पाञ्चजन्य के सुशासन संवाद मुंबई में स्वामी निजामृतानंद पुरी और सीमांत सेवा फाउंडेशन के सचिव सिद्धार्थ पाटनी के साथ विविध विषयों पर बातचीत की। इस अवसर पर स्वामी निजामृतानंद जी ने सुशासन को लेकर कहा कि इस देश की नीव आध्यात्म है। हम अस्पतालों का संचालन केवल सेवाभाव से कर रहे हैं।
निजामृतानंद जी फरीदाबाद में अस्पताल शुरू करने का उद्देश्य क्या था और आपकी यह यात्रा कहां तक पहुंची?
हमारा उद्देश्य था-भारत। भारत में सुशासन की बात करतें हैं तो पहले भारत को समझना पड़ेगा। भारत की नीव ही आध्यात्म है। भगद्गीता में इसे कर्म कहा गया है। अन्यत्र कर्म बंधना: इसका अर्थ ये है कि यत्न के भाव से किया गया कर्म ही मुक्ति की ओर ले जाता है। मेरा अपना कोई बैंक अकाउंट नहीं है। ये अस्पताल केवल सेवा के भाव से शुरू किया गया है। केरल में भी करीब 1000 बेड का अस्पताल है हमारा और उसका रेट भारत के अन्य स्थानों की अपेक्षा कम है। रेट कम होने से लोगों को इलाज में सुगमता हुई। इसी उद्देश्य से फरीदाबाद में इसकी शुरुआत की गई है।
भारत भर में हमारा आश्रम करीब 2800 गांवों में कार्य कर रहा है अलग-अलग पैमाने पर। एक क्रॉस सब्सिडी का भी हमारा उद्देश्य है, जो सक्षम हैं वे दे भी पाएं। हमारे अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड भी स्वीकार किए जाते हैं।
सिद्धार्थ जी जब भी सीमाई क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बात आती है तो पहला सवाल रोड कनेक्टिविटी का आता है। सीमांत क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा को पहुंचाना चुनौतीपूर्ण रहा है। ये अवधारणा कैसे आई और क्या चुनौतियां हैं?
हमारा मानना है कि वे भी हमारे देश के निवासी हैं। अगर वे सीमाओं से पलायन नहीं करते हैं तो सीमाएं सुरक्षित रहेंगी। जिस जगह से मैं आता हूं, उसमें 13 जिले हैं और 9 जिले पूरी तरह से पहाड़ी हैं। 15-16000 फीट की ऊंचाई तक हम लोग क्लीनिक चलाते हैं, जहां पर तिब्बत, चीन और नेपाल की सीमा लगती है। आज भी आदि कैलाश में बर्फबारी हो रही है। ऐसी स्थिति में हम कार्य करते हैं। क्योंकि, आजीविका को लेकर कार्य नहीं होगा, तो निश्चित ही पलायन होगा। प्रतिकूल प्रतिकूल परिस्थितियों में वहां एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की आवश्यकता है।
स्वामी जी जिस स्तर का अस्पताल आपने शुरू किया है, उसके अर्थ का प्रबंधन आप करते हैं?
इकोनॉमिक्स काम नहीं करता है। काम चलता है। कोच्चि वाले अस्पताल का उद्घाटन 26 साल पहले अटल जी ने किया था। यदि उसमें से कुछ मिल रहा होता तो ये अस्पताल बहुत पहले ही बन गया होता। इस अस्पताल को दुनियाभर से मिले सहयोगों के जरिए बनाया गया है। सेवा की दृष्टि से बात करें तो कोच्चि वाले अस्पताल में करीब 900 करोड़ का मुफ्त और सब्सिडी के तहत इलाज हुआ है। हमारा मानना है कि बीमारी होने के बाद इलाज हो ये अच्छा नहीं। डिटेक्शन ही इसका सही तरीका है और हमारी वैन गांवों में जाकर मरीजों का पता करती है और उनका इलाज करती है। हम अर्थ के लिए काम नहीं करते हैं।
सबसे अहम बात ये है कि इन ट्रस्टों के हम केवल ट्रस्टी हैं। इससे हमारा कोई लेना देना है। हमारा दायित्व केवल इसे सुचारू रूप से चलाना है। रही बात संचालनीय लागत की तो उसका प्रबंध हम हर महीने करीब 70 लाख ट्रीटमेंट सब्सिडाईज इलाज कर रहे हैं।
सिद्धार्थ जी आपका इकोनॉमिक्स क्या है?
हम लोग भी डोनर के पैसों पर ही काम करते हैं। लेकिन, अच्छी बात ये है कि हमें आयुष्मान के भी मिल जाते हैं।
















