मुंबई के ताज होटल में पाञ्चजन्य की ओर से आयोजित ‘सुशासन संवाद- मुंबई संकल्प’ का दीप प्रज्वलन के साथ शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्री वी. भागैय्या जी, पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर जी और पाञ्चजन्य के एमडी श्री अरुण गोयल जी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर जी ने कहा कि पाञ्चजन्य के लिए संवाद आयोजित करना कोई नई बात नहीं है। संवाद होते रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे। लेकिन आज का यह आयोजन केवल एक और कार्यक्रम नहीं है। जिस तरह बड़े से बड़ा चित्र एक छोटे से बिंदु से आरंभ होता है, उसी तरह ताज होटल का यह वॉल रूम भारत की उद्यमिता, उद्योग, संकल्प और जीवट का भी एक प्रतीक है। वर्ष 2022 में हमने यहीं से ‘मुंबई संकल्प’ के नाम से अपने पहले कार्यक्रम की शुरुआत की थी। उससे पहले रतन टाटा जी से भी इस संकल्पना पर चर्चा करने का मुझे अवसर मिला था।
टाटा समूह केवल एक उद्योग घराना नहीं है। उसके पीछे स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा से राष्ट्रनिर्माण का वह विचार भी रहा है, जिसने देश को एक बड़ा लौह कारखाना देने का संकल्प लिया। संदेश स्पष्ट था- यदि भारत को आगे ले जाना है, तो उसके लिए कदम बढ़ाने होंगे। कभी रेशम का काम था, कभी कपास का, कभी चाय का। अलग-अलग क्षेत्रों में भारत की उद्यमिता अपनी पहचान बना रही थी। लेकिन उसके बाद स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की भावना के साथ भारत ने उद्योग और राष्ट्रनिर्माण की एक नई यात्रा शुरू की। और जिस स्थान पर हम आज उपस्थित हैं, वह भी अपने आप में इतिहास का एक अध्याय है। यह उन शुरुआती स्थानों में रहा, जहां आधुनिक सुविधाओं का प्रयोग हुआ- बिजली, जनरेटर और लिफ्ट जैसी व्यवस्थाएं यहां देखने को मिलीं। लेकिन 26/11 के आतंकवादी हमले के दौरान यही स्थान भारत की जीवटता और जिजीविषा का भी प्रतीक बन गया। आघात होंगे, विदेशी हमले होंगे, षड्यंत्र होंगे लेकिन भारत परास्त नहीं होगा। यही भारत के संकल्प की शक्ति है और यही उस संकल्प के प्रति हमारा समर्पण भी है।
संवाद-परंपरा की एक और कड़ी
आज पाञ्चजन्य का यह कार्यक्रम उसी संवाद-परंपरा की एक और कड़ी है। पाञ्चजन्य के कार्यक्रम सामान्य अर्थों में केवल ‘मीडिया कॉन्क्लेव’ नहीं होते। हम इन्हें ‘संवाद समागम’ कहते हैं। हाल ही में गुजरात में ऐसा संवाद हुआ, उससे पहले तिरुवनंतपुरम में, उससे पहले जयपुर में और उससे पहले छत्तीसगढ़ में। देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे संवाद आयोजित होते रहे हैं। लेकिन प्रश्न यह है कि इन संवादों का उद्देश्य क्या है?
क्या केवल चर्चा करना?
क्या केवल सुर्खियां बनाना?नहीं। इन संवादों का उद्देश्य है- सामाजिक विमर्श में भविष्य के भारत के वे बिंदु तलाशना, जो आने वाले समय की दिशा तय कर सकते हैं। केवल सत्ता की चर्चा नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर चलने वाले विमर्श पर भी बात हो। केवल अस्मिता की राजनीति नहीं, बल्कि नई पहचानों को गढ़ने, समाज को जोड़ने और सामाजिक प्रश्नों को समझने का प्रयास हो। यह संवाद किसी को आपस में लड़ाने के लिए नहीं, बल्कि उत्सुकता और जिज्ञासा का समाधान करते हुए सामाजिक विमर्श के नए प्रश्नों की ओर समाज को ले जाने का एक प्रयास है।
2047 के भारत की संकल्पना पर चर्चा
आज के इस संवाद में हम इसी दृष्टि से 2047 के भारत की संकल्पना पर चर्चा करेंगे। भविष्य का भारत कैसा होगा? उसके सामने क्या अवसर हैं? उसकी चुनौतियां क्या हैं? और उस भारत के निर्माण में समाज की भूमिका क्या होगी? इस वर्ष अटल जी का शताब्दी वर्ष भी है। वे पाञ्चजन्य के आद्य और संस्थापक संपादक रहे। उनके विचार, उनकी दृष्टि और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को लेकर भी हम चर्चा करेंगे। यह जानने का प्रयास होगा कि आज के भारत में अटल जी का विचार कितना प्रासंगिक और प्रभावी है। साथ ही, यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना का शताब्दी वर्ष भी है। देश में और देश के बाहर संघ की व्यापकता दिखाई देती है। लेकिन उसके साथ कई जिज्ञासाएं और प्रश्न भी हैं। जो लोग संघ को नहीं जानते, वे उसे किस दृष्टि से समझें? संघ की भूमिका क्या है? उसकी कार्यपद्धति क्या है? और समाज जीवन में उसका योगदान किस रूप में देखा जाना चाहिए?

इन प्रश्नों पर बात करने के लिए हमारे बीच ऐसे अनेक मूर्धन्य व्यक्तित्व उपस्थित हैं, जिन्होंने अपने कार्य के माध्यम से देश और दुनिया में अपना स्थान बनाया है। आज सत्ता पर भी संवाद होगा, सेवा पर भी बात होगी। संस्कार की भी चर्चा होगी और संघ की भी। राष्ट्र के वर्तमान से लेकर भविष्य के भारत तक, अनेक विषयों पर विचार और विमर्श होगा। इसी भावना के साथ आप सभी का आज के इस ‘छत्रपति संवाद’ में हार्दिक स्वागत है। आप सभी की उपस्थिति के प्रति पुनः प्रणाम और अभिनंदन व्यक्त करते हुए मैं अपनी बात समाप्त करता हूं और अपने साथियों से आग्रह करता हूं कि कार्यक्रम को आगे बढ़ाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।

















