पाञ्चजन्य सुशासन संवाद ओडिशा की उड़ान 2.0: संघ ने देश को जड़ों से जोड़ा – डॉ. सुरेंद्र जैन
September 24, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत ओडिशा

पाञ्चजन्य सुशासन संवाद ओडिशा की उड़ान 2.0: संघ ने देश को जड़ों से जोड़ा – डॉ. सुरेंद्र जैन

पाञ्चजन्य के सुशासन संवाद की उड़ान 2.0 में वीएचपी नेता डॉ. सुरेंद्र जैन ने ओडिशा के विकास, आरएसएस की 100 वर्षीय यात्रा और राम मंदिर आस्था पर विस्तार से बात की। कहा – प्रतिकूलता संघ के लिए खुराक रही।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Sep 3, 2026, 05:25 pm IST
inओडिशा
Panchjanya Sushashan samvad Orisha udan 2.0

ओडिशा की उड़ान 2.0 में बोलते विश्व हिन्दू परिषद के महासचिव डॉ सुरेंद्र जैन

पाञ्चजन्य के सुशासन संवाद ‘ओडिशा की उड़ान 2.0’ संवाद में पाञ्चजन्य में विश्व हिन्दू परिषद के संयुक्त महासचिव डॉ सुरेंद्र जैन से वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा न विभिन्न विषयों पर बातचीत की। इस मौके पर सुरेंद्र जैन ने राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि देश की जनता इससे प्रभावित नहीं थी। सबको समझ आ रहा था कि इस वितंडावाद का केवल राजनैतिक उद्देश्य था। उनके निशाने पर रामजन्मभूमि या राम मंदिर नहीं, बल्कि हिन्दुओं की आस्था थी, जिसे वो कमजोर करना चाहते थे।

विश्व हिन्दू परिषद की यात्रा को आप किस तरह से देखते हैं?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की यात्रा किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की यात्रा है। यह यात्रा है आत्मग्लानि से आत्मबोध, आत्मविस्मृति से आत्म गौरव की। जब संघ की स्थापना हुई तो कोई भी भारत के बारे में गर्व की बात नहीं करता था। उस दौरान लोग कहते थे कि भारत की नियति टुकड़ों-टुकड़ों में बंट जाना है। उस दौरान तक भारतीय कहलाना गर्व का नहीं, शर्म का विषय माना जाता था। लेकिन, इन 100 वर्षों की यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर लोगों को भारतीयता की जड़ों से जोड़ने का काम किया। आत्मविस्मृति की मायाजाल को संघ ने तोड़ दिया।

करीब 15 साल पहले मैं भुवनेश्वर में एक कार्यक्रम के लिए आया था। कार्यक्रम का नाम था ओडिशा विजन-2020। उस दौरान भी इसी तरह की बातें हुई, लेकिन मन में इस बात का विश्वास नहीं था कि ओडिशा का इस तरह से विकास हो पाएगा। क्योंकि, उस दौरान तक यह देखने को मिल रहा था कि ओडिशा भगवान जगन्नाथ का नाम तो लेता था, लेकिन उनके आदर्शों का पालन नहीं करता था। लेकिन, आज मुझे इस बात की कोई आशंका नहीं है और मैं आश्वस्त हूं कि ओडिशा निश्चित रुप से आगे बढ़ेगा। मेरा ये विश्वास इसलिए है, क्योंकि संघ ने इस देश को इसकी जड़ों के साथ जोड़ा है। संघ के स्वयंसेवक के रूप में इस यात्रा से जुड़कर मैं गौरव की अनुभूति करता हूं।

वीएचपी जैसे संगठनों की स्थापना संघ ने इसीलिए की थी, ताकि देश के साधु संतों के द्वारा लोगों को उनकी जड़ों से जोड़ा जा सके। एक बार डॉ भीमराव अंबेडकर डॉ हेडगेवार से मिले थे और उन्होंने उनसे कहा था कि अगर आप इस देश के साधु संतों से ये कहलवा दें कि छुआ छूत हमारी संस्कृति नहीं है तो छुआछूत रहित सपनों के भारत का निर्माण किया जा सकता है। उसके बाद गुरूजी ने हिंदवासोदरा उडुपी के अंदर इसका ऐलान करवाया था। आज केवल राजनीति में ही छुआछूत दिखाई देता है।

क्या आपको लगता है कि संगठन की यात्रा प्रतिकूलता के साथ ज्यादा रही?

प्रतिकूलता कैसी भी रही हो, वो हमारे लिए खुराक रही है। वो फिर चाहे प्रतिबंध हों या फिर वैचारिक संघर्ष रहा हो। संघ के स्वयंसेवक ने कभी किसी प्रतिकूलता के सामने अपना मस्तक नहीं झुकाया, अपितु उससे प्रेरणा लेकर और अधिक मजबूत होकर निकला। संघ की छवि कभी भी आम जनमानस में नहीं बिगड़ी। बेशक कुछ राजनेता और मीडिया इसे खराब करने की कोशिश करते हैं। लेकिन आम जनमानस में यह हमेशा वैसी ही रही। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि जब एक आह्वान पर देश के 60 करोड़ लोग राम मंदिर के निर्माण के लिए अपना योगदान देते हैं तो इससे सिद्ध होता है कि संघ की विश्वसनीयता लोगों के बीच कभी कम नहीं हुई।

राम मंदिर बीते कुछ वक्त में कुछ और ही विषय से चर्चा में है। क्या आपको लगता है कि इससे आम जनमानस इससे आहत हुआ है?

आप जिस विवाद का जिक्र कर रहे हैं, जिसे चंदा चोरी या चढ़ावा चोरी कहा जा रहा है। देश की जनता इससे प्रभावित नहीं थी। सबको समझ आ रहा था कि इस वितंडावाद का केवल राजनैतिक उद्देश्य था। उनके निशाने पर रामजन्मभूमि या राम मंदिर नहीं, बल्कि हिन्दुओं की आस्था थी, जिसे वो कमजोर करना चाहते थे। लेकिन एक क्षण के लिए आस्था नहीं हिली। आज भी प्रतिदिन 80-90 हजार लोग प्रतिदिन राम मंदिर आते हैं। मैं अगर केवल उस के सप्ताह की बात करूं, जब ये विवाद चला तो उस दौरान वो संख्या 92,000 तक पहुंची, लेकिन 60,000 से कम कभी नहीं हुई।

क्या इससे और अच्छे तरीके से निपटा नहीं जा सकता था?

एक विमर्श शायद सूचनाओं के अभाव में उस समय हम स्थापित कर पाने में विफल रहे, “ये चंदा चोरी नहीं थी।” ये 20,000 करोड़ की चोरी तो बिल्कुल नहीं थी। केवल 6 लोगों ने मिलकर एक समूह बनाया और वो गड़बड़ी कहीं भी चढ़ावे में नहीं की गई। ये गड़बड़ी चढ़ावे की गिनती करने में हुई थी औऱ गिनती करने की जिम्मेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अयोध्या ब्रांच की थी। इसके अलावा जिन लोगों ने ये गड़बड़ी की वो पुजारी नहीं थे, ट्रस्ट के पदाधिकारी भी नहीं थे। वो सब के सब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी थे। बहरहाल मामले में केस दर्ज हुई और जब जांच के बाद पता चला कि करीब एक से डेढ़ करोड़ से अधिक की अनियमितता नहीं हुई।

ये पहली बार नहीं है कि इस आदोलन के हर कदम पर आरोप लगे हैं। पहला आरोप शिला पूजन के समय लगा था। जब चढ़ावा मामले में केस दर्ज हुआ तो तो पहला केस खुद ट्रस्ट ने किया था। लेकिन ये भी सच है कि उस दौरान इसे हम सही तरीके से एड्रेस नहीं कर पाए। इसमें हम पीछे रहे।

विश्व हिन्दू परिषद की आगामी योजना क्या है?

भारत की यात्रा मंदिर निर्माण से राष्ट्र मंदिर निर्माण की ओर बढ़ चली है। प्राण प्रतिष्ठा के समय ही सरसंघचालक जी ने एक आह्वान किया था कि आज रामलाल राम मंदिर के अंदर प्रस्थापित हो गए हैं। अब हमें रामलला को प्रत्येक हृदय के अंदर स्थापित करना है। इसलिए राम मंदिर से राष्ट्रमंदिर का यात्रा शुरू हो चुकी है, जिसमें संस्कार देना और अपनी जड़ों की ओर लौटना शामिल है।

ओडिशा में जनजातीय समाज है और उसकी अपनी चिंताएं हैं, संघ और उसके अनुषांगिक संगठन इस पर काम कर रहे हैं। जनजातीय समाज को हिन्दू समाज से जोड़ने की दिशा में प्रयास को किस तरह देखते हैं?

‘अगर जनजातीय हिन्दू नहीं हैं, तो हिन्दू कौन हैं’, राजा राम को या राजकुमार राम को अथवा मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भगवान राम बनाने का काम जनजातीय लोगों ने ही किया था। महाराणा प्रताप का साथ उनके परिवार, उनके भाइयों ने तक छोड़ दिया था, लेकिन वहां के जनजातियों ने उनका साथ नहीं छोड़ा था। बप्पा रावल से लेकर महाराणा प्रताप तक 1000 वर्षों तक राष्ट्र की रक्षा के लिए निरंतर काम करते रहे। इसलिए जब कोई देश की जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने की बात करता है तो वह प्रश्न ही गलत होता है। हमारी मुख्यधारा को देश की जनजातियों ने ही बहाई है। प्रकृति पूजन, वृक्ष पूजन की हमारी मुख्यधारा है और यही वनवासियों की परंपरा है। असल में उन्हें हमसे जोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि हमें उनसे जुड़ने की जरूरत है।

1970 में पूज्य गुरूजी ने असम में एक जनजातीय सम्मेलन करवाया था। नागालैंड की रानी गाइडील्यू उस सम्मेलन में थीं। वहां एक स्वर में कहा गया कि जनजातीय इस देश के मूल निवासी हैं। जनजातीय समाज हिन्दू समाज का अभिन्न हिस्सा है। ईसाई मिशनरी जनजातियों को काटने में लगे हुए हैं।

क्या हिन्दुत्व और जनजातीय एक-दूसरे के पूरक हैं?

निश्चित रूप से। आप देखेंगे तो पाएंगे कि जनजातियों की सारी परंपराएं हिन्दुत्व से जुड़ी हैं। केवल हिन्दू ही प्रकृति की पूजा करता है। वनवासियों का चिंतन भी यही है। इसलिए वनवासी चिंतन हिन्दू चिंतन से अलग नहीं है।

युवाओं (Gen-Z) से संवाद को आप किस तरह से देखते हैं?

आज से 18 वर्ष पूर्व स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की उनके चार साथियों के साथ बर्बर हत्या कर दी गई थी। उन्हें गोलियों से भूनने के बाद उन हत्यारों ने कुल्हाड़ी से उनके हाथ-पैर काटे थे। लक्ष्मणानंद सरस्वती ने 1968 में कंधमाल को अपनी कर्मभूमि बनाया था। उन्होंने पांच J (जन, जाति, जंगल, जल, जमीन) को बचाने के लिए काम किया था। क्योंकि इसे ईसाई मिशनरी उनसे छीन रहे थे। उनकी जमीनों पर चर्च बना रहे थे और इनका धर्मान्तरण करा रहे थे। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने लोगों को इससे बचाने के लिए 900 से अधिक एकल विद्यालय कंधमाल में चलाए थे।

पूरे देश में नशा माफिया ईसाई मिशनरी चला रहे हैं। उन्हें 20 बार धमकी दी गई थी, 8 बार हमले किए गए थे। लेकिन, फिर भी उस वक्त का प्रशासन सोया रहा। लक्ष्मणानंद की हत्या पर देश का सेक्युलर मीडिया चुप्पी साधे रहा। लेकिन, जब जनजातीय समाज ने आवाज उठाई तो मनमोहन सिंह ने उसे राष्ट्रीय शर्म करार दे दिया।

क्या अपनी बात को मजबूती से रख पाने में संघ और उसके अनुषांगिक संगठन पीछे रह गए हैं?

मैं इससे सहमत नहीं हूं। विश्व का सबसे बड़ा विमर्श वाला व्यक्ति अगर कोई था, तो वे डॉ हेडगेवार थे। उन्होंने 100 साल पहले कहा था-भारत हिन्दू राष्ट्र है और आज देश के करोड़ों लोग यही कहते हैं। आज विरोधी मीडिया हिन्दू राष्ट्र पर चर्चा कर रहे हैं। लोगों को आज विश्वास हो चला है कि भारत हिन्दू राष्ट्र था, है और रहेगा।

Topics: सुरेंद्र जैनपाञ्चजन्य “सुशासन संवादओडिशा उड़ान 2.0आरएसएस यात्राराम मंदिर भक्त संख्या
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

सुरेंद्र जैन, केंद्रीय संयुक्त महामंत्री, विहिप

“हिंदू सांप्रदायिक होते तो आप ऐसा बयान न दे पाते” : हामिद अंसारी के बयान की VHP ने की कड़ी निंदा, जानिए क्या कुछ कहा…

IGNCA के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी जी

Odisha’s Udaan 2.0: पाकिस्तान को अचानक क्यों याद आई इस्लाम से पहले की विरासत, डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने बताया कारण

panchjanya Sushashan Samvad Odisha ki udan

ओडिशा की उड़ान 2.0: प्रदीप जोशी बोले- सरसंघचालक जी का विरोध करने वालों को सता रहा ‘दुकान बंद’ होने का डर

‘सुशासन संवाद-ओडिशा की उड़ान 2.0’ का औपचारिक रूप से उद्घाटन करते मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी, पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख श्री प्रसन्न मिश्रा।

‘सुशासन संवाद-ओडिशा की उड़ान 2.0’ उद्घाटन: ओडिशा की विकास यात्रा, समृद्ध संस्कृति और अपार संभावनाओं पर होगी चर्चा

अवध ओझा

‘शिक्षा का उद्देश्य विवेक पैदा करना’

राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी

‘सुशासन संवाद-राजस्थान’: राष्ट्रीय चेतना की सशक्त आवाज है पाञ्चजन्य- CM भजनलाल शर्मा

Load More

ताज़ा समाचार

rajasthan university dr krishna gopal on guru tegh bahadur martyrdom year

गुरु तेग बहादुर के बलिदान ने विफल किए औरंगजेब के नापाक मंसूबे: राजस्थान विश्वविद्यालय में बोले डॉ. कृष्ण गोपाल जी

पश्चिमी सूचकांकों का पुराना खेल: अकादमिक स्वतंत्रता की आड़ में भारत पर निशाना, जानें रिपोर्ट की पोल!

Mirabai Chanu Weightlifting Olympic Medalist Manipur Journey Panchjanya

लकड़ियों के बोझ से ओलंपिक पदक तक: संघर्ष और सफलताओं के बीच शिखर पर पहुंचीं मीराबाई चानू!

India Global Power BRICS Western Media

BRICS कवरेज से UPI और ISRO तक: भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत से क्यों असहज है पश्चिमी मीडिया?

Ayodhya Ram Mandir Hutatma Smarak Stambh Red Granite Bronze Logo Panchjanya

राम मंदिर परिसर में स्थापित हुआ ‘हुतात्मा स्मारक स्तंभ’: ये है 500 सालों के संघर्ष और रामभक्तों के बलिदान का प्रतीक!

धर्म, सेवा और समाज: भारतीय जीवनदृष्टि से संघ के सेवा कार्यों तक की यात्रा

iim kashipur dehradun campus bhoomipujan anand vardhan

देहरादून में IIM काशीपुर कैंपस का भूमिपूजन, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा- युवाओं को मिलेंगे बेहतर अवसर

nainital nandadevi mahotsav 2026 nanda dola visarjan

उत्तराखंड : नैनीताल में उठा माँ नंदा सुनंदा का डोला, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति

डर के आगे जीत है : क्या ट्रंप साहब के 100 प्रतिशत टैरिफ से डरने की है जरूरत?

Kotdwar Illegal Madarsa Sealed DM Swati Bhadauria Raid Jama Masjid Panchjanya

कोटद्वार में मस्जिदों में चल रहे 2 अवैध मदरसे सील: प्रशासन की छापेमारी में मिले 43 बच्चे

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies