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उच्च शिक्षा : बढ़ रहा भारत का कद

पिछले एक दशक से शिक्षा के क्षेत्र में लगातार हो रहे सुधारात्मक प्रयासों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के चलते शैक्षणिक क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत की साख में बढ़ोतरी हुई है, जो कई मायनों में बेहद खास है

Written byप्रणय कुमारप्रणय कुमार
Jul 8, 2025, 08:02 am IST
inभारत, विश्लेषण, शिक्षा

बीते सप्ताह ईरान-इस्राएल युद्ध की सुर्खियों के बीच शिक्षा क्षेत्र में भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि दबी रह गई, जिसकी चर्चा होनी चाहिए थी, वह यह कि क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

रैंकिंग में ऐतिहासिक छलांग

प्रणय कुमार
शिक्षाविद् एवं सामाजिक संस्था ‘शिक्षा-सोपान’ के संस्थापक

गत 19 जून को जारी की गई ‘क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग’ में भारत ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। इस वर्ष इस सूची में 106 देशों के कुल 8,000 संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में से 1,501 संस्थानों को स्थान मिला, जिनमें 112 संस्थान पहली बार सम्मिलित हुए हैं। भारत के 54 संस्थानों को इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला, जो अब तक का रिकॉर्ड है। यह संख्या भारत को न केवल जर्मनी (48) और जापान (47) जैसे विकसित देशों से आगे ले जाती है, बल्कि इसे अमेरिका, यूके और चीन के बाद चौथा सर्वाधिक प्रतिनिधित्व वाला देश भी बनाती है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में भारत के केवल 11 संस्थान इस सूची में थे। यानी पिछले एक दशक में भारत ने 390 प्रतिशत, लगभग पांच गुना की वृद्धि दर्ज की है।

निजी संस्थानों की सशक्त उपस्थिति

इस वृद्धि में न केवल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएससी), दिल्ली, मुंबई, मद्रास, खड़गपुर, कानपुर, गुवाहाटी, रुड़की, बीएचयू जैसे 12 संस्थान, भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरू, दिल्ली विश्वविद्यालय, अन्ना विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे पारंपरिक व लब्धप्रतिष्ठित संस्थानों-विश्वविद्यालयों ने योगदान दिया है, बल्कि कई निजी विश्वविद्यालयों ने भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।

क्या है ‘क्यूएस रैंकिंग’

क्यूएस (क्वाक्वेरेली साइमंड्स) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स उच्च शिक्षा की दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित और व्यापक रूप से संदर्भित रैंकिंग्स में से एक मानी जाती है। इसके अंतर्गत कुल नौ संकेतकों के आधार पर संस्थानों का मूल्यांकन किया जाता है, जिनमें शैक्षणिक प्रतिष्ठा (एकेडमिक रेपुटेशन), नियोक्ता प्रतिष्ठा (एम्पलॉयर रेपुटेशन), संकाय-छात्र अनुपात (फैकल्टी/स्टूडेंट रेशो), प्रति संकाय उद्धरण (साईटेशंस पर फैकल्टी), अंतरराष्ट्रीय संकाय और छात्र अनुपात (इंटरनेशनल फैकल्टी एंड स्टूडेंट रेशो) रोजगार परिणाम (एम्प्लॉयमेंट आउटकम्स), अंतरराष्ट्रीय शोध नेटवर्क (इंटरनेशनल रिसर्च नेटवर्क) और वहनीयता (सस्टेनिबिलिटी) जैसे मानक शामिल हैं।

 

यह उपलब्धि रातोंरात नहीं प्राप्त हुई, विगत एक दशक से किए जा रहे सुधारात्मक प्रयासों एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के क्रियान्वयन से ही इसे गति एवं बल मिला है। इस वर्ष क्यूएस रैंकिंग में शामिल भारतीय संस्थानों में से लगभग 48 प्रतिशत ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। उल्लेखनीय है कि पहली बार आठ भारतीय संस्थान इस सूची में शामिल हैं, जो किसी भी देश में सर्वाधिक है। आईआईटी दिल्ली ने पहली बार शीर्ष 125 में प्रवेश करते हुए पिछले वर्ष की तुलना में 27 और 2 वर्ष पहले की तुलना में 70 रैंक की छलांग लगाकर 123वीं रैंक हासिल की है।

वहीं आईआईटी, मुंबई 129वीं और आईआईटी, मद्रास ने अपनी पिछली 227वीं रैंकिंग से 47 स्थान ऊपर चढ़कर शीर्ष 200 में प्रवेश किया है। आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि का कहना है, ”हमने अंतर्विषयक शोध, शिक्षा और संस्कृति को केंद्र में रखा है। नई शिक्षा नीति में भी इसी दृष्टिकोण को बल मिला है। यही कारण है कि अब आईआईटी मद्रास, कानपुर और खड़गपुर में चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान और शिक्षण की शुरुआत की गई है।”

वैश्विक मानदंडों पर प्रगति

क्यूएस रैंकिंग में शामिल कुल नौ संकेतकों में भारत के अधिकांश शीर्ष संस्थानों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि के अनुसार, अंतर्विषयक शोध, शिक्षा और संस्कृति को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक आवश्यकताओं के समन्वय से कार्य किया गया है। आईआईटी मद्रास ने बीते एक वर्ष में 417 पेटेंट दाखिल किए और 103 स्टार्टअप्स प्रारंभ किए। ‘नियोक्ता प्रतिष्ठा’ में भारत के पांच विश्वविद्यालय वैश्विक शीर्ष 100 संस्थान में हैं।

उच्च शिक्षा में तकनीकी दक्षता और व्यावसायिक कौशल को सशक्त बनाने की दिशा में कई ठोस कदम उठाए गए हैं। शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी कम करने, सार्वजनिक-निजी विश्वविद्यालयों के सहयोग को बढ़ावा देने, प्रवेश, संकाय चयन और पाठ्यक्रम में अधिक लचीलापन लाने की दिशा में सार्थक पहल हुई है। अधिकांश आईआईटी ने उच्च गुणवत्ता वाले ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। रोजगारोन्मुखी शिक्षा को मजबूती देने के लिए भी निर्णायक प्रयास किए गए हैं। इससे छात्रों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) के साथ-साथ मानविकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे विषयों के सम्मिलन से बहुविषयक और युगानुकूल अध्ययन की सुविधा मिल रही है।

सुधार और वैश्विक विस्तार

उच्च शिक्षा में तकनीकी दक्षता और व्यावसायिक कौशल को सशक्त बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं। विद्यालयी स्तर से लेकर विश्वविद्यालय तक समग्र शिक्षा, अंतर्विषयक पाठ्यक्रम, रोजगारोन्मुखी योजनाएं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां तेजी से बढ़ रही हैं। आईआईटी मद्रास ने जंजीबार, आईआईटी दिल्ली ने अबूधाबी और आईआईएम अमदाबाद ने दुबई में अपने परिसर प्रारंभ किए हैं। कई विदेशी विश्वविद्यालय भी भारत में अपने केंद्र खोलने की प्रक्रिया में हैं।

Topics: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंगपाञ्चजन्य विशेषआईआईटीशिक्षा-सोपानमुंबई 129वींमद्रासभारतीय संस्थान
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