भारत में माल ढुलाई के लिए आमतौर पर राजमार्ग और रेलमार्ग ही लोगों के ध्यान में आता है। मगर मोदी सरकार में भारतीय नदियों पर जलमार्गों का विकास एक शांतिपूर्ण क्रांति हो रही है। बंदरगाह, जहाजरानी और जल मार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों पर माल की आवाजाही वित्त वर्ष 2014-15 के 29 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 218 मिलियन मीट्रिक टन हो गई है। यह वित्त वर्ष 2014-15 के अपेक्षा लगभग साढ़े सात गुना है जो 650% की भारी बढ़ोतरी को दर्शाता है। यह आंकड़ा ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ के तहत वर्ष 2030 के लिए तय किए गए 200 मिलियन टन के लक्ष्य से 18 मिलियन टन अधिक है। सरकार सागरमाला कार्यक्रम और आधुनिक नौवहन प्रणालियों के माध्यम से अंतर्देशीय जल परिवहन को और मजबूत कर रही है।
जलमार्गों से फायदा
भारत के पास लगभग 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और लगभग 14,500 किलोमीटर लंबे नौगम्य आंतरिक जलमार्ग नदियां, नहरें हैं। जलमार्ग आर्थिक रूप से बेहद किफायती होते हैं। जलमार्गों पर घर्षण कम होने के कारण बड़े जहाजों को चलाने में सड़कों या रेलवे के मुकाबले काफी कम ईंधन लगता है। एक अनुमान के अनुसार, जलमार्ग से माल ढुलाई की लागत सड़क परिवहन की तुलना में लगभग एक-तिहाई और रेलवे की तुलना में आधी हो जाती है। इससे अंतिम उत्पाद की कीमत कम होती है और वैश्विक बाजार में भारतीय सामानों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है।
जलमार्ग पर्यावरण अनुकूल
जलमार्ग पर्यावरण के अनुकूल होती है। यह परिवहन का सबसे हरा-भरा साधन है। प्रति टन-किलोमीटर माल ढुलाई पर जलमार्गों से होने वाला कार्बन फुटप्रिंट (प्रदूषण) सड़कों के मुकाबले बेहद कम होता है। जलमार्ग भारत के ‘नेट-जीरो’ कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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बुनियादी ढांचे पर दबाव में कमी
जलमार्गों के विकास के कारण मौजूदा बुनियादी ढांचे पर दबाव कम हो रहा है। भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे नेटवर्क पर मालगाड़ियों का अत्यधिक दबाव है। इस कारण भारी-भरकम सामान जैसे कोयला, लोहा, सीमेंट, अनाज को जलमार्गों पर शिफ्ट करने से सड़कों पर जाम और दुर्घटनाएं कम होती हैं।
जलमार्गों को जब राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोड़े जाने के कारण मल्टी मॉडल नेटवर्क तैयार होता है। इससे ‘डोर-टू-डोर’ डिलीवरी आसान और निर्बाध हो जाती है।
सक्रिय जलमार्ग
भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत देश भर में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किए गए हैं। भारत में कुल 111 राष्ट्रीय जलमार्ग में से वर्तमान में करीब 32 कार्यरत हैं।
प्रमुख राष्ट्रीय जलमार्ग
राष्ट्रीय जलमार्ग-1 भारत का सबसे लंबा राष्ट्रीय जलमार्ग है। यह गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली पर प्रयागराज से हल्दिया तक लगभग 1,620 किमी लंबा है। यह उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों से होकर गुजरता है। राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (ब्रह्मपुत्र नदी पर असम में सदिया से धुबरी तक 891 किमी लंबा है। हाल ही में यहाँ पाण्डु, जोगीघोपा और सिलीघाट जैसे स्थानों पर आधुनिक टर्मिनल और नौवहन सहायता केंद्र विकसित किया गया है। राष्ट्रीय जलमार्ग-3 केरल में कोल्लम से कोट्टापुरम तक वेस्ट कोस्ट कैनाल और बैकवाटर में 205 किमी तक फैला हुआ है। राष्ट्रीय जलमार्ग-4 काकीनाडा से पुडुचेरी तक गोदावरी-कृष्णा नदियों और नहरों की प्रणाली पर 1,095 किमी लंबा है। राष्ट्रीय जलमार्ग-5 ओडिशा में तलचर से धामरा तक ब्राह्मणी नदी और मयीरूपी डेल्टा नहरों पर 623 किमी लंबा है।











