परिवार, संस्कार और शिक्षा पर सवाल: रिश्तों में बढ़ती हिंसा और संवेदनहीनता को लेकर उठे गंभीर प्रश्न
October 22, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम मत अभिमत

परिवार, संस्कार और शिक्षा पर सवाल: रिश्तों में बढ़ती हिंसा और संवेदनहीनता को लेकर उठे गंभीर प्रश्न

Crime and Values: संगरूर से इंदौर तक रिश्तों में बढ़ती क्रूरता और संवेदनहीनता पर वरिष्ठ नेत्री लक्ष्मीकांता चावला का विशेष सामाजिक विश्लेषण।

Written byलक्ष्मीकांता चावलालक्ष्मीकांता चावला — edited by Shivam Dixit
Oct 1, 2026, 09:00 pm IST
inमत अभिमत
Rising Crime in Relationships Lack of Values Laxmikanta Chawla Article Panchjanya

पुरानी कहावत यह थी कि सात घर तो डायन भी छोड़ देती है। डायन किसी ने देखी है या नहीं देखी, लेकिन जो किसी के बच्चों को खा जाए अर्थात उनको मार दे अपने स्वार्थ के लिए उसके लिए ही डायन कहते थे। अब तो क्या कहें संवेदनाएं मर गईं, भावनाएं मर गईं, स्वार्थ और कामुकता में अंधा व्यक्ति स्त्री या पुरुष दोनों ही शरीर सुख के लिए या धन के लिए किसी की भी हत्या कर सकते हैं, किसी को भी लूट सकते हैं। जिन माता पिता ने जन्म दिया उनको भी मार सकते हैं केवल धन के लिए, प्रेम विवाह के लिए, मनचाहा युवक या युवती पाने के लिए। आज जो समाज में हो रहा है उसके लिए किसे दोषी कहा जाए। माता—पिता द्वारा बच्चों के पालन पोषण में संस्कार देने में कोई कमी है या शिक्षा में कोई कमी है अथवा सोशल मीडिया का प्रभाव है या टीवी के विभिन्न चैनलों पर दिखाए जाने वाले अर्धनग्न चित्रों, लूटखसूट और हत्याओं को देख देख कर नई पीढ़ी के बच्चे भी उसी रास्ते पर चल पड़ते हैं।

मां की गोद से लेकर संगरूर की घटना तक उठे सवाल

संसार में सबसे ज्यादा सुरक्षित मां की गोद ही बच्चों के लिए होती है। इसी वर्ष संगरूर में रक्षाबंधन के दिन एक मां बच्चों को मिठाई में जहर मिलाकर खिला देती है। नाटक यह करती है कि मिठाई ही विषैली मार्केट से आई। पुलिस जांच ने जो सत्य उजागर किया वह एक औरत की स्वार्थपरता कामुकता और क्रूरता की चरम सीमा दिखा गया। अपने पति के अतिरिक्त किसी और पुरुष से उसके संबंध थे, बच्चे उसे इस रास्ते में रुकावट लगे और तीनों को ही जहर देकर मार दिया। अब कौन मानेगा कि डायन सात घर छोड़ देती है। यहां तो मां ने ही नहीं छोड़े।

इसके साथ इसी सप्ताह चंडीगढ़ से जो समाचार मिला एक 18 वर्षीय युवक जिसे माता पिता ने बड़ी आशा के साथ पाल पोस कर बड़ा किया, न जाने कितनी आशाएं उससे वर्तमान और भविष्य के लिए लगाई होंगी, पर वह भी अपने पुलिस हेडकांस्टेबल पिता को गोलियों से भून देता है। केवल इसलिए क्योंकि वह अपनी मनपसंद लड़की से शादी कर सके और पिता की करोड़ों की संपत्ति अपने नाम करके ऐश आराम से भरी जिंदगी जी सके।

ये दोनों ही घटनाएं खून के रिश्तों के कत्ल की घटनाएं हैं और अब इसके बाद मेरठ की एक लड़की शादी के बाद बेटी की मां बनने के बाद अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को मारने के बाद उसे पंद्रह टुकड़ों में काट कर नीले ड्रम में बंद करके कहीं फेंक देती है। सोचा होगा कि कानून के हाथों से बच जाएंगे। इस नीले ड्रम की घटना ने याद करवा दिया इंदौर के भयानक कांड को, जहां नवविवाहिता हनीमून मनाने के लिए मेघालय में जाती है और वहां अत्यंत ही वीभत्स ढंग से पति को मार देती है। केवल प्रेमी से रिश्ता बनाने के लिए।

ऐसी अनेक घटनाएं अपने देश में यदा कदा देखने को मिलती हैं। कहीं मां बच्चों को मारती है, कहीं पति पत्नी को मार देता है, कहीं दो परिवारों के झगड़े में हत्या कर दी जाती है और कहीं केवल जमीन पर पानी लगाने के लिए सगे भाइयों के दो परिवार इतनी कटुता से लड़ते हैं जिसमें दोनों परिवारों के कुछ लोग मार जाते हैं।

इतनी संवेदनहीनता क्यों, परिवार और शिक्षा पर सवाल

अब प्रश्न यह है कि इतनी संवेदनहीनता क्यों? काम वासनाओं में अंधे होकर अपने पति या पत्नी या अन्य रिश्तेदारों को मार देना किस कारण हो रहा है? मुझे ऐसा लगता है कि इसके लिए परिवार और शिक्षा उत्तरदायी है। कवि रहीम ने लिखा—

जो रहीम उत्तम प्रकृति
का करि सकत कुसंत
चंदन विष व्याप्त नहीं
लिपटे रहत भुजंग।।

सीधी बात रहीम जी ने कहा कि जिस प्रकार चंदन के वृक्षों पर सांप लिपटे रहें तो भी चंदन की शीतलता समाप्त नहीं होती वैसे ही जिन्हें घर से अच्छे संस्कार मिलते हैं वह बाहरी जीवन की भौतिकता अति भौतिकता से प्रभावित नहीं होते चरित्रवान बने रहते हैं।

शिक्षाविदों, कानूनविदों और सरकारों से सवाल

मेरा अपने देश के शिक्षाविदों से, कानूनविदों और सरकारों से यह प्रश्न है कि क्या उन्होंने कभी चिंता की कि देश के बच्चे किस ओर जा रहे हैं। हमारे आज के विद्यार्थी जो कल को देश की बागडोर संभालने वाले हैं, डाक्टर, वकील, इंजीनियर, व्यापारी, राजनेता और प्रशासक बनने वाले हैं अगर वही आंदोलनों में अति अभद्रता, अनुशासनहीनता और कहीं कहीं राष्ट्र विरोधी नारों का प्रयोग करेंगे तो देश का क्या बनेगा?

जंतर मंतर दिल्ली में जैसा प्रदर्शन हुआ उसके लिए यद्यपि कई तथाकथित सहानुभूति रखने वाले यह कहने लगे कि बच्चों के भविष्य की चिंता करो, उन्हें कोई दंड न दो। वैसे ही जैसे अब लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में आगजनी हुई, पत्थरबाजी की गई, वीडियो में स्पष्ट देखा गया कि कुछ विद्यार्थी यूनिवर्सिटी के भीतर दुकानों से कीमती सामान लूट लूट कर ले जा रहे हैं।

यह नहीं कह सकते कि बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं, अब भी बहुत कम जननेता ऐसे हैं जो यह कहने की हिम्मत करें कि जिन्होंने अपराध किया उनको दंड मिलना ही चाहिए। विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी अबोध बच्चे नहीं होते। हर काम का परिणाम वह जानते हैं। इसके बाद भी लूटखसूट और यूनिवर्सिटी को तोड़ना, आग लगाना, सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ कर देना यह करें तो क्या उनको इसके लिए पुरस्कार दिया जाए?

सच बोलने को वोटों के सौदागर नेता कभी तैयार नहीं होते। प्रश्न फिर वही है कि देश में कितने अपराध परिवारों में विवाद और विवाद के हत्या में बदलने के हो जाते हैं। पड़ोसी लड़ते हैं, रिश्तेदार लड़ते हैं, बेटी अगर मां बाप की इच्छा के बिना शादी करवा ले तो बेटी और दामाद को भी मार सकते हैं। ऐसा क्यों हो गया?

दौलत और मनपसंद रिश्तों के लिए माता-पिता की हत्या पर चिंता

अब तो कई घटनाएं ऐसी भी सुनने को मिलीं कि बेटियां ही मां बाप को मारने की योजना बना लेती हैं। मार भी देती हैं। कारण दौलत या किसी मनपसंद पुरुष का साथ पाने की चाह।

धर्मगुरुओं और समाज से भी आत्ममंथन की अपेक्षा

आज एक बार फिर वही कहूंगी कि हमारे धर्मगुरु भी केवल मोक्ष का रास्ता न बताएं, अपितु अपने भारत देश को इस योग्य बनाने का रास्ता बताएं जैसा राम राज्य था। भगवान श्रीराम के राज्य में कोई अपराध नहीं था, क्योंकि नर नारी सभी शिक्षित थे। निश्चित ही उनकी शिक्षा वैसी नहीं होगी जैसी आज की हो गई है। मैं तो इसे पूरा दोष शिक्षा और पारिवारिक संस्कारों को ही देती हूं, जो बच्चों को देश धर्म के लिए जीना नहीं सिखा पा रहे।

जो उन्हें केवल आफिसर बनाना चाहते हैं, आफिसर किसलिए बनना है यह नहीं सिखा पा रहे। अपने देश में रहना है या नहीं कोई चिंता नहीं, डालर पौंड कहां से कमाए जा सकते हैं यही रास्ता बताया जाता है।

शिक्षा, भ्रष्टाचार और देश छोड़ने की प्रवृत्ति पर सवाल

मैं तो अपने देश के समाजशास्त्रियों से यह भी कहूंगी कि एक बार विश्लेषण करें, रिसर्च करें और देखें कि आखिर क्या कारण है कि देश के बच्चे 18 वर्ष की आयु पार करते ही वीजा की खोज करने लगते हैं और भारत छोड़कर जाना चाहते हैं। केवल छोड़ना ही नहीं चाहते, यह भी कहते हैं कि देश का सिस्टम भ्रष्ट है, यहां रखा ही क्या है। कभी कभी लगता है कि वह सच कहते हैं, यद्यपि यह दुखद सत्य है।

हमारे देश में बहुत से संस्थानों में प्रवेश लेने के लिए ही लाखों रुपये रिश्वत देनी पड़ती है चाहे उसे नाम केपिटेशन फीस या डोनेशन का दिया जाए। पहली श्रेणी ही नहीं उससे भी पहले की शिक्षा के लिए मोटी रकम देकर ही तथाकथित बढ़िया स्कूलों में दाखिला मिलता है।

जब हर काम नोटों से ही होगा, वोट भी नोटों से ही लिए जाते हैं, राज्यसभा में अधिकतर करोड़पति, अरबपति भेजे जाते हैं तो संस्कार कौन देगा।

व्यवस्था और समाज की संवेदना पर अंतिम सवाल

हर वर्ष छठ पूजा में बिहार के लोग घर जाने के लिए कई तरह की यातना सहते हैं, पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता। यह सब दुखद प्रसंग क्या सरकारों को कानूनविदों को धर्म गुरुओं को, समाजशास्त्रियों को सोचने के लिए विवश नहीं करते क्या उनकी भी संवेदना शून्य हो गई?

Topics: Panchjanya newsIndian education systemFamily ValuesOpinion News
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Nagpur Devlapar Cow Science Research Centre Mohan Bhagwat

“गौमाता से जुड़ें ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संस्कार”: देवलापार में सरसंघचालक जी ने 5 नए प्रकल्पों का किया लोकार्पण

World Hindu Congress 2026 Mumbai RSS Dr Mohan Bhagwat Panchjanya

वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस 2026: मुंबई में जुटेगा विश्वभर का हिंदू नेतृत्व, डॉ. मोहन भागवत जी करेंगे उद्घाटन सत्र को संबोधित

Bajrang Dal 42 Years Journey History Ayodhya

42 वर्ष का हुआ बजरंग दल: जानिए कब और क्यों हुई इसकी स्थापना, सेवा कार्यों से लेकर धर्म रक्षा तक का पूरा इतिहास

शरजील इमाम

सोरोस के गुरु की कसौटी पर शरजील इमाम फेल: तिहाड़ से लिखे पत्र, ‘खुले समाज’ व संवैधानिक इतिहास का पूरा सच

Mama Manikchandra Vajpayee 107th Birth Anniversary VSK Madhya Pradesh Special Lecture Panchjanya

Manikchandra Vajpayee Birth Anniversary : भोपाल में मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी जयंती पर व्याख्यान, विशेषांक विमोचित

RSS Chief Mohan Bhagwat Kanpur Visit VVIP Security

पश्चिम बंगाल में तीन दिवसीय प्रवास पर बर्दवान पहुंचे सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

Load More

ताज़ा समाचार

Karakoram Exercise 2026

काराकोरम अभ्यास 2026 से भारत को क्या सबक? चीन-पाकिस्तान जमीनी सहयोग का मतलब

सुवर्णा राज

Asian Para Games 2026: सुवर्णा राज ने डिस्कस थ्रो में जीता गोल्ड, बढ़ाया देश का मान

मणिपुर में भाजपा की महिला कार्यकर्ता अंगोमचा बिमोल अकोइजम के विरुद्ध प्रदर्शन करती हुईं। बिमोल अकोइजम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद हैं।

गिराई ‘गुरु’ की गरिमा

आशुतोष और सौरव दास को क्राइम ब्रांच ने दिया नोटिस

तिहाड़ से रिहा होते ही सौरभ दास और आशुतोष रांका को नोटिस! CJP के तीन नेताओं को क्राइम ब्रांच ने क्यों बुलाया?

संयुक्त राष्ट्र के दोहरे रवैये पर भड़का भारत, दाऊद इब्राहिम को ‘भारत-आधारित’ बताने पर लगाई फटकार

Illegal Mazars Demolished in Uttarakhand

रामनगर में धामी सरकार का एक्शन: दो अवैध मजारों पर चला बुलडोजर, 602 मजारें अब तक ध्वस्त

प्रतीकात्मक तस्वीर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कुवैत के ऑयल टैंकर पर हमला, 21 भारतीय नाविक सुरक्षित – मंत्री सर्बानंद सोनोवाल

Russia Ukraine War India mediation

भारत का त्रिस्तरीय युद्धविराम प्रस्ताव: रूस-यूक्रेन संघर्ष में नई दिल्ली की व्यापक पहल

फ्रांस हिंसा और भारत के विरोध प्रदर्शन में कनेक्शन आया सामने? रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम का खुलासा

निवेश की पहली पसंद बना भारत

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies