15 अक्टूबर, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि और संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन भक्त मां की आराधना करके अपने परिवार की खुशहाली और जीवन में सकारात्मकता की कामना करते हैं।
15 अक्टूबर का पंचांग
पंचांग के अनुसार, गुरुवार को आश्विन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पूरे दिन रहेगी। इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव भी पूरे दिन बताया गया है। चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचांग देखकर पूजा-पाठ, शुभ कार्य और अन्य महत्वपूर्ण कामों की योजना बनाना अच्छा माना जाता है। इस दिन सौभाग्य योग, लक्ष्मीनारायण योग, परिजात योग, वाशि योग, आनन्दादि योग और सुनफा योग का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा मेष, कर्क, तुला और मकर राशि वालों के लिए मालव्य योग को भी शुभ बताया गया है। हालांकि, योगों की गणना के लिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करना उचित रहेगा।
मां स्कंदमाता की पूजा का शुभ मुहूर्त
मां स्कंदमाता की पूजा के लिए सुबह का समय विशेष माना जाता है। दिए गए चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार, सुबह 7 बजे से 8 बजे तक शुभ चौघड़िया रहेगा। इसके अलावा शाम 5 बजे से 6 बजे तक भी शुभ चौघड़िया में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान मां स्कंदमाता को फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। श्रद्धापूर्वक दुर्गा चालीसा या मां के मंत्रों का जाप करके परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
राहुकाल और दिशाशूल
15 अक्टूबर को राहुकाल दोपहर 1:30 बजे से 3 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचा जाता है। वहीं, दिशाशूल के अनुसार दक्षिण दिशा की यात्रा को शुभ बताया गया है। यात्रा से पहले स्थानीय पंचांग में दिशाशूल की जानकारी अवश्य जांच लें।











