Archive, Author at पाञ्चजन्य - 1064 का पृष्ठ 488
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जम्मू कश्मीर राज्य के संवैधानिक प्रावधानों  में राज्य के स्थाई निवासी संबंधी परिभाषा का समावेश किया गया और इसके लिए महाराजा हरी सिंह के शासन द्वारा राज्यों  के विषयों को लेकर वर्ष 1927 और 1932 में जारी की गई सूचनाओं के कुछ प्रावधानों को आधार बनाया गया। लेकिन दुर्भाग्य से जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संघीय संविधान के अनुच्छेद 370 को लेकर इस प्रकार का शोर मचाना शरू कर दिया कि मानो इस अनुच्छेद के माध्यम से राज्य को कोई विशेष दर्जा दे दिया गया हो। मामला यहां तक बढ़ा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस अनुच्छेद की ढाल में एक प्रकार से तानाशाही स्थापित करने का प्रयास किया और इसकी सबसे पहली शिकार राज्य की महिलाएं हुईं। राज्य के स्थाई निवासियों में केवल महिला के आधार पर भेदभाव करने वाली कोई व्यवस्था न तो राज्य के संविधान में है और न ही भारत के संविधान में और न ही महाराजा हरि सिंह के शासन काल में राज्यों के विषयों को लेकर जारी किए गए प्रावधानों में। लेकिन दुर्भाग्य से नेशनल  कॉन्फ्रेंस की सोच महिलाआंे को लेकर उसी मध्यकालीन अंधकार  युग में घूम रही थी, जिसमें महिलाओं को हीन समझा जाता था और उनका अस्तित्व पति के अस्तित्व में समाहित किया जाता था।

जम्मू कश्मीर राज्य के संवैधानिक प्रावधानों  में राज्य के स्थाई निवासी संबंधी परिभाषा का समावेश किया गया और इसके लिए महाराजा हरी सिंह के शासन द्वारा राज्यों  के विषयों को लेकर वर्ष 1927 और 1932 में जारी की गई सूचनाओं के कुछ प्रावधानों को आधार बनाया गया। लेकिन दुर्भाग्य से जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संघीय संविधान के अनुच्छेद 370 को लेकर इस प्रकार का शोर मचाना शरू कर दिया कि मानो इस अनुच्छेद के माध्यम से राज्य को कोई विशेष दर्जा दे दिया गया हो। मामला यहां तक बढ़ा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस अनुच्छेद की ढाल में एक प्रकार से तानाशाही स्थापित करने का प्रयास किया और इसकी सबसे पहली शिकार राज्य की महिलाएं हुईं। राज्य के स्थाई निवासियों में केवल महिला के आधार पर भेदभाव करने वाली कोई व्यवस्था न तो राज्य के संविधान में है और न ही भारत के संविधान में और न ही महाराजा हरि सिंह के शासन काल में राज्यों के विषयों को लेकर जारी किए गए प्रावधानों में। लेकिन दुर्भाग्य से नेशनल  कॉन्फ्रेंस की सोच महिलाआंे को लेकर उसी मध्यकालीन अंधकार  युग में घूम रही थी, जिसमें महिलाओं को हीन समझा जाता था और उनका अस्तित्व पति के अस्तित्व में समाहित किया जाता था।