स्वीकार किया गया है। कांग्रेस ने 28 जुलाई 2025 को संसद के पटल पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान को गलत तरीके से पेश करने की हद तक कर दी है, जिसमें कहा गया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कोई सेनाओं की कोई Battle Casualty (सैन्य कार्रवाई में वीरगतिप्राप्त सैनिक) नहीं हुई है।
सबसे पहले, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि राष्ट्र और भारतीय सशस्त्र सेनाओं ने पिछले साल 11 मई को डीजीएमओ द्वारा मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इन सभी छह बलिदानी नायकों (भारतीय सेना से पांच और भारतीय वायु सेना से एक) के सर्वोच्च बलिदान को स्वीकार किया था। सभी छह बलिदानी नायकों को 14 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सशस्त्र सेनाओं को वर्ष में दो बार, एक बार स्वतंत्रता दिवस पर और दूसरी बार गणतंत्र दिवस पर वीरता और विशिष्ट पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है। इस प्रकार, 14 अगस्त 2025 को रक्षा मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से राष्ट्र द्वारा प्रदान किए गए वीरता पुरस्कार उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान की औपचारिक और राष्ट्रीय मान्यता हैं।
दूसरे, ऑपरेशन सिंदूर के लिए युद्ध में हताहतों की संख्या को आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक करने में रक्षा मंत्रालय की तथाकथित देरी पर सवाल उठाना कांग्रेस पार्टी की अपरिपक्व भावना को प्रदर्शित करता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी रुका नहीं है, गैर-गतिज और सूचना युद्ध क्षेत्र में जारी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान को सैन्य बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व नुकसान हुआ, कार्रवाई में उसके काफी सैनिक मारे गए, 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया और नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया गया। फिर भी पाकिस्तानी सेना ने भारत के साथ संघर्ष को अपनी जीत के रूप में चित्रित करने की कोशिश की है। यहां तक कि पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर ने खुद को फील्ड मार्शल और बाद में रक्षा सेनाओं के प्रमुख (Chief of Defence Forces) के रूप में पदोन्नत किया है। पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा और भारत में सैन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की झूठी कहानी को आक्रामक तरीके से लगातार पेश किया है।
झूठे नैरेटिव को उठाती कांग्रेस
एआई संचालित छवियों ओर चित्रों के युग में, विश्वसनीय लगने वाली वीडियो फुटेज और तस्वीरों के साथ ऐसी झूठी कहानियों को चित्रित करना आसान हो गया है। हम पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान भी ऐसी छवियां देखते रखते हैं, जिसमें प्रत्येक पक्ष मनोवैज्ञानिक रूप से विरोधी को हराने की कोशिश कर रहा है। दुर्भाग्य से, कांग्रेस पार्टी इस तरह के झूठे नैरेटिव को उठाती रहती है। उसके बयानों को पाकिस्तान सरकार द्वारा निराधार जीत का दावा करने और पाकिस्तान के भोले-भाले लोगों को मूर्ख बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सभी राजनीतिक दलों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान प्रायोजित पहलगाम आतंकी हमले का भारत का बदला था। यह 7 मई 2025 की रात को एक बेहद सटीक आतंकवाद विरोधी अभियान से शुरू हुआ जिसने पाकिस्तान के अंदर नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया था। जब पाकिस्तान ने संघर्ष को पारंपरिक युद्ध की ओर बढ़ाने का प्रयास किया, तभी भारत ने पाकिस्तान की युद्ध लड़ने की क्षमता को नष्ट करने के लिए जोरदार जवाबी कार्रवाई की। इस प्रक्रिया में भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ब्लैकमेल को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
सैन्य जानकारी सार्वजनिक करने में बरती जाती है सतर्कता
राजनीतिक क्षेत्र में रस्साकसी की वजह से सरकार आधिकारिक तौर पर सैन्य परिचालन विवरणों को सार्वजनिक करते समय सतर्क रहती है। हमारे भारत में एक अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई है, जहां विपक्षी दलों ने सशस्त्र सेनाओं की वीरता पर संदेह करना शुरू कर दिया है। कुछ विपक्षी दल सशस्त्र सेनाओं से दुश्मन को हुए विनाश के बारे में सबूत भी मांगते हैं, जैसा कि फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद बालाकोट हवाई हमलों के दौरान मांगा गया था। भारत में विपक्ष ने पूर्वी लद्दाख में भी कथित चीनी घुसपैठ के बारे में बात करते हुए अपरिपक्वता का प्रदर्शन किया। नतीजतन, युद्ध के हताहतों और युद्ध से संबंधित अन्य मुद्दों का एक केंद्रीकृत औपचारिक अवर्गीकरण (official declassification) समय लेने वाला हो जाता है। कभी-कभी, परिवार की अधिसूचना में देरी होती है, जिससे युद्ध में हताहतों के परिजनों को मिलने वाले लाभों का दावा करने वालों में विवाद होता है। राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के बीच इस तरह का प्रशासनिक सत्यापन भी एक लंबी प्रक्रिया है।
बलिदानी सैनिकों के परिवार की देखभाल करती है सेना
आधिकारिक रूप से युद्ध हताहतों की संख्या को सार्वजनिक करने में लगने वाला समय और उसके बाद आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना (official gazette notification) जारी करने में कई बार दो साल भी लग जाते हैं। जबकि वीरता पुरस्कार समय पर प्रदान किए जाते हैं, सत्यापन प्रक्रिया के कारण आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना में देरी होती है। वर्तमान मामले में, नई दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर बलिदानी नायकों के नाम शिलालेख पर आना एक स्थापित और अच्छी तरह से परिभाषित प्रोटोकॉल है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि सशस्त्र सेनाएं सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार से लेकर बलिदानी सैनिेकों के परिवार के कल्याण की देखभाल करते हैं, पारिवारिक पेंशन का त्वरित भुगतान और अन्य वित्तीय लाभ प्रदान करते हैं। सेना में रेजिमेंटेशन की प्रणाली युद्ध के हताहतों के परिवार को अपना मानती है, हर समय उनकी देखभाल करती है और हर अवसर पर सम्मान प्रदान करती है।
पाकिस्तान को मिल सकता है झूठी कहानी को बढ़ाने का मौका
ऑपरेशन सिंदूर के बलिदानी नायकों पर दुर्भाग्यपूर्ण राजनीति पाकिस्तान को अपनी झूठी कहानी को आगे बढ़ाने का एक और मौका दे सकती है। चार साल से अधिक लंबे रूस-यूक्रेन युद्ध में, अभी भी युद्ध में हताहतों की कोई आधिकारिक संख्या नहीं है। यहां तक कि चल रहे पश्चिम एशिया संघर्ष में भी अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक ढांचे ने युद्ध में हताहतों की संख्या के आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं। ऐसे देशों में, राष्ट्र और राजनीतिक व्यवस्था सशस्त्र सेनाओं के विवेक पर सवाल नहीं उठाती है। आधुनिक युद्ध और संघर्ष तेजी से जटिल होते जा रहे हैं और सरकारों को वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए कई मोर्चों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है। ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र सेनाओं की उत्कृष्ट सैन्य जीत का अप्रतिम उदाहरण है। मैं ऑपरेशन सिंदूर के बलिदानी नायकों को पुनः अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। आइए हम राष्ट्रहित में, भारत के सैन्य मामलों से राजनीति को दूर रखें।
















