देश में कांग्रेस के नेता वीर जवानों और राष्ट्र की सुरक्षा को लेकर भी ओछी राजनीति करने लगते हैं। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी यही हो रहा है। कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर एक क्लिप डाली और बलिदानियों के नाम छुपाने के आरोप लगा दिए। रक्षा मंत्रालय की ओर से इस पर बयान आ गया है। सच्चाई यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के वीडियो के चुनिंदा अंश को काटकर झूठ फैलाया जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कुछ पोस्टों में रक्षा मंत्री द्वारा 28 जुलाई, 2025 को संसद में दिए गए भाषण को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इन पोस्ट में भाषण के एक चुनिंदा अंश को उद्धृत करके यह झूठा दावा किया गया है कि रक्षा मंत्री ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक की जान नहीं गई। ये पोस्ट जानबूझकर भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
रक्षा मंत्री के संसदीय भाषण को विवाद का मुद्दा बनाने की कोशिश करने वालों ने जानबूझकर उनके बयान के पूरे संदर्भ को नजरअंदाज किया है। यह याद रखना जरूरी है कि रक्षा मंत्री के भाषण के समय, मीडिया के कुछ वर्गों और सोशल मीडिया पर एक बेहद प्रचलित और हावी धारणा फैली हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय पायलट लापता हो गए थे। यह धारणा पूरी तरह से झूठी थी, फिर भी इसे ऑपरेशन की सफलता को कम करने और जनता का मनोबल गिराने के स्पष्ट इरादे से आक्रामक रूप से फैलाया जा रहा था। रक्षा मंत्री ने बयान इसी विशिष्ट और दुर्भावनापूर्ण धारणा के सीधे संदर्भ में दिया था। इसलिए, उनकी टिप्पणी उस समय खतरनाक रूप से फैल रहे झूठ का लक्षित और प्रासंगिक जवाब थी।
भाषण को उचित संदर्भ में समझना महत्वपूर्ण
रक्षा मंत्री के भाषण को उसके संपूर्ण और उचित संदर्भ में समझना भी महत्वपूर्ण है। संसद में दिया गया उनका भाषण, संपूर्ण रूप से, ऑपरेशन सिंदूर की उल्लेखनीय सफलता का गौरवपूर्ण और सटीक वर्णन था। इस ऑपरेशन में भारतीय रक्षा बलों ने अद्वितीय सटीकता, दृढ़ संकल्प और सैन्य व्यावसायिकता का प्रदर्शन किया। ऑपरेशन के दौरान 100 से अधिक आतंकवादियों और पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया गया, साथ ही नियंत्रण रेखा पर स्थित पाकिस्तानी वायु अड्डों और तैनाती को व्यापक और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचागत क्षति भी पहुंची। यह भाषण भारतीय रक्षा बलों के साहस और क्षमता को उचित श्रद्धांजलि थी और भारत को नुकसान पहुंचाने की इच्छा रखने वालों के लिए एक स्पष्ट संदेश था।
रक्षा मंत्री और भारत सरकार भारतीय रक्षा बलों के प्रत्येक सदस्य के प्रति, और विशेष रूप से राष्ट्र की रक्षा में प्राणों की आहुति देने वालों के प्रति, अपना आदर, कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करते हैं। उनका बलिदान मातृभूमि की सर्वोच्च सेवा है, और इसे सदा गरिमा, गौरव और सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
उनके सर्वोच्च बलिदान को मान्यता देते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि उनके नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की दीवारों पर अंकित हों। सरकार ने वीर बलिदानियों के परिवार/आश्रितों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं में रियायतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।















