अमेरिकी विदेश विभाग ने कुछ राजनयिकों और अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दे दिया है। ये फैसला यमन के ईरान समर्थित हूती आतंकियों के लगभग रोजाना हो रहे हमलों के बीच लिया गया है। बुधवार शाम को एक हवाई अड्डे और तेल क्षेत्र पर हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई।
क्यों लिया गया ये फैसला
विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि यमन के ईरान समर्थित हूतियों ने सऊदी अरब के नागरिक हवाई अड्डों और दूसरी जरूरी जगहों पर हमले बढ़ा दिए हैं। इन हमलों में आम लोगों की मौतें हुई हैं और यात्रा में काफी दिक्कतें आ रही हैं। पिगॉट ने कहा कि विभाग के कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
ये आदेश रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास और उससे जुड़े वाणिज्य दूतावासों पर लागू होता है। अमेरिकी-ईरान युद्ध की शुरुआत में दूतावास को काफी नुकसान पहुंचा था। महीनों तक वहां सिर्फ जरूरी स्टाफ ही काम कर रहा था। हाल के हफ्तों में कुछ राजनयिक वापस लौटे थे।
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एनबीसी और एएफपी जैसी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, कतर और बहरीन से भी अमेरिकी दूतावास कर्मचारियों के परिवारों को वापस बुलाया जा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर युद्ध फिर शुरू करने की योजना बना रहा है। लेकिन पिगॉट ने इन रिपोर्ट्स को गलत बताया और साफ कहा कि आदेश सिर्फ सऊदी अरब के लिए है।
हाल के हमले
पिछले कुछ हफ्तों में सऊदी अरब पर हूथियों के घातक हमले बढ़े हैं। इनमें रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला भी शामिल है, जो सालों में सबसे घातक था। बुधवार शाम सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने बताया कि दमाम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले में एक सऊदी निवासी की मौत हो गई। आठ लोग घायल हुए और हवाई अड्डे को कुछ नुकसान भी पहुंचा। फ्लाइटराडार24 के अनुसार वहां से उड़ानें दूसरी जगह मोड़ी गईं।
इसके अलावा देश के दक्षिण-पूर्व में एक तेल सुविधा पर ड्रोन हमले को रोकने के दौरान गिरा मलबा दो लोगों की मौत का कारण बना। दो और लोग घायल हुए। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने ये जानकारी दी। इन दोनों हमलों का हूथियों ने तुरंत दावा नहीं किया, लेकिन हवाई अड्डे और तेल सुविधाएं उनके हाल के मिसाइल और प्रोजेक्टाइल हमलों के मुख्य लक्ष्य रहे हैं।
पहले भी बुलाया था स्टाफ
फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका ने खाड़ी से गैर-जरूरी स्टाफ को वापस बुला लिया था। एनबीसी ने रिपोर्ट किया कि अमेरिकी सेना मध्य पूर्व के ठिकानों से चुपचाप अपनी मौजूदगी कम कर रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता ने कहा कि सैनिकों को नियमित रूप से मिशन की तैयारी के लिए स्थानांतरित किया जाता है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार अमेरिका और इजरायल ने एक छोटी लेकिन तेज कार्रवाई की योजना बनाई है। रक्षा सचिव पीटर हेगसेथ इस हफ्ते इजरायल गए थे और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मिले। पिछले हफ्ते ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ईरान के पिकएक्स माउंटेन को निशाना बनाने पर विचार कर रहा है, जो परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा स्थल है। लेकिन राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि 3 नवंबर के चुनावों से पहले युद्ध फिर शुरू करने का उनका इरादा नहीं है।











