गत दिनों दिल्ली में जब कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी नेता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे, ठीक उन्हीं दिनों कांग्रेस के सांसद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में समाजशास्त्र के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। उन पर लगे आरोप कांग्रेस की चाल और चरित्र को एक बार फिर उजागर करने के लिए पर्याप्त हैं। आरोप है कि उन्होंने छात्राओं के साथ अश्लील इशारे किए, अश्लील टिप्पणियां कीं, व्यक्तिगत और अश्लील प्रश्न पूछे।
जानकारी के अनुसार, 31 मई, 2026 को नाै छात्राओं और दो छात्रों ने ‘विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति’ के सामने उनके विरुद्ध यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार की शिकायतें कीं। शिकायतों में कथित अनुचित टिप्पणियों, अवांछित व्यवहार और शैक्षणिक अधिकार के दुरुपयोग जैसे आरोप शामिल बताए गए। इसके बावजूद सितंबर तक उन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। धीरे-धीरे यह बात मीडिया तक पहुंची। इसका दिल्ली महिला आयोग ने संज्ञान लिया और जेएनयू से रिपोर्ट मांगी गई। इसके बाद ‘विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति’ सक्रिय हुई और जांच शुरू की। समिति ने सभी आरोपों को सही पाया। इसके बाद कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने 9 अक्तूबर, 2026 को एक आदेश के जरिए उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसके बाद 11 अक्तूबर को दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की। अब पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
हालांकि, अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि आंतरिक जांच समिति ने निष्पक्ष जांच नहीं की। लेकिन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा केंद्र में प्रोफेसर पूनम कुमारी ने आंतरिक जांच समिति को निष्पक्ष बताया है। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति इस तरह के मामलों को बहुत ही सतर्कता और सावधानी से देखती है। निष्पक्ष जांच होती है। शिकायतकर्ता और जिसके विरुद्ध शिकायत होती है, उन दोनों को सुना जाता है। दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाता है। इसके बाद ही समिति अपनी रिपोर्ट देती है। समिति ने प्रो. अकोइजम को दोषी पाया है। इसका मतलब है कि उन्होंने अवश्य ही छात्राओं के साथ गलत कार्य किया है। इसके बाद ही उन्हें उनके पद से हटाया गया। अब वे जेएनयू में नहीं पढ़ा सकेंगे।” उन्होंने यह भी कहा, “कांग्रेस को भी इस मामले में उचित कार्रवाई करनी चाहिए। कांग्रेस को उनका बचाव नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह बहुत ही गंभीर मामला है।”
मणिपुर से सांसद
अंगोमचा बिमोल अकोइजम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद हैं। राजनीति में आने से पहले उनकी पहचान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के रूप में रही है। उनके विरुद्ध छात्राओं की शिकायतों का मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि शिक्षक और विद्यार्थी के संबंध में अकादमिक अधिकार के साथ विश्वास और जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। कांग्रेस महिला अधिकारों और सामाजिक न्याय की राजनीति करती है। उसके नेता महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और समानता की बात करते हैं। ऐसे में पार्टी के एक पुरुष सांसद के विरुद्ध अनेक शिकायतें सामने आने पर कांग्रेस नेतृत्व को उनके विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
भाजपा का कांग्रेस पर हमला
प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। छात्राओं की ओर से यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा महिला मोर्चा ने 12 अक्तूबर को दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रूप कुमारी चौधरी ने किया। प्रदर्शन में भाजपा की महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाली पार्टी अपने ही सांसद के मामले में कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व पर अकोइजम को बचाने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि उन्हें तत्काल पार्टी से निष्कासित किया जाए और मामले की जांच पूरी होने तक उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए। इसके बाद भाजपा की महिला सांसदों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। भाजपा नेताओं ने अकोइजम को लोकसभा की सदस्यता से निलंबित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों में राजनीतिक दलों को किसी तरह का पक्षपात नहीं करना चाहिए। इसके बाद भाजपा महिला मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर से भी मिला। प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से शिकायतों पर गंभीरता से विचार करने और उचित कार्रवाई करने की मांग की।
पुतला दहन और प्रदर्शन
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की जेएनयू इकाई ने 14 अक्तूबर को प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को गिरफ्तार करने की मांग के साथ प्रदर्शन और उनका पुतला दहन किया। अभाविप ने मांग की कि विश्वविद्यालय द्वारा प्रोफेसर पद से बर्खास्त किए जा चुके अकोइजम के मामले में पुलिस त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करे तथा कानून के अनुरूप उनकी तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। जेएनयू अभाविप इकाई के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा, “महिला सुरक्षा केवल नारों और भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ आंदोलन के जरिए महिला अधिकारों की बात करने वाली कांग्रेस को अपने जनप्रतिनिधियों से जुड़े गंभीर मामलों पर भी स्पष्ट और जवाबदेह रुख अपनाना चाहिए। जेएनयू में छात्राओं की शिकायतों पर आंतरिक समिति की जांच के बाद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को प्रोफेसर पद से बर्खास्त किया जा चुका है और मामले में एफआईआर भी दर्ज है। अभाविप की स्पष्ट मांग है कि इस अपराधी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीतिक सुविधा के अनुसार अलग-अलग मानदंड स्वीकार्य नहीं हैं। छात्राओं को न्याय मिलना चाहिए और किसी भी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण कानून के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए।”
जेएनयू अभाविप इकाई के मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष कहते हैं, “अभाविप ने जेएनयू में छात्राओं की सुरक्षा और न्याय के लिए लगातार आवाज उठाई है। हमारा स्पष्ट मत है कि किसी का राजनीतिक पद या प्रभाव निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई के आड़े नहीं आना चाहिए। कांग्रेस को महिला अधिकारों पर अपने सार्वजनिक रुख के अनुरूप अपने जनप्रतिनिधियों से जुड़े गंभीर मामलों में भी जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। अभाविप की मांग है कि अंगोमचा बिमोल अकोइजम को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच हो और कानून के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़े। छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय किसी राजनीतिक दल की छवि से बड़ा प्रश्न है।”
खैर, अब सबकी निगाहें पुलिस जाच पर टिकी हैं। लेकिन इसके साथ ही यह कहा जा सकता है कि प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के लिए राह बहुत कठन होती जा रही है। आने वाले समय में उन्हें अपनी सांसदी भी गंवानी पड़ सकती है और वे कानूनी चक्कर में बुरी तरह फंस सकते हैं।
















