नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने वैश्विक समुदाय और विशेषकर भारत का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
वैश्विक आतंकवाद के सबसे बड़े केंद्र के रूप में कुख्यात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने दावा किया कि यदि उनके देश ने आतंकवादियों को नहीं रोका होता, तो आज वे न्यूयॉर्क या लंदन की सड़कों पर घूम रहे होते.
पाकिस्तान के इस अजीबोगरीब और आत्म-प्रशंसा से भरे दावे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर आतंकवाद को पालने-पोषने वाले देश पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर सवाल उठने लगे हैं.
“अगर हमने अपने आतंकवादियों पर काबू नहीं पाया होता,
तो वे न्यूयॉर्क या लंदन की सड़कों पर घूम रहे होते”
– UNGA में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़
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भारत के नजरिए से आतंकवाद पर पाकिस्तान का ढकोसला
भारत हमेशा से वैश्विक मंचों पर यह उजागर करता रहा है कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को अपनी विदेश नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करता आया है. ऐसे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री द्वारा यह दावा किया जाना कि उनका देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, पूरी तरह से सच्चाई से परे और हास्यास्पद है.
“आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है। जो देश खुद दशकों से आतंकियों को पनाह, फंडिंग और प्रशिक्षण देते रहे हैं, वे यदि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को आतंकवाद का रक्षक बताएं, तो यह दुनिया की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।” – सोशल मीडिया पर वैश्विक रणनीतिक विशेषज्ञ
वहीं सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक दबाव और अपनी गिरती साख को बचाने के लिए पाकिस्तानी हुक्मरान इस तरह के मनगढ़ंत बयान दे रहे हैं, ताकि दुनिया का ध्यान उनके देश में पल रहे आतंकी बुनियादी ढांचे से भटकाया जा सके.
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की कलई
भारत ने हमेशा कूटनीतिक मोर्चे पर यह स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित होने वाले आतंकवाद को पूरी तरह और बिना किसी शर्त के समाप्त नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की बातचीत संभव नहीं है. संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रतिष्ठित मंच पर इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना बयान देना यह साबित करता है कि पाकिस्तान अभी भी अपनी पुरानी हरकतों से बाज नहीं आया है.
प्रमुख बिंदु:
- शहबाज शरीफ का दावा: आतंकवादियों को रोकने के नाम पर पश्चिमी देशों को अप्रत्यक्ष रूप से डराने और अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश।
- भारत का रुख: भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर हमेशा से स्पष्ट नीति अपनाई है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।
- वैश्विक विमर्श: दुनिया अब समझ चुकी है कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद का पीड़ित होने का नाटक कर रहा है, जबकि असलियत में वह इसका मुख्य प्रजनक है।
बहरहाल, UNGA में दिए गए इस बयान के बाद वैश्विक पटल पर एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि आतंकवाद के खात्मा के लिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को पाकिस्तान पर ठोस और कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है.














