आपातकाल@50 : अगली पीढ़ी को आघातकाल से परिचित कराना जरूरी
October 2, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

आपातकाल@50-हिटलर-गांधी : अगली पीढ़ी को आघातकाल से परिचित कराना जरूरी

रा. स्व. संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने 26 जून को नई दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और बहुभाषी संवाद समिति ‘हिन्दुस्थान समाचार’ के तत्वावधान में आपातकाल की 50वीं बरसी पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 27, 2025, 06:01 pm IST
inभारत, संघ @100
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आघात था। यह कार्यक्रम उन घटनाओं की स्मृति मात्र नहीं है जो आधी सदी पूर्व घटी थीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को यह बताने का माध्यम भी है कि तानाशाही प्रवृत्तियां कितनी खतरनाक होती हैं।” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने अपने संबोधन में उक्त उद्गार व्यक्त किए।

उन्होंने आगे कहा कि आज की पीढ़ी को समझना होगा कि 1975 में जब आपातकाल लागू हुआ, तब किस प्रकार सत्ता के लोभ में डूबी मानसिकता ने लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास किया। संविधान को किनारे रखकर मौलिक अधिकारों का दमन किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली गई, विपक्ष को जेलों में डाल दिया गया और देश में भय का वातावरण निर्मित हुआ।

आपातकाल के संदर्भ में हमने पहले भी बताया है। हम बताते रहेंगे, हमारे लिए तो ये पुरानी यादें हैं, लेकिन ‘एलुमनी एसोसिएशन’ बनाकर आपातकाल की बरसी मनाने का कोई अर्थ नहीं। हमें वर्तमान पीढ़ी को इस बारे में कैसे बताना है, इसकी योजना बनानी चाहिए। आज का भारत, 1975 के भारत से बहुत आगे है। लेकिन अगर हम भूल गए कि किस प्रकार एक सत्ता ने लोकतंत्र को रौंदा था, तो यह ठीक नहीं होगा। लोकतंत्र को बचाने की जिम्मेदारी केवल राजनीतिक दलों की नहीं, बल्कि समाज के हर अंग की है।

विश्वास खो चुकी थी कांग्रेस

इंदिरा गांधी ने तीन मोर्चों पर हार झेली थी। पहला, न्यायपालिका में, जहां राजनारायण की याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनके चुनाव को निरस्त कर दिया। इससे उनके प्रधानमंत्री बने रहने का नैतिक आधार खत्म हो गया। दूसरा, जनता के बीच, जब गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पराजित हुई। और तीसरा, देशभर में उभरे छात्र आंदोलनों के कारण, जिनमें युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, शिक्षा प्रणाली और चुनाव सुधार जैसे मुद्दों पर संगठित आंदोलन चलाया। इन आंदोलनों ने दिखा दिया था कि जनता के न्यायालय में भी कांग्रेस हार चुकी थी। जब इंदिरा गांधी को लगा कि अब सत्ता हाथ से निकल रही है, तो उन्होंने लोकतंत्र की हत्या कर दी। आपातकाल केवल सत्ता का दमन नहीं था, यह विचारों पर हमला था। उस कालखंड में जो संघर्ष हुआ, वह केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि वह भारत के आत्मसम्मान का संघर्ष था। यह देश के लोकतंत्र को बचाने का संग्राम था।

ऐतिहासिक क्षण के साक्षी

जिस दिन आपातकाल घोषित हुआ, मैं उस दिन बेंगलुरु में संघ की शाखा में था। वहां इस बारे में पता चला। तब न मोबाइल थे, न टीवी। हमें बस यह पता था कि दिल्ली में 25 जून को एक बड़ा कार्यक्रम हुआ था। बेंगलुरु में अटल जी, आडवाणी जी, मधु दंडवते और श्यामानंदन मिश्रा जी एक संसदीय समिति के दौरे पर आए थे। तीन लोग विधायक भवन के गेस्ट हाउस में थे और मधु दंडवते जी अशोक होटल में थे। हम आंदोलन में थे ही, इसलिए जब पता चला कि आपातकाल घोषित हो गया है, तो हम मोटरसाइकिल लेकर गेस्ट हाउस पहुंचे। तीनों नेता नाश्ता करके नीचे उतर रहे थे, समिति की बैठक में जाने के लिए। मैंने देखा कि अटल जी, आडवाणी जी, श्यामानंदन मिश्रा जी को पुलिस गिरफ्तार कर रही थी। हम उस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। तब आडवाणी जी ने कहा, फोन लगाओ। मिश्रा जी ने पुलिस ने पूछा, ‘Where is the warrant’? तब बेंगलुरू के पुलिस कमिश्नर ने कहा , ‘Sir, there is no warrant. There is no need.’।
इस पर मिश्रा जी ने कहा, ‘Don’t teach me law. I am the law maker.’ मुझे आज भी याद है। अटल जी ने कहा, ‘अब तो मामा के घर जाना ही पड़ेगा।’ आडवाणी जी ने कहा, ‘पीटीआई को फोन लगाओ’ तो अटल जी ने कहा, ‘फोन पर बयान देता हूं, लेकिन छापेगा कौन?’ उन्हें पता था कि कोई नहीं छापेगा। तब अटल जी ने कहा था, ‘मिश्राजी, अब तो मामा के घर जाना ही पड़ेगा।’ यह केवल एक राजनीतिक कटाक्ष नहीं था, यह उस समय की निराशा और व्यंग्य का प्रतीक था। लोगों को मोमबत्तियों से जलाया गया, बिजली के झटके दिए गए, जेलों में अमानवीय यातनाएं दी गईं। पुलिस और प्रशासन ने दमन का कोई तरीका नहीं छोड़ा। यह सत्ता की सनक थी, संवैधानिक तानाशाही का वह स्वरूप जो लोकतंत्र का मखौल उड़ाता है।

संविधान की हत्यारी मानसिकता

श्री होसबाले ने कहा कि देश में मौलिक अधिकारों का हनन करते हुए, लोकतंत्र की हत्या करते हुए, संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए, भारत की जनता की आवाज को पूरी तरह से दबाने का एक राक्षसी प्रयास तो हुआ, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। कुछ समय के लिए उन्हें सफलता मिली, लेकिन उसका नुकसान बहुत हुआ।

व्यक्तिगत रूप से कितने ही लोगों को कष्ट सहना पड़ा। भूमिगत होने के कारण उनके व्यवसाय में हानि हुई। पुलिस लॉकअप में तरह-तरह की यातना दी गई। किसी पर आरोप लगाए गए। तरह-तरह के दमन किए गए। देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था में अंग्रेजी मानसिकता बनी रही, अधिकारी खुद को जनता के सेवक नहीं, बल्कि शासक समझते रहे। आपातकाल के दौरान केवल इंदिरा गांधी के बारे में नहीं बताना चाहिए, बल्कि उस मानसिकता के बारे में बताना चाहिए जिसने संविधान की हत्या की। कैसे इसी मानसिकता के चलते एक पार्टी के अलावा दूसरे दलों के लोग लोकतंत्र के भीतर भी स्वतंत्र नहीं रहे, यह भी अगली पीढ़ी को बताना चाहिए।

सत्ता की हठधर्मिता था आपातकाल

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कार्यक्रम में कहा कि 1975 की वह रात सिर्फ लोकतंत्र के इतिहास की एक तारीख नहीं थी, बल्कि भारतीय गणराज्य की आत्मा पर पड़ी एक ऐसी कालिमा थी, जो पीढ़ियों तक स्मृति में रहेगी। 25 जून की वह रात, जब ठीक 11 बजकर 45 मिनट पर इमरजेंसी घोषित हुई, वह वस्तुतः संविधान की हत्या का क्षण था।आज जब हम आपातकाल की 50वीं बरसी पर संवाद कर रहे हैं, तो यह न केवल स्मृति, बल्कि आत्म परीक्षण का अवसर भी है।

क्या आपातकाल आवश्यक था? यह सवाल हर भारतीय को खुद से पूछना चाहिए। संविधान, जेपी आंदोलन और उस काल की परिस्थितियों को यदि गहराई से समझा जाए, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि आपातकाल पूरी तरह अनावश्यक था। आपातकाल केवल और केवल इंदिरा गांधी की सत्ता की हठधर्मिता का परिणाम था। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जो लोकतंत्र के मूल्यों में विश्वास करता है, उसने इस तानाशाही के विरुद्ध आवाज उठाई।

तानाशाही के खिलाफ एक सशक्त व्यवस्था खड़ी की। यह नेटवर्क किसी सरकारी तंत्र की तरह नहीं था, यह वैचारिक प्रतिबद्धता और सामाजिक साहस की नींव पर खड़ा था। यह वह तानाशाही विरोधी नेटवर्क था, जिसने न केवल जनता को साहस दिया, बल्कि स्वयंसेवकों को जेल की सलाखों के पीछे और भूमिगत आंदोलनों के भीतर जनतंत्र को पुनः जीवित करने की प्रेरणा दी।

विपदा में अग्रिम पंक्ति का योद्धा

1948 में जब पहली बार संघ पर प्रतिबंध लगा था, उसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का जन्म हुआ था। 1975 में जब पुनः प्रतिबंध लगा, तब संघ के अधिकतर कार्यकर्ता विद्यार्थी परिषद के माध्यम से भूमिगत या संघर्षशील रहे। वह सिर्फ छात्र संगठन नहीं रहा, बल्कि वह आपातकाल में लोकतंत्र के संघर्ष का अग्रिम मोर्चा बन गया।

महापुरुषों की दूरदृष्टि

आपातकाल का अंत एक दमनकारी शासिका के भ्रम के टूटने से हुआ। उन्हें लगता रहा होगा कि वह चुनाव जीत कर अपनी तानाशाही पर लोकतंत्र की मुहर लगवा लेंगी, लेकिन जनता ने उन्हें जवाब दिया और वह बुरी तरह से चुनाव हार गईं। 1977 का चुनाव परिणाम इस तानाशाही के विरुद्ध भारतीय जनमानस की घोषणा थी कि जनता ने आपातकाल को और तानाशाही को सिरे से अस्वीकार कर दिया। इस जनतांत्रिक पुनर्जन्म के दो महानायक थे, जयप्रकाश नारायण और तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहेब देवरस। एक ने संकल्प दिया, दूसरे ने संगठन। एक ने दिशा दी, दूसरे ने ध्येय। दोनों को नमन।

देश की स्वतंत्रता के लिए जैसे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान की बाजी लगाई, वैसे ही लोकतंत्र की हत्या करने वाले आपातकाल से मुक्ति के लिए जिन योद्धाओं ने लड़ाई लड़ी, उनको बारम्बार प्रणाम!
— रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री,दिल्ली

 

आपातकाल के नाम पर हमारे देश को एक बार फिर से गुलामी की बेड़ियों में जकड़ दिया गया था। जो अभिव्यक्ति की आजादी हमें लाखों लोगों के बलिदान के बाद प्राप्त हुई थी, उस अभिव्यक्ति की आजादी को आपातकाल के नाम पर छीन लिया गया था।
— गजेन्द्र सिंह शेखावत, केंद्रीय संस्कृति मंत्री

 

जो लोग आज संविधान की प्रति लेकर घूम रहे हैं, आज से ठीक 50 साल पहले उन्होंने लोकतंत्र का गला घोंटकर देश में आपातकाल लागू किया था। पूरे देश और देशवासियों की आवाज को दबाया गया। रातोंरात सैकड़ों पत्रकारों को कैद कर लिया गया। 25 जून, 1975 की रात को अचानक कई अखबारों की बिजली काट दी गई थी। विदेशी मीडिया को भी प्रतिबंधित कर दिया था ताकि अगले दो दिन तक कोई बड़ा अखबार न छप सके।
— अश्वनी वैष्णव, केंद्रीय रेल मंत्री

लोकतंत्र की परीक्षा का समय

उस समय न्यायालय, मीडिया-सभी क्षेत्रों के कुछ लोग डरे, झुके पर बिके नहीं। धर्मवीर भारती, कमलेश्वर, श्रीनिवास, ए.डी. गोरवाला, केआर मलकानी, जैसे कई पत्रकारों ने आवाज उठाई, लेकिन बहुत से चुप भी रहे। लोकतंत्र के दो रक्षक-स्वतंत्र पत्रकारिता और स्वायत्त न्याय व्यवस्था, उस समय सत्ता के आगे झुक गए थे। ये बातें अगली पीढ़ी को बतानी चाहिए। आपातकाल भारत के लोकतंत्र के लिए एक कठिन परीक्षा था।

प्रशासनिक ढांचे पर सवाल

सरकार्यवाह ने आगे कहा कि आपातकाल के अनुभवों के बाद जेल मैन्युअल, पुलिस प्रणाली, प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक संरचना पर पुनर्विचार की आवश्यकता स्पष्ट हो गई थी। धर्मवीर आयोग (राष्ट्रीय पुलिस आयोग) जैसी संस्थाएं गठित हुईं, लेकिन जो बदलाव होने चाहिए थे, वे अधूरे ही रह गए। आज जब हम संविधान निर्माता बाबासाहेब आंबेडकर के नाम पर बने भवन में इस चर्चा को आगे बढ़ा रहे हैं, तब यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि आपातकाल के दौरान ही संविधान की प्रस्तावना में दो शब्द जोड़ दिए गए-‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’। यह तब किया गया, जब देश में संसद निष्क्रिय थी, न्यायपालिका मौन थी और नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे। यह संशोधन किसी गहन विमर्श या लोकतांत्रिक सहमति से नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की इच्छा से किया गया था।

कार्यक्रम में आपातकाल पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन करते श्री दत्तात्रेय होसबाले। साथ में (बाएं से) राकेश कुमार, सच्चिदानंद जोशी, गोविंदाचार्य, रामबहादुर राय, नितिन गडकरी एवं अरविंद भालचंद्र मार्डीकर

लोकतंत्र को बचाने का संकल्प

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं कि आपातकाल के दौरान भारत की आत्मा पर हमला हुआ था। लेकिन यह भी सच है कि भारत की जनता ने उस हमले का उत्तर अपने लोकतांत्रिक आचरण से दिया। चुनाव हुए, सत्ता बदली और दुनिया को दिखा दिया गया कि भारत के लोग तानाशाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर सकते। विन्सटन चर्चिल ने कभी कहा था कि भारत लोकतंत्र के योग्य नहीं है। लेकिन हमने दिखाया कि भारतीय नागरिक अवसर आने पर लोकतंत्र के रक्षक बनते हैं, बलिदान देते हैं और उसे जीवित रखते हैं। इतिहास केवल स्मरण के लिए नहीं होता। आपातकाल केवल एक बीता हुआ अध्याय नहीं है। यह एक चेतावनी है। यह हर उस प्रवृत्ति के खिलाफ अलार्म है, जो लोकतंत्र के मूल्यों को कुचलना चाहती है। आज भी वे लोग सक्रिय हैं, जिन्होंने देश पर आपातकाल थोपा था। आज भी उन्होंने माफी नहीं मांगी है। आज भी उस काले अध्याय को न्यायोचित ठहराने के प्रयास हो रहे हैं।

नहीं था न्याय मांगने का हक

कार्यक्रम में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “1975 में मैं मैट्रिक का छात्र था। आपातकाल की सुबह अखबार नहीं छपे थे। उस दौर में हजारों निर्दोष लोगों को जेल में डाल दिया गया। संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार समाप्त कर दिए गए थे। पुलिस की गोली से मारे गए व्यक्ति को भी न्याय मांगने का हक नहीं था। बिहार आंदोलन के केंद्र में था, जिसमें अनेक छात्र संगठनों और संघ से प्रेरित कार्यकर्ताओं ने भाग लिया था। उस समय ‘इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा’ जैसे नारों के जरिए चाटुकारिता की पराकाष्ठा देखी जा सकती थी। आज उसी पार्टी के नेता दूसरों पर संविधान बदलने का आरोप लगाते हैं। आपातकाल के 50 वर्ष हमें यह याद दिलाते हैं कि लोकतंत्र की रक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, संघर्ष और बलिदान से होती है।”

Topics: हिटलर-गांधी : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघस्वतंत्र पत्रकारितास्वायत्त न्याय व्यवस्थासंविधान की हत्यारी मानसिकताआपातकालपाञ्चजन्य विशेषभारतीय लोकतंत्रभारत की आत्मा पर हमलाआपातकाल@50
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

कैप्टन स्मित मछार

कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर दुनिया कर रही सलाम, फिर भारत का लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम चुप क्यों ?

आज का श्लोक : नेतृत्व और टीम भावना का सूत्र, श्लोक में छिपी है सफलता की 3 मुख्य शर्तें

Smartphone Shastra and Gen Z Indian Youth Analysis Swami Vishalanand Panchjanya

स्मार्टफोन, शास्त्र और संवाद: दिशाहीन विरोध प्रदर्शनों के बीच क्या सोच रहा आज का भारतीय युवा? पढ़ें विशेष विश्लेषण

हनुमान अंश : जड़ों की ओर लौटता सिनेमा

अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

35 सवाल, 15 साल का डाटा और घुसपैठ का नेटवर्क: डेमोग्राफी चेंज पर गृह मंत्रालय की जांच से क्यों मची हलचल?

हरिपुर कालसी में हरिघाट के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ स्वामी चिदानंद सरस्वती और महामंडलेश्वर अरुण गिरि जी महाराज

हरिपुर : विरासत का पुनरुत्थान

Load More

ताज़ा समाचार

डॉ. भीमराव अंबेडकर के आर्थिक विचार: कृषि, उद्योग और RBI से लेकर सामाजिक न्याय तक, आज क्यों प्रासंगिक हैं बाबा साहेब?

Asian Games 2026 India 6 Gold Medals Women Hockey Lovlina Borgohain Parveen Hooda Panchjanya Sports

2026 एशियाई खेल: स्वर्ण पदकों की लगी झड़ी, शान से लहराया तिरंगा, बेटियों ने हॉकी, तीरंदाजी और मुक्केबाजी में रचा इतिहास

RSS Chief Dr Mohan Bhagwat Statement Borivali Mumbai Rashtra And Dharm Panchjanya News

भारतीय ज्ञान संपदा की संपूर्ण विश्व को जरुरत: बोरीवली में बोले सरसंघचालक जी- ‘भारत की ओर उम्मीद से देख रही दुनिया’

कल का मौसम: 3 अक्टूबर को देश के किन राज्यों में होगी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

PM मोदी से बोले कैप्टन मच्छार- हनुमानजी ने बचा लिया, जब भी दर्द में होता हूं ‘हनुमान चालीसा’ पढ़ता हूं

चित्र प्रतीकात्मक

उजड़ता पंजाब: 6 महीने में मां ने खोया दूसरा बेटा! नशे की ओवरडोज से सुनाम में युवक की मौत, परिजनों में हाहाकार

सांकेतिक चित्र

पंजाब बॉर्डर पर BSF की बड़ी कार्रवाई: तरनतारन में घुसपैठ कर रहे 2 पाकिस्तानी तस्कर ढेर, 1 अंधेरे का फायदा उठाकर फरार!

Rampur Tiraha Kand CM Pushkar Singh Dhami Tributes Uttarakhand State Activists Statue Panchjanya

रामपुर तिराहा सभा में CM धामी का बड़ा ऐलान: गांवों में लगेंगी आंदोलनकारियों की मूर्तियां, ई-लाइब्रेरी का होगा निर्माण!

Akhil Bharatiya Vyas Sangh Kashi National Convention Jagadguru Balak Devacharya Panchjanya

काशी में गरजा व्यास संघ: कन्वर्जन के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z को राम भक्ति से जोड़ने का प्रस्ताव!

Uttarakhand Religious Tourism Record Pilgrims Badrinath Kedarnath Kainchi Dham CM Dhami Panchjanya

देवभूमि में टूटा रिकॉर्ड: उत्तराखंड में 1.16 करोड़ से अधिक पहुंचे श्रद्धालु, CM धामी बोले- अर्थव्यवस्था को मिली ताकत!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies