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निर्गुट से जी-20 तक भारत के बढ़ते कदम

निर्गुट सम्मेलन के चालीस साल के बाद जी-20 समिट 9-10 सितंबर, 2023 को राजधानी में आयोजित होने जा रहा है

Written byविवेक शुक्लाविवेक शुक्ला
Nov 17, 2022, 07:11 pm IST
in भारत
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को जी 20 की अध्यक्षता सौंपते इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को जी 20 की अध्यक्षता सौंपते इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो

साल 1983, तब दिल्ली में गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था। उसमें दर्जनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष भाग लेने आए थे। उनमें क्यूबा के राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो, पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह जिया उल हक, फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन (पीएलओ) नेता यासर अराफात प्रमुख थे। निर्गुट सम्मेलन के चालीस साल के बाद जी-20 समिट 9-10 सितंबर, 2023 को राजधानी में आयोजित होने जा रहा है। इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और कई अन्य विश्व नेता राजधानी में होंगे।

चूंकि भारत अगले एक साल तक ब्रिक्स का अध्यक्ष रहने वाला है, इसलिए उससे यह उम्मीद रहेगी कि वह जी-20 देशों के आपसी विवादों के हल खोजने की दिशा में ठोस पहल करेगा। आप देख रहे हैं कि जी-20 के दो देश क्रमश: रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। रूस सारी दुनिया की अपीलों को खारिज करता हूं युद्ध को जारी रखे है। इसी तरह से चीन का भारत को लेकर आक्रामक रवैया बना हुआ है। उसकी सेनाएं भारतीय सीमाओं को बीच-बीच में लांघने की चेष्टा करती रहती हैं। ये तो सिर्फ दो उदाहरण थे यह साबित करने के लिए जी-20 देशों में आपस में कितने विवाद हैं। भारत को जी- 20 के सभी देशों के बीच सर्वानुमति बनानी होगी कि इनमें आपसी तालमेल बढ़े और विवादों के हल सौहार्दपूर्ण तरीके से हों। तुर्की भी जी-20 का सदस्य है। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन लगातार कश्मीर मसले पर पाकिस्तान का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने विगत सितंबर के महीने में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए फिर से कश्मीर मुद्दा उठाया था। पाकिस्तान के करीबी एर्दोगन ने महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान 75 साल पहले अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता स्थापित करने के बाद भी अब तक एक-दूसरे के बीच शांति और एकजुटता कायम नहीं कर पाए हैं। एर्दोगन और उनके देश के कई दूसरे राजनेता भी कई बार कश्मीर मुद्दे का जिक्र कर चुके हैं। भारत ने हर बार तुर्की को करारा जवाब देते हुए कश्मीर को द्विपक्षीय मामला बताया है।

जी- 20 का अध्यक्ष रहते हुए भारत को तुर्की को कायदे से समझाना होगा कि उसे अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए और इसे अपनी नीतियों में अधिक गहराई से प्रतिबिंबित करना चाहिए। इसी तरह से जी-20 देशों को चीन को समझाना होगा कि वह जी-20 के सदस्य देश भारत के साथ अपन तमाम मसले बातचीत से सुलझाए।

इस बीच, जी-20 के नेताओं की कारों के काफिले राजधानी में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शांति पथ, तीन मूर्ति, साउथ एवेन्यू, विजय चौक, सरदार पटेल मार्ग, पंचशील मार्ग, सफदरजंग रोड, प्रगति मैदान, सेंट्रल विस्टा के आसपास आएंगे-जाएंगे। ये जिन सड़कों से गुजरेंगे, उन सड़कों को नये सिरे से सुंदर बनाने का काम शुरू हो चुका है। वे खुशबूदार गुलों से महकेंगे। अगर बात सड़कों से हटकर करें तो जी-20 समिट के मद्देनजर राजधानी की करीब पौने चार सौ जगहों को नये सिरे से सजाया-संवारा जाना है। इनमें कुछ खास पार्क, फ्लाईओवर के नीचे के हिस्से तथा चौराहे शामिल हैं।

दरअसल भारत को जी-20 समिट की अध्यक्षता तो 16 नवंबर को सांकेतिक रूप से इंडोनेशिया की राजधानी बाली में सौंप दी गई है। पर भारत विधिवत रूप से जी-20 का अध्यक्ष आगामी 1 दिसंबर से बनेगा। जब तक भारत के पास जी-20 की अध्यक्षता रहेगी तब दिल्ली में इन देशों की टोलियां आती रहेंगी। राजधानी में समिट की तैयारियों से जुड़ी 190 बैठकें होनी हैं।

निर्गुट सम्मेलन के समय राष्ट्राध्यक्ष अशोक होटल या फिर राष्ट्रपति भवन में ठहरे थे। सम्मेलन विज्ञान भवन में आयोजित किया गया था। अशोक होटल तथा विज्ञान भवन 1956 में बन कर तैयार हुए थे। पर जी- 20 के दौरान ना तो अशोक होटल में कोई राष्ट्राध्यक्ष रात गुजारेगा और ना ही विज्ञान भवन में कोई खास बैठक होगी। जी-20 समिट प्रगति मैदान में तैयार विश्व स्तरीय सभागार में आयोजित होगी। अब सवाल है कि बाइडेन, पुतिन, शी जिनपिंग, सुनक और अन्य राष्ट्राध्यक्ष कहां ठहरेंगे? अमेरिका के दो पूर्व राष्ट्रपति क्रमश: बराक ओबामा तथा बिल क्लिंटन मौर्या शेरटन में रुक चुके हैं। तो क्या बाइडेन भी वहां पर ठहरेंगे? पुतिन भी अपनी दिल्ली की यात्राओं के समय मौर्या शेरटन में ही ठहरे हैं। वे फिर से मौर्या शेरटन में रुक सकते हैं। चीनी नेता ने अपनी साल 2019 की भारत यात्रा के समय तिब्बतियों के विरोध प्रदर्शन देखे थे। अब देखना होगा कि क्या चीन के राष्ट्रपति जब दिल्ली में होंगे तो तिब्बती उनके काफिले के आगे आकर विरोध प्रदर्शन करने में सफल होते हैं या नहीं। बेशक, वे कोशिश तो करेंगे। जब ऋषि सुनक दिल्ली में होंगे तो सबकी निगाहें उन पर होंगी ही। उन्हें भारत स्वाभाविक कारणों से अपना मानता है। वे कहां रहेंगे? इस बीच, ये लगभग तय है कि नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) लुटियंस दिल्ली के किसी खास पार्क का नाम जी-20 पार्क ही रख दें। आपने तुगलक क्रिसेंट में भारत-आसियान मैत्री पार्क देखा होगा। इसका उद्घाटन तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सन 2018 में किया था। तब राजधानी में भारत- आसियान शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था। इसी तरह से दिल्ली में न्याय मार्ग से कुछ कदमों पर घाना के स्वतंत्रता आंदोलन के शिखर नेता क्वामे नकरूमा मार्ग से बहुत दूर नहीं है इंडो- अफ्रीका फ्रेंडशिप रोज़ गॉर्डन। ये भारत-अफ्रीकी देशों के शिखर सम्मेलन से पहले 2015 में स्थापित किया गया था। ये भारत के आसियान तथा अफ्रीकी देशों से मैत्री के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। तो अगर जी-20 मैत्री पार्क भी बन जाए तो हैरान मत होइये। बहरहाल, निश्चित रूप से यह उम्मीद करनी चाहिए कि भारत जी 20 मंच को एक सशक्त नेतृत्व प्रदान करेगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यूएई एम्बेसी, नई दिल्ली में प्रधान सूचना सलाहकार भी रह चुके हैं।)

Topics: गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलनफिदेल कास्त्रोIndiaजिया उल हकयासर अराफातNon-AlignedNon-Aligned SummitभारतFidel Castroजी-20Zia-ul-HaqG-20Yasser ArafatNAMनिर्गुट
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