NCERT विवाद के बीच यह लेख पढ़ें : रानी दुर्गावती की बहादुरी, अकबर की तिलमिलाहट और गोंडवाना की गौरव गाथा
August 23, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

NCERT विवाद के बीच यह लेख पढ़ें : रानी दुर्गावती की बहादुरी, अकबर की तिलमिलाहट और गोंडवाना की गौरव गाथा

रानी दुर्गावती के गोंडवाना साम्राज्य की संपन्नता और समृद्धि की चर्चा कड़ा और मानिकपुर के सूबेदार आसफ खान ने मुगल दरबार में की थी

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा
Jul 17, 2025, 07:07 pm IST
inभारत
वीरांगना रानी दुर्गावती

वीरांगना रानी दुर्गावती

एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब को लेकर कथित सेकुलर गैंग विलाप कर रह है। इसमें मुगलों और दिल्ली सल्तनत की कट्टरता के बारे में बताया गया है। बाबर को बर्बर, अकबर को सहिष्णुता और क्रूरता का मिश्रण और औरंगजेब को मंदिर तथा गुरुद्वारा तोड़ने वाला बताया गया। आइये इस विवाद के बीच अकबर की कथित बहादुरी को भी देखें…

रानी दुर्गावती के गोंडवाना साम्राज्य की संपन्नता और समृद्धि की चर्चा कड़ा और मानिकपुर के सूबेदार आसफ खान ने मुगल दरबार में की थी। धूर्त, लंपट और चालाक अकबर लूट और विधवा रानी को कमजोर समझते हुए बदनीयती से गोंडवाना साम्राज्य हथियाने के उद्देश्य से रानी को आत्मसमर्पण के लिए धमकाया और अपने दूत से यह परवाना लिख कर भेजा कि “अपनी सीमा राज की, अमल करो परमान। भेजो नाग सुपेत सोई, अरु अधार दीवान।।

परंतु गोंडवाना की निर्भीक, स्वाभिमानी, स्वतंत्र प्रिय और स्व की प्रतिमूर्ति वीरांगना रानी दुर्गावती नहीं मानी । तब अकबर का एक और संदेश आया कि स्त्रियों का काम रहंटा कातने का है, तो रानी ने जवाब में संदेश के साथ सोने का पींजन भेजा और कहा कि आपका भी काम रुई धुनकने का है। अकबर तिलमिला गया और उसने आसफ खान को गोंडवाना साम्राज्य की लूट और विनाश के लिए रवाना किया। इसके पूर्व अकबर ने दो गुप्तचरों क्रमशः गोप महापात्र और नरहरि महापात्र को भेजा परंतु वीरांगना ने दोनों को अपनी ओर मिला लिया। उन्होंने अकबर की योजना और आसफ खाँ के आक्रमण के बारे में रानी दुर्गावती को सबकुछ बता दिया।

वीरांगना रानी दुर्गावती के मुगलों से 6 भीषण युद्ध

वीरांगना रानी दुर्गावती सतर्क हो गईं और सिंगौरगढ़ में मोर्चा बंदी कर ली। आसफ खान 6 हजार घुड़सवार सेना, 12 हजार पैदल सेना एवं तोपखाने तथा स्थानीय मुगल सरदारों के साथ सिंगोरगढ़ आ धमका। रानी दुर्गावती के साथ, उनके पुत्र वीर नारायण सिंह, अधार सिंह, हाथी सेना के सेनापति अर्जुन सिंह बैस, कुंवर कल्याण सिंह बघेला, चक्रमाण कलचुरि, महारुख ब्राह्मण, वीर शम्स मियानी, मुबारक बिलूच,खान जहान डकीत, महिला दस्ता की कमान रानी दुर्गावती की बहन कमलावती और पुरा गढ़ की राजकुमारी (वीर नारायण सिंह की होने वाली पत्नी) संभाली। युद्ध आरंभ हो गया।

सिंगोरगढ़ का प्रथम युद्ध
आसफ खान ने आत्मसमर्पण के लिए कहा, वीरांगना दुर्गावती ने कहा कि किसी शासक के नौकर से इस संदर्भ में बात नहीं की जा सकती है। रानी दुर्गावती ने भयंकर आक्रमण किया, मुगलों के पैर उखड़ गये। आसफ खान भाग निकला।

सिंगौरगढ़ का द्वितीय युद्ध

प्रथम युद्ध की तरह पुनः मुगलों के वही हाल हुए, लेकिन मुगलों का तोपखाना पहुंच गया और रानी को जानकारी लग गयी उन्होंने गढ़ा में मोर्चा जमाया और सिंगोरगढ़ छोड़ दिया।

सिंगौरगढ़ का तृतीय युद्ध

सेनानायक अर्जुन सिंह बैस ने मुगलों के पैर उखाड़ दिए परंतु मुगलों का तोपखाना भारी पड़ गया। इसलिए सिंगोरगढ़ का किला एक रणनीति के अंतर्गत छोड़ दिया गया।

चंडाल भाटा (अघोरी बब्बा) का युद्ध

यह चौथा युद्ध था जिसका उद्देश्य मुगल सेना को पीछे हटाना था ताकि वीरांगना रानी दुर्गावती गढ़ा से बरेला के जंगलों की ओर निकल जाए। चंडाल भाटा के मैदान में घमासान युद्ध हुआ और सेनानायक अर्जुन सिंह बैस ने आसफ खाँ को बहुत पीछे तक खदेड़ दिया। वीरांगना ने तोपखाने से निपटने के लिए शानदार रणनीति बनायी जिसके अनुसार बरेला (नर्रई) के सकरे और घने जंगलों के मध्य मोर्चा जमाया ताकि तोपों की सीधी मार से बचा जा सके।

गौर नदी का युद्ध

गौर नदी पर आसफ खाँ ने तोपखाना ले जाने के लिए पुल का निर्माण करवाया, जिसे ध्वस्त करने के लिए गये महारथी अर्जुन सिंह बैस वीरगति को प्राप्त हुए। रानी दुर्गावती के जीवन के 15वें बड़े और मुगलों से 5वें युद्ध में 22 जून 1564 को स्वतंत्रता,स्वाभिमान और शौर्य की देवी – विश्व की श्रेष्ठतम वीरांगना रानी दुर्गावती ने,प्रात:सेनानायक अर्जुन सिंह बैस के बलिदान होने का समाचार मिलते ही “अर्द्धचंद्र व्यूह”बनाते हुए “गौर नदी के युद्ध” में आसफ खाँ सहित मुगलों की सेना पर भयंकर आक्रमण किया और पुल तोड़ दिया ताकि तोपखाना नर्रई (बरेला) न पहुँच सके। मुगल सेना तितर-बितर बितर हो गई जिसको जहां रास्ता मिला भाग निकला। रानी दुर्गावती ने पुन:रात्रि में आक्रमण की योजना बनाई परंतु सरदारों की असहमति के कारण निर्णय बदलना पड़ा। यहीं भारी चूक हो गई, यदि रात्रि में आक्रमण होता तो इतिहास कुछ और ही होना था।

नर्रई के घमासान युद्ध और स्व के लिए वीरांगना का प्राणोत्सर्ग

अंततः वीरांगना ने नर्रई की ओर कूच किया और युद्ध के लिए “क्रौंच व्यूह” रचना तैयार की.। 23 जून 1564 को नर्रई में प्रथम मुठभेड़ हुई, रानी और उनके सहयोगियों ने मुगलों की दुर्गति कर डाली। आसफ खाँ सहित मुगल सेना भाग निकली और डरकर बरेला तक निकल गई । 23 जून की रात तक तोपखाना गौर नदी पार कर बरेला पहुंच गया। इसी रात घातक षड्यंत्र हुआ। आसफ खाँ ने रानी के एक छोटे सामंत बदन सिंह को घूस देकर मिला लिया। उसने रानी की रणनीति का खुलासा कर दिया कि कल युद्ध में रानी मुगलों को घने जंगलों की ओर खींचेगी जहाँ तोपखाना कारगर नहीं होगा और सब मारे जाएंगे। आसफ खाँ डर गया उसने समाधान पूछा, तब बदन सिंह ने बताया कि नर्रई नाला सूखा पड़ा है और उसके पास पहाड़ी सरोवर है जिसे यदि तोड़ दिया जाए तो पानी भर जाएगा और रानी नाला पार नहीं कर पाएगी और तोपों की मार सीधा पड़ेगी। उधर रात में रानी को अनहोनी का अंदेशा हुआ, उन्होंने सरदारों से रात में ही हमले का प्रस्ताव रखा पर सरदार नहीं माने ! अंततोगत्वा युद्ध की अंतिम घड़ी समीप आ ही गयी। वीरांगना रानी दुर्गावती ने “क्रौंच व्यूह” रचा। सारस पक्षी के समान सेना जमाई गई। चोंच भाग पर रानी दुर्गावती स्वयं और दाहिने पंख पर युवराज वीरनारायण और बायें पंख पर अधारसिंह खड़े हुए। 24 जून 1564 को प्रातः लगभग 10 बजे भयंकर मोर्चा खुल गया और घमासान युद्ध प्रारंभ हुआ पहले हमले में मुगलों के पांव उखड़ गए।

गोंडों ने तीन बार मुगलों को खदेड़ा

मुगलों ने 3 बार आक्रमण किये और तीनों बार गोंडों ने जमकर खदेड़ा, इसलिए मुगलों ने तोपखाना से मोर्चा खोल दिया। रानी दुर्गावती ने योजना अनुसार घने जंगलों की ओर बढ़ना प्रारंभ किया परंतु बदन सिंह की योजना अनुसार पहाड़ी सरोवर तोड़ दिया गया। नर्रई में बाढ़ जैसी स्थिति बन गयी, अब वीरांगना घिर गयी। इसी बीच अपरान्ह लगभग 3 बजे वीरनारायण के घायल होने की खबर आई परंतु वीरांगना रानी दुर्गावती तनिक भी विचलित नहीं हुई। आंख में तीर लगने के बाद भी युद्ध जारी रखा, मुगल सेना के बुरे हाल थे परंतु अचानक रानी को एक तीर गर्दन पर लगा रानी ने तीर तोड़ दिया। हाथी सरमन के महावत को अधार सिंह पीछे हटने का आदेश दिया परंतु रानी समझ गयी थी कि अब वो नहीं बचेंगी! अत: अधार सिंह को उन्होंने स्वयं को मार देने का आदेश दिया परंतु अधार सिंह ने वीरांगना को मारने से मना कर दिया। वीरांगना रानी दुर्गावती, अधार सिंह से यह कहते हुए कि “मृत्यु तो सभी को आती है अधार सिंह, परंतु इतिहास उन्हें ही याद रखता है जो स्वाभिमान के साथ जिये और मरे”, युद्ध के गोल में समा गयीं और लगभग 150 मुगल सैनिकों का वध करते हुए, भीषण युद्ध किया जब उनको मूर्छा आने लगी तो उन्होंने अपनी कटार से प्राणोत्सर्ग किया।

वीरांगना के पवित्र शरीर को सुरक्षित किया

सेनापति अधार सिंह के नेतृत्व में कल्याण सिंह बघेला, चक्रमाण कलचुरि और महारुख ब्राम्हण ने युद्ध जारी रखा और वीरांगना के पवित्र शरीर को सुरक्षित किया तथा युवराज वीर नारायण सिंह को रणभूमि से सुरक्षित भेज कर अपनी पूर्णाहुति दी। इस युद्ध में वीरांगना के पक्ष से लगभग 700 सैनिकों का बलिदान हुआ जबकि मुगल सेना से लगभग 2000 सैनिक मारे गए। युवराज वीरनारायण सिंह ने रानी दुर्गावती का अंतिम संस्कार कर चौरागढ़ में सेनापति अधार सिंह के साथ मुगलों के विरुद्ध मोर्चा जमाया, जहाँ मुगलों के विरुद्ध चौरागढ़ ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया।

वीरांगना रानी दुर्गावती की समाधि और कर्नल स्लीमन का नत मस्तक होना

जबलपुर के समीप बरेला, ग्राम पंचायत-पिपरिया खुर्द, बारहाग्राम में स्थित नर्रई की युद्ध भूमि में वीरांगना रानी दुर्गावती का समाधि स्थल है। समाधि स्थल पर सफेद पत्थर की कंकरी डालकर आदरांजलि प्रथा थी। कर्नल स्लीमन स्वयं समाधि स्थल के दर्शनार्थ पहुंचे थे तो उन्होंने भी नतमस्तक होते हुए भावुक होकर एक सफेद कंकर अर्पित किया था।उन्होंने रानी दुर्गावती को भारत की महानतम वीरांगना के रूप में स्वीकार किया। स्लीमन ने भी रानी दुर्गावती पर अच्छा इतिहास लिखा है।

वीरांगना की समाधि बनी स्वाधीनता संग्राम का पवित्र तीर्थ

जबलपुर में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न आंदोलनों का शुभारंभ रानी दुर्गावती की समाधि स्थल से ही हुआ। इतिहास के पन्नों को पलटें तो उल्लेख मिलता है कि गांधी जी ने जब नमक कानून तोड़ा तो जबलपुर में भी प्रतिक्रिया आरंभ हो गई। सेठ गोविंददास और पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र सहित अनेक सत्याग्रहियों को साथ लेकर 6अप्रैल 1930 को रानी दुर्गावती की समाधि नर्रई नाला गए और वहां पर प्रण किया कि जब तक पूर्ण स्वराज्य प्राप्त नहीं कर लेंगे, तब तक आंदोलन बंद नहीं करेंगे। सेठ गोविंददास और पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र रात में गौर नदी के किनारे विश्राम करते रहे, परंतु 6 अप्रैल को जब समाधि स्थल पहुंचे तो हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। रामनवमी के दिन सबने शपथ ली कि जब तक देश को विदेशी शासन से मुक्त नहीं करा लेंगे, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे।

स्वतंत्रता संग्राम का अध्याय भी जुड़ा

नर्रई से रानी दुर्गावती की समाधि से पवित्र माटी का कलश लेकर सभी आंदोलन स्थल तिलक भूमि तलैया पहुंचे। यहां 8 अप्रैल 1930 को मुंबई से लाए गए पानी से नमक बनाकर कानून को तोड़ा गया। सुंदरलाल तपस्वी की प्रतिबंधित पुस्तक ‘भारत में अंग्रेजी राज’ के कुछ अध्याय पढ़कर सुनाए गए तो पुलिस हरकत में आई और उसी रात सेठ गोविंददास, पं. द्वारका प्रसाद मिश्र, माखनलाल चतुर्वेदी तथा विष्णुदयाल भार्गव, ब्योहार राजेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया। सदर में सेना को भड़काने के आरोप में पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी को सर्वाधिक लंबी सजा सुनाई गयी। प्रमुख नेताओं के गिरफ्तार हो जाने के कारण जन साधारण के प्रतिनिधियों ने मोर्चा संभाला और प्रतिदिन एक व्यक्ति अधिनायक चुना जाता था जिसके नेतृत्व में सत्याग्रह अनवरत् चलता रहा।

जंगल सत्याग्रह की शुरुआत

जबलपुर नगर समुद्र के निकट न होने के कारण यहां नमक सत्याग्रह आगे नहीं बढ़ पा रहा था। ऐसे में शासन से विरोध प्रगट करने के लिए, नए तरीके अपनाए गए। पं. द्वारका प्रसाद मिश्र जंगल सत्याग्रह के प्रणेता थे। इसके अंतर्गत जंगल सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की गई। युवा सत्याग्रही रानी दुर्गावती समाधि से जंगलों में जाते और सरकारी नियमों का उल्लंघन कर पेड़ों को काटते और गिरफ्तारी देते थे। अतः वीरांगना रानी दुर्गावती का समाधि स्थल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का पवित्र तीर्थ है। जबलपुर के उत्कृष्ट कवि नर्मदा प्रसाद खरे की वीरांगना रानी दुर्गावती के लिए ये पंक्तियाँ कितनी सार्थक हैं –

“आसफ खां से लड़कर तूने, अमर बनाया कोसल देश।
अमर रहेगी रानी तू भी, अमर रहे तेरा संदेश।”

विश्व की श्रेष्ठतम वीरांगना रानी दुर्गावती का व्यक्तिव और कृतित्व सनातन धर्म में नारी शक्ति की मीमांसा का पर्याय है। ऋग्वेद के देवी सूक्त में माँ आदिशक्ति स्वयं कहती हैं,”अहं राष्ट्री संगमनी वसूनां,अहं रूद्राय धनुरा तनोमि ” अर्थात् मैं ही राष्ट्र को बांधने और ऐश्वर्य देने वाली शक्ति हूँ, और मैं ही रुद्र के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाती हूँ।

 

Topics: Rani Durgavatiअकबर और रानी दुर्गावतीrani Durgavati fortRani Durgavati lifeRani Durgavati historyRani Durgavati of Gondwanaरानी दुर्गावती की युद्ध नीतिक्रौंच व्यूहअर्द्धचंद्र व्यूहवीरांगना रानी दुर्गावतीगोंडवाना की रक्षा की गौरवगाथापाञ्चजन्य विशेषगोंडवाना साम्राज्यएनसीईआरटी विवादअकबर विवाद
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

आज का श्लोक : विरोधिनोऽपि श्रोतव्यम् आत्मनीनतया मतम्।

बहुआयामी वीर सावरकर

बहुआयामी वीर सावरकर की लिपि-दृष्टि

विभाजन की विभीषिका : पूर्वोत्तर पर बंटवारे की चोट

सारनाथ में उत्खनन में मिले अवशेष

#सारनाथ : पहचान की नई उड़ान

जोगिंदर सिंह ओबरॉय
मूल निवासी: रावलपिंडी, पाकिस्तान

विभाजन की विभीषिका : पिता को अंतिम विदाई भी न दे सके

कमल आनंद

विभाजन की विभीषिका : घर छूटा पढ़ाई भी

Load More

ताज़ा समाचार

Gold Silver Price Today

Gold Rate Today: सोने में फिर आया जबरदस्त उछाल, 19 हजार रुपये महंगा हुआ भाव

इंदिरा गांधी स्टेडियम में होगा गायत्री परिवार का विराट समारोह, 31 अक्टूबर से शुरू होगा 3 दिवसीय आयोजन

लातूर के उर्दू स्कूल में पहुंचे अभिजीत दिपके, छात्रों से पूछे कई सवाल; शिक्षिका की शिकायत के बाद दर्ज हुआ केस

Aadhaar card update

बच्चे का Aadhaar बना है तो अभी कर लें ये काम, 30 सितंबर के बाद लग सकता है चार्ज

प्रतीकात्मक चित्र

बांग्लादेश में हिंदू परिवार के चार सदस्यों के शव मिले, हत्या का आरोप

स्वाइन फ्लू

छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू का पहला मामला, 2 साल की बच्ची में H1N1 वायरस की पुष्टि

भारत ने बना डाली पहली 100% स्वदेशी AK-203, ‘शेर’ ने पास किया फायरिंग टेस्ट

कीर्ति आजाद

तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद के खिलाफ रंगदारी मांगने का मामला, सीआइडी जांच शुरू

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

तिरंगे की शान और 140 करोड़ देशवासियों के सपना ही अंतरिक्ष में भारत का संकल्पः प्रधानमंत्री मोदी

इस्कॉन की रथ यात्रा में पहुंचे अर्नोल्ड श्वार्जनेगर, रथ के सामने सेल्फी लेते दिखे; तस्वीरें वायरल

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies