भारत कारगिल युद्ध (ऑपरेशन विजय) की 26वीं वर्षगांठ मना रहा है। ऐसे में कारगिल योद्धाओं को नमन करना और श्रद्धांजलि अर्पित करना मेरे जैसे सैनिक के लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है। 1999 का यह युद्ध अभी भी हमारे देशवासियों की अंतरात्मा में बसा हुआ है और भारतीयों की हर पीढ़ी को प्रेरित करता है।
यह महान विजय दिवस सबसे चुनौतीपूर्ण युद्ध परिस्थितियों में पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ भारतीय सेना की वीरता, बहादुरी, दृढ़ता और साहसी कार्रवाई की याद दिलाता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत की जीत ने एक मजबूत राष्ट्र के उदय की शुरुआत की और भारत ने विश्व मंच पर साहस, विश्वास और दृढ़ता के साथ 21 वीं सदी में प्रवेश किया।
ऐतिहासिक लड़ाइयाँ और विजय दिवस का महत्त्व
भारतीयों की एक पूरी पीढ़ी कारगिल युद्ध के दौरान द्रास, बटालिक, मुश्कोह, तोलोलिंग, काकसर और तुरटोक में प्रसिद्ध लड़ाइयों से अवगत है। लेकिन यह तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी सरकार द्वारा शुरू किए गए रक्षा सुधारों को श्रेय जाता है कि आज भारत ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चार दिनों से भी कम समय में घुटने टेकने पर मजबूर करने की स्थिति में है।
यह भी पढ़ें – जिन्ना के देश ने कारगिल में मरे अपने जिस जवान की लाश तक न ली, अब ‘मुल्ला’ मुनीर उसे बता रहा ‘वतनपरस्त’
3 मई 1999 से 26 जुलाई 1999 तक हुए कारगिल युद्ध के दौरान, 527 बहादुर भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया और इस युद्ध में 1363 सैनिक घायल हुए। भारतीय सेना ने 26 जुलाई 1999 को पाकिस्तानी घुसपैठियों की आखिरी खेप को खदेड़ दिया और इस प्रकार, 26 जुलाई को इस उत्कृष्ट सैन्य जीत को मनाने के लिए एक कृतज्ञ राष्ट्र द्वारा ‘विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
कारगिल समीक्षा समिति की भूमिका
प्रधानमंत्री वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने कारगिल युद्ध का विश्लेषण करने के लिए अद्वितीय दूरदर्शिता और महान सामरिक ज्ञान का प्रदर्शन किया। परिणामस्वरूप, कारगिल समीक्षा समिति (Kargil Review Committee, KRC) की स्थापना सरकार द्वारा 29 जुलाई 1999 को तुरंत की गई । संघर्ष से प्रमुख सबक और सुझाव शानदार रणनीतिकार के. सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा दिए गए ।
यह भी पढ़ें – तारीख बोल उठी, 26 जुलाई कारगिल विजय दिवस: आज सेना के शौर्य का दिन, भारत ने पाकिस्तान को पस्त कर जीता युद्ध
इस समिति को इस बात का श्रेय जाता है कि 7 जनवरी 2000 को छह महीने से भी कम समय में रिपोर्ट सरकार को सौंपी दी गई। केआरसी की रणनीतिक सिफारिशों ने भारतीय सशस्त्र सेनाओं की वर्तमान बल संरचना, संगठन और सैन्य उपकरण प्रोफाइल को आकार दिया है।
खुफिया तंत्र में सुधार
समिति ने खुफिया संगठन और प्रक्रियात्मक जानकारी साझा करने में कमियों को नोट किया। केआरसी की सिफारिश के आधार पर, दिसंबर 2001 में मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी) बनाया गया था। मैक अब कई एजेंसियों, विभिन्न मंत्रालयों और यहां तक कि राज्य खुफिया एजेंसियों के बीच खुफिया तंत्र का समन्वय करता है। राज्य स्तर पर, सहायक एमएसी स्थापित किए गए हैं। त्रि-सेवा स्तर पर, मार्च 2002 में रक्षा खुफिया एजेंसी (Defence Intelligence Agency, डीआईए) का निर्माण एक प्रमुख रक्षा सुधार था।
यह भी पढ़ें – कारगिल @25: विरासत और सबक
डीआईए और मैक ने अब भारतीय सशस्त्र बलों के लिए सैन्य खुफिया का सफलतापूर्वक समन्वय किया है जैसा की ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक आक्रमण की सफलता ने साबित किया। मैक को अब 500 करोड़ रुपये की लागत से नवीनतम भविष्य की क्षमताओं के साथ अपग्रेड किया गया है। यह सुविधा हाल में, मई 2025 में गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा राष्ट्र को समर्पित की गई थी।
मानव संसाधन प्रबंधन के सुधार
कारगिल युद्ध ने सशस्त्र सेनाओं में मानव संसाधन प्रबंधन में कमियों को भी उजागर किया। नतीजतन, अधिकारियों के लिए मानव संसाधन मुद्दों की जांच के लिए अजय विक्रम सिंह समिति (Ajai Vikram Singh Committee, एवीएससी) की स्थापना की गई । एक बड़ी समस्या कारगिल युद्ध में भाग लेने वाले कमांडिंग अधिकारियों (Commanding Officer, सीओ) की अधिक आयु थी।
एक सीओ की सेवा की लंबाई घटाकर 15 साल कर दी गई ताकि वे शारीरिक रूप से युद्ध में सैनिकों का नेतृत्व करने में सक्षम हों। वाजपेयी जी की सरकार सैनिकों की जरूरतों के प्रति भी संवेदनशील थी। उन्हें भी उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कैरियर की प्रगति का मार्ग प्रशस्त हुआ।
यह भी पढ़ें – Kargil Vijay Diwas: जो भारत को झुकाना चाहता था, वो बिस्तर से भी न उठ सका,आखिरी वक्त में ऐसा था परवेज मुशर्रफ का हाल
एवीएससी रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर, वर्ष 2005 से अधिकारियों के लिए तेजी से सुनिश्चित कैरियर प्रोन्नति हुई। मैं भारतीय सेना की प्रतिष्ठित सैन्य सचिव शाखा, जो अधिकारी कैडर के कैरियर प्रबंधन की देखभाल करता है, में तैनात होने के दौरान मानव संसाधन नीतियों में बदलाव लाने की प्रक्रिया का हिस्सा होने के लिए भाग्यशाली रहा।
रक्षा खरीद नीति में बदलाव
समिति ने रक्षा खरीद नीति (Defence Procurement Policy, डीपीपी) में बदलाव की भी सिफारिश की । इसे वर्ष 2002 में संशोधित किया गया था, लेकिन किसी वजह से नीति सशस्त्र सेनाओं के लिए सैन्य उपकरणों और प्रणालियों की समय पर खरीद सुनिश्चित नहीं कर पाई। यह पीएम मोदी सरकार को श्रेय जाता है कि वर्ष 2016 में एक अधिक व्यावहारिक डीपीपी जारी की गई ।
नवीनतम नीति को रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure, DAP) कहा जाता है जिसे वर्ष 2020 में लागू किया गया था। इसमें बड़ा बदलाव तीनों सेनाओं के उपाध्यक्षों को आपातकालीन खरीद शक्तियां दी गई हैं।
यह भी पढ़ें – Kargil Vijay Diwas : टाइगर हिल की जीत से ऑपरेशन सिंदूर तक : भारत ने फिर दिखाया साहस
तीनों सेनाओं ने आकस्मिक जरूरतों के लिए सैन्य हार्डवेयर खरीदने के लिए इस महत्वपूर्ण प्रावधान का उपयोग किया है। भारतीय सशस्त्र सेनाओं की अधिकतम युद्ध स्तर तैयारी सुनिश्चित करने के लिए डीएपी को और सरल बनाया जा रहा है।
सीडीएस की नियुक्ति और सैन्य मामलों का समन्वय
केआरसी की सबसे जटिल सिफारिश चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (Chief of Defence Staff, सीडीएस) की नियुक्ति से संबंधित थी। काफी विचार-विमर्श के बाद, पीएम मोदी ने सीडीएस को मंजूरी दी और देश ने 1 जनवरी 2020 को जनरल बिपिन रावत को पहले सीडीएस के रूप में देखा।
उसी समय, रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence, एमओडी) ने एक बड़ा सुधार देखा जब सैन्य मामलों का विभाग (Department of Military Affairs, डीएमए) बनाया गया और इसे सीडीएस की कमान में रखा गया।
यह भी पढ़ें – कारगिल के नायक हरजिंदर सिंह को दिल से सैल्यूट, देवदूत बन डूबते हुए पांच मजदूरों की जान बचाई
इस प्रकार, प्रचालनात्मक सैन्य मामलों को सीडीएस द्वारा तीन सेना प्रमुखों के परामर्श से देखा जाता है। आज भारत का रक्षा मंत्रालय शांतिकाल और युद्ध जैसी स्थितियों दोनों के दौरान ,समय पर निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है।
एकीकृत थिएटर कमांड की आवश्यकता
केआरसी की एक प्रमुख सिफारिश, जो अभी भी लंबित है, एकीकृत थिएटर कमांड (Integrated Theatre Command, आईटीसी) का निर्माण है। आईटीसी का उद्देश्य भौगोलिक या कार्यात्मक आवश्यकता के आधार पर एकीकृत कमानों में सशस्त्र सेनाओं का पुनर्गठन करना है। निर्णय लेने में तेजी लाने और युद्ध प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए थल सेना, नौसेना और वायु सेना के संसाधनों को एकीकृत करने की योजना है।
यह भी पढ़ें – विजय गाथा : कारगिल के वीर सपूतों को देश का सलाम
पिछले पांच वर्षों में, तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और संयुक्तता की दिशा में बहुत अच्छा काम हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में इस तरह के तालमेल की झलक दिखाई दी और सेना, नौसेना और वायु सेना के सैन्य अभियानों के महानिदेशक ने एक साथ मीडिया को जानकारी दी। इसके अलावा, भारत ने सीमा और नियंत्रण रेखा को पार न करके भी पाकिस्तान पर सबसे उत्कृष्ट सैन्य जीत हासिल की।
रणनीतिक समझ और राजनीतिक चेतना की आवश्यकता
लेकिन एक समय यह भी आ गया है कि राजनेताओं की एक ऐसी पीढ़ी तैयार की जाए जो सैन्य मामलों के प्रति अधिक अभ्यस्त और जानकार हो। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लड़ाकू विमानों के नुकसान पर चल रहा अनावश्यक राजनीतिक विवाद एक स्तर पर रणनीतिक समझ की कमी को दर्शाता है।
यह भी पढ़ें – Kargil Vijay Diwas: टाइगर हिल की जीत से ऑपरेशन सिंदूर तक: भारत ने फिर दिखाया साहस
सूचना युद्ध आधुनिक संघर्षों का एक महत्वपूर्ण घटक है। हमारे विरोधियों के खिलाफ नेरेटिव के युद्ध को खोना आसान है, अगर हमारे नेता संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए मतभेद पैदा करते हैं। जब भी राष्ट्रीय सुरक्षा की बात हो, हमारे देश के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम सही एकीकृत जनमत का निर्माण करें और दुश्मन के गलत नेरेटिव को भी परास्त करें।
राष्ट्रहित में एकजुटता
अंत में, कारगिल युद्ध पिछले 25 वर्षों में केआरसी की सिफारिशों की भावना के आधार पर भारत में उल्लेखनीय रक्षा सुधार प्रक्रिया का अग्रदूत रहा है। आत्मविश्वास से भरे रक्षा मंत्रालय ने 1 जनवरी 2025 को ‘रक्षा सुधार 2025’ के रूप में नौ सुधारों की भी घोषणा की। अब मोदी सरकार का फोकस सैन्य हार्डवेयर में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने पर है।
यह भी पढ़ें – Kargil Vijay Diwas: कैसे भारतीय सेना ने 18,000 फीट ऊंचाई पर दुश्मन को हराकर भारत को दिलाई महान जीत?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे मेड इन इंडिया मिलिट्री हार्डवेयर और नए सिस्टम ने एक अनुकरणीय प्रदर्शन किया । चल रहे सुधारों ने सैनिक से लेकर उपग्रह तक (Soldier to Satellite) राष्ट्रीय सुरक्षा का 360 डिग्री दृश्य लिया है। कारगिल योद्धाओं के लिए सबसे उपयुक्त श्रद्धांजलि यह होगी कि सभी भारतीय एक जैसा सोचें और एक समान भावना के साथ काम करें, जिसमें पूरे देश का दृष्टिकोण उनके दिल में हो। जय भारत!

















