गत दिनों राजस्थान के भीलवाड़ा में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक संपन्न हुई। बैठक में प्रस्ताव पारित कर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की गई। कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सत्येंद्र सिंह ने बताया कि 17 नवंबर, 1913 को वागड़ क्षेत्र के संत गोविंद गुरु जी के नेतृत्व में चल रहे भगत आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेजी शासन ने मानगढ़ धाम में भीषण गोलीकांड किया था, जिसमें 1,500 से अधिक जनजातीय महिला, पुरुष और बच्चे मारे गए थे। यह घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से छह वर्ष पूर्व हुई थी और स्वाधीनता संग्राम में जनजातीय समाज के अद्वितीय बलिदान का महत्वपूर्ण अध्याय है।
गोविंद गुरु के नेतृत्व में भगत आंदोलन ने अंग्रेजी शासन के दमनकारी कानूनों के विरुद्ध जनजागरण के साथ जनजातीय समाज की संस्कृति, आस्था और जीवन-मूल्यों को भी जागृत किया था। मानगढ़ की घटना ने राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्रों में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष की चेतना को और व्यापक किया। प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर, 2022 को मानगढ़ धाम पहुंचकर बलिदानी जनजातीय समाज को श्रद्धांजलि दी थी।
राष्ट्रपति ने भी 4 अक्तूबर, 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचकर बलिदानियों को नमन किया था। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा भी मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में मान्यता देने की बात कही जा चुकी है। इसलिए कल्याण आश्रम ने केंद्र सरकार से मांग की कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के साथ उसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण और विकास सुनिश्चित किया जाए।

















