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हिंदूफोबिया: आस्था पर हमला, भावनाओं पर चोट

अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमले बढ़ते नस्लीय भेदभाव, पांथिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध घृणा अपराधों की प्रवृत्ति का हिस्सा हैं। यह हिंदू फोबिया है, जिसका उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को आहत करना और हिंदू समुदाय को डराना है

Written byनागार्जुननागार्जुन
Jul 16, 2025, 01:12 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
अमेरिका के यूटा प्रांत स्थित इसी इस्कॉन मंदिर पर गत माह अज्ञात हमलावरों ने गोलीबारी की

अमेरिका के यूटा प्रांत स्थित इसी इस्कॉन मंदिर पर गत माह अज्ञात हमलावरों ने गोलीबारी की

अमेरिका के यूटा राज्य के स्पेनिश फोर्क स्थित इस्कॉन श्रीश्री राधा कृष्ण मंदिर पर गत दिनों कुछ अज्ञात हमलावरों ने गोलीबारी की। हमलावरों ने 20-30 गोलियां दागीं, जिससे मंदिर की बाहरी दीवारों, पूजा कक्ष की खिड़की और हाथ से बनी मेहराबों को भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि, इस हमले के दौरान मंदिर के भीतर भक्त और मेहमान मौजूद थे, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। यह मंदिर वार्षिक होली उत्सव के लिए विश्वविख्यात है। इस घटना को ‘हेट क्राइम’ के तौर पर देखा गया, जिससे पांथिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

जून 2025 के अंतिम सप्ताह में यूटा इस्कॉन मंदिर पर कई रातों तक गोलीबारी की गई। मंदिर के अध्यक्ष वै वॉर्डन के अनुसार, यह एक सामुदायिक आश्रय स्थल है, जहां विभिन्न मत-पंथों के लोग आते हैं। मंदिर प्रशासन और इस्कॉन ने इस हमले को ‘हेट क्राइम’ करार दिया है। उनका कहना है कि यह हमला धार्मिक भावनाओं को आहत करने और हिंदू समुदाय को डराने के इरादे से किया गया। लेकिन यूटा काउंटी शेरिफ कार्यालय ने इसे ‘वैंडलिज्म’ (उपद्रव) करार दिया है।

इस्कॉन और हिंदू समूहों जैसे कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) ने इस हमले को खालिस्तानी आतंकवाद से प्रेरित बताया है, क्योंकि इस हमले को लॉस एंजिल्स में प्रस्तावित ‘खालिस्तान रेफरेंडम’ ‘Khalistan Referendum’ के आसपास अंजाम दिया गया। उल्लेखनीय है कि 23 मार्च, 2025 में खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने लॉस एंजिल्स में ‘खालिस्तान रेफरेंडम’ का आयोजन किया था। स्थानीय पुलिस और यूटा काउंटी शेरिफ कार्यालय इस्कॉन मंदिर पर हमले की जांच कर रहा है। मंदिर प्रशासन ने भी अपराधियों की सूचना देने वालों को 1,000 डॉलर इनाम देने की घोषणा की है।

पांथिक और नस्लीय असहिष्णुता

हाल के वर्षों में, अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमलों में वृद्धि देखी गई है। 2023 और 2024 में कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क में बीएपीएस स्वामिनारायण मंदिरों पर तोड़फोड़ और ‘हिंदू वापस जाओ’ जैसे नफरत भरे संदेश लिखे गए। ये घटनाएं हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती असहिष्णुता की ओर संकेत करती हैं। जैसे-25 सितंबर, 2023 को कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो स्थित बीएपीएस मंदिर में भी रात में तोड़फोड़ कर नफरत भरे संदेश लिखे गए। इसके तुरंत बाद, इसी तरह से न्यूयॉर्क में बीएपीएस मंदिर पर हमला हुआ। इस वर्ष मार्च में कैलिफोर्निया के चिनो हिल्स में खालिस्तानी रेफरेंडम से पहले बीएपीएस मंदिर में तोड़फोड़ हुई थी और नफरत भरे नारे लिखे गए थे।
इसलिए CoHNA और अन्य हिंदू संगठनों ने इन हमलों को खालिस्तानी अलगाववाद से जोड़ा है।

उनका कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य हिंदू समुदाय को डराना है। यूटा इस्कॉन मंदिर पर जून के अंतिम सप्ताह में तीन बार गोलीबारी हुई, जो एक सुनियोजित हमला प्रतीत होता है। खालिस्तान रेफरेंडम जैसे आयोजनों के समय में हिंदू मंदिरों पर हमले बढ़ जाते हैं, जो भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने का प्रयास हो सकता है। लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इन घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया और कई मामलों में इन्हें केवल ‘वैंडलिज्म’ के तौर पर वर्गीकृत किया है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से भी राष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को लेकर कोई स्पष्ट बयान या कार्रवाई नहीं देखी गई। प्रशासन ने इस मामले को स्थानीय पुलिस और शेरिफ कार्यालयों पर छोड़ दिया है। इसके अलावा, अमेरिका में बढ़ते सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण ने अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से दक्षिण एशियाई और हिंदू समुदायों के विरुद्ध ‘हेट क्राइम’ को बढ़ावा दिया है।

इस खबर को भी पढ़ें – ट्रंप प्रशासन को झटका: हमास समर्थक भारतीय शोध छात्र बदर खान सूरी के निर्वासन पर अमेरिकी कोर्ट की रोक

ट्रंप प्रशासन की विवादास्पद नीतियां

ट्रंप प्रशासन ने अपने दूसरे कार्यकाल में कई विवादास्पद नीतियां लागू की हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने ‘पांथिक’ स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की बात कही है, लेकिन इसका ध्यान मुख्य रूप से यहूदी और ईसाई समुदायों पर केंद्रित रहा है। न तो हिंदू मंदिरों पर हमले रोकने के लिए कोई विशेष नीति बनाई गई है और न ही पांथिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके विपरीत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आप्रवासन नीतियों, जैसे- अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर प्रतिबंध और विदेशी नागरिकों पर निगरानी ने अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा की भावना को बढ़ाया है। इस कारण कुछ समूहों में कट्टरता बढ़ी है।

दूसरी ओर, इन हमलों के पीछे गहरे सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक कारण हैं। हिंदू समुदाय को निशाना बनाने के पीछे अमेरिका में बढ़ती नस्लीय और पांथिक असहिष्णुता भी एक कारण हे। ‘हिंदू वापस जाओ’ जैसे संदेश इसका उदाहरण हैं। कुछ हमले खालिस्तानी आतंकवाद से प्रेरित हो सकते हैं, जो भारत विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देता है। हिंदुओं या हिंदू मंदिरों पर हमलों को अक्सर मुख्यधारा मीडिया में कम कवरेज मिलती है, जिससे अपराधियों को प्रोत्साहन मिलता है। ऐसे मामलों में प्रशासन स्थानीय प्राय: पुलिस को जांच व सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश देता है, पर इस हमले के बाद कोई ठोस कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं हुई है। हिंदू संगठनों ने बार-बार प्रशासन से ‘सिस्टमेटिक हेट’ व लापरवाही पर लगाम कसने की मांग की है।

इस खबर को भी पढ़ें –
अमेरिका में हिन्दू विरोधी नफरती तत्वों ने इस्कॉन मंदिर को फिर बनाया निशाना, गोलियों से छलनी हुईं मंदिर की दीवारें

हिंदू मंदिरों पर बढ़ते हमले

अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमले कोई नई बात नहीं हैं। विशेषज्ञों की मानें तो 2016 के बाद से घृणा अपराधों में वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें पांथिक और नस्लीय अल्पसंख्यक, दोनों निशाने पर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन के दौरान और उससे पहले भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं, लेकिन हाल के वर्षों में ऐसे मामले बढ़े हैं। बीते पांच वर्ष के दौरान कैलिफोर्निया, मिनेसोटा, न्यूयॉर्क, टेक्सास और अब यूटा सहित कई राज्यों में हिंदू मंदिरों पर तोड़फोड़, आगजनी व गोलीबारी की घटनाएं हो चुकी हैं।

हिंदू मंदिरों पर हमले बढ़ते नस्लीय भेदभाव, धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ घृणा अपराधों की प्रवृत्ति का हिस्सा हैं। यह हिंदूफोबिया है, जिसका उद्देश्य हिंदू धर्म, हिंदुओं के प्रति डर और नफरत फैलाना है। इसलिए इन हमलों को केवल धार्मिक स्थलों पर होने वाले हमलों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये हमले पांथिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाते हैं। ट्रंप प्रशासन और इससे पहले भी अमेरिकी प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा अपराधों की निंदा की है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर कुछ कार्रवाई हुई है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इन हमलों को रोकने के लिए कोई विशेष या ठोस नीति का अभाव दिखता है। इसे रोकने के लिए कठोर कानूनी कार्रवाई, समुदाय में जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।

Topics: श्रीश्री राधा कृष्ण मंदिरआस्था पर हमलायूटा इस्कॉन मंदिरहिंदू मंदिरों पर हमलाhinduphobiaShri Shri Radha Krishna TempleहिंदूफोबियाAttack on faithअमेरिका में हिंदू मंदिरUtah ISKCON TemplePresident Donald TrumpHindu temples in Americaपाञ्चजन्य विशेषattack on Hindu templesराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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