ब्रिटेन में अफगान रिलोकेशन संकट: डेटा लीक और महिला सुरक्षा पर सवाल
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ब्रिटेन में अफगान रिलोकेशन संकट: डेटा लीक और महिला सुरक्षा पर सवाल

ब्रिटेन में 2022 के डेटा उल्लंघन ने 19,000 अफगान प्रवासियों की जान खतरे में डाली। बढ़ते अपराध और महिला सुरक्षा पर चिंताएँ बढ़ीं। महिलाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jul 18, 2025, 07:32 am IST
inविश्व
Britain Afghan Data leak

कीर स्टार्मर, ब्रिटिश प्रधानमंत्री (फोटो साभार: बीबीसी)

ब्रिटेन में हाल ही में एक बड़ा डेटा उल्लंघन सामने आया, जिसने न सिर्फ अफगान प्रवासियों की जिंदगियों को खतरे में डाला, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए। जीबी न्यूज की एक रिपोर्ट ने इस मामले को उजागर किया, जिसमें अफगान प्रवासियों से जुड़े अपराधों और डेटा लीक की वजह से बढ़ती असुरक्षा की बात सामने आई। इससे महिला सुरक्षा पहल जैसे संगठनों में गुस्सा है, जो मानते हैं कि सरकार की नीतियां इस मामले में नाकाम रही हैं। आइए, इस मुद्दे को आसान शब्दों में समझें।

डेटा उल्लंघन का मामला

फरवरी 2022 में रक्षा मंत्रालय के एक गलत कदम से करीब 19,000 अफगान नागरिकों की निजी जानकारी लीक हो गई। ये वो लोग थे, जो ब्रिटेन की अफगान रिलोकेशन पॉलिसी (Arap) के तहत वहां बसने की कोशिश कर रहे थे। इनमें ब्रिटिश सेना के साथ काम करने वाले लोगों के नाम और संपर्क डिटेल शामिल थे। इस लीक से उनकी जान को तालिबान से खतरा हो गया। सरकार ने इस पर पर्दा डालने की कोशिश की और जुलाई 2025 तक मीडिया को खबर छापने से रोक दिया गया। बाद में, अप्रैल 2024 में सरकार ने 850 मिलियन पाउंड की ‘अफगानिस्तान रिस्पॉन्स रूट’ योजना शुरू की, जिसके तहत अब तक 4,500 लोग, यानी 900 परिवार, ब्रिटेन में बसाए जा चुके हैं। इस योजना की कुल लागत पांच साल में 7 बिलियन पाउंड तक जा सकती है।

अपराधों में बढ़ोतरी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन में विदेशी नागरिकों, खासकर अफगान मूल के लोगों में यौन अपराधों की सजा की दर काफी ज्यादा है। 2024 में ऐसे अपराधों में दोषी पाए गए लोगों में अफगान प्रवासियों का बड़ा हिस्सा था। इससे महिला सुरक्षा कार्यकर्ता चिंतित हैं। उनका कहना है कि सरकार ने प्रवासियों की पृष्ठभूमि की जांच और उनके एकीकरण में ढिलाई बरती, जिससे ये समस्याएं बढ़ीं। डेटा उल्लंघन ने भी हालात को और बिगाड़ा, क्योंकि कुछ अपराधियों ने इस कमजोरी का फायदा उठाया।

इसे भी पढ़ें: भारत ने अमेरिका-नाटो की धमकी का दिया करार जबाव, कहा- ‘दोहरा मापदंड नहीं चलेगा’

महिलाओं की सुरक्षा पर असर

महिला सुरक्षा पहल का कहना है कि ये डेटा उल्लंघन और अपराधों की बढ़ती संख्या ने ब्रिटेन में महिलाओं के बीच डर बढ़ा दिया है। सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा के इंतजाम कमजोर हैं, और अपराधियों को सजा भी पर्याप्त नहीं मिल रही। कार्यकर्ता चाहते हैं कि सरकार सख्त जांच, बेहतर एकीकरण कार्यक्रम और पीड़ितों के लिए समर्थन बढ़ाए।

सरकार का रवैया 

सरकार ने डेटा उल्लंघन के बाद प्रभावित लोगों को बसाने की कोशिश की, लेकिन कई लोग इसे नाकाफी और देर से उठाया गया कदम मानते हैं। विपक्ष और कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस उल्लंघन को रोका जा सकता था। सुपरइंजंक्शन के इस्तेमाल ने भी सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। यह डेटा उल्लंघन और अपराधों की बढ़ती संख्या ब्रिटेन में आव्रजन और सुरक्षा नीतियों की खामियों को दिखाती है। सरकार ने कुछ कदम उठाए, लेकिन कार्यकर्ता और जनता चाहते हैं कि जांच और एकीकरण की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाए। यह मुद्दा दिखाता है कि आव्रजन, सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है।

Topics: डेटा उल्लंघनअफगान प्रवासीब्रिटेन अपराधअफगान रिलोकेशन पॉलिसीतालिबान खतराData breachAfghan migrantsUK crimeAfghan relocation policyमहिला सुरक्षाTaliban threatwomen safety
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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