भुवनेश्वर: भुवनेश्वर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक, प्राकृतिक चिकित्सक, समाजसेवी तथा ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (ओयूएटी) के वैज्ञानिक गुरूचरण जेना का रविवार सुबह 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े सामाजिक एवं वैचारिक क्षेत्र में शोक की लहर है। उनके सहयोगियों और शुभचिंतकों ने उन्हें समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रारंभिक जीवन और आपातकाल में सक्रिय भूमिका, आपातकाल में रहे जेल में
गुरूचरण जेना का जन्म 21 सितंबर 1949 को कटक जिले के कंदरपुर के निकट ब्राह्मणबाड़ गांव में हुआ था। युवावस्था में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य से जुड़ गए थे। उन्होंने ओयूएटी में सेवा के दौरान आपातकाल का सामना किया। उस दौर में उन्होंने भूमिगत रहकर कार्य किया और बाद में मीसा (MISA) के तहत गिरफ्तार भी हुए और जेल में रहे ।
आपातकाल के कठिन दौर में उनकी सक्रियता और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख उनके सहयोगियों द्वारा किया जाता रहा है। इसके बाद भी उन्होंने लंबे समय तक संघ के कार्य को समर्पित भाव से आगे बढ़ाया।
भुवनेश्वर में संघ कार्य के विस्तार में योगदान
गुरूचरण जेना संघ के निष्ठावान स्वयंसेवक के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। उनका सरल व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रही। उनके संपर्क और मार्गदर्शन से बड़ी संख्या में युवाओं ने संघ के कार्य से जुड़कर सामाजिक क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाई। इनमें से कई स्वयंसेवक आगे चलकर संघ के प्रचारक बने।
भुवनेश्वर में संघ कार्य के विस्तार में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान बताया जाता है। ओयूएटी में अध्ययनरत विद्यार्थियों को संघ के कार्य से जोड़ने में उन्होंने विशेष भूमिका निभाई। उनके संपर्क में आए अनेक विद्यार्थी बाद में प्रचारक बने और आज भी संघ के विभिन्न कार्यों में सक्रिय हैं। वे भुवनेश्वर के यूनिट-8 स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल थे।
आर्गनाइजर,पांचजन्य व राष्ट्रदीप के प्रसार के लिए निरंतर कार्य करते रहे
इसके अलावा राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े समाचार पत्र-पत्रिकाओं के प्रसार में भी उनका योगदान रहा। भुवनेश्वर में ‘राष्ट्रदीप’, ‘ऑर्गनाइजर’ और ‘पांचजन्य’ के प्रसार के लिए वे सक्रिय रूप से कार्य करते थे तथा पाठकों को जोड़ने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष पाठक सम्मेलन आयोजित करते थे।
प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से सेवा
गुरूचरण जेना ने अपने व्यावसायिक जीवन के साथ-साथ समाजसेवा को भी निरंतर आगे बढ़ाया। नौकरी के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के माध्यम से अनेक लोगों की सेवा की। वे प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के प्रशिक्षण से भी जुड़े रहे और कई लोगों को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित किया।
उनके सहयोगियों के अनुसार, समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ सहज संपर्क स्थापित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने निरंतर प्रयास किया। सामाजिक सेवा, प्राकृतिक चिकित्सा और संघ कार्य—इन तीनों क्षेत्रों में उनकी सक्रियता उनके जीवन की प्रमुख विशेषताओं में रही।
अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि
गुरूचरण जेना का पार्थिव शरीर यूनिट-6 स्थित सरकारी अस्पताल से उनके सूर्यनगर स्थित आवास ले जाया गया। इसके बाद पार्थिव शरीर को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, यूनिट-8 ले जाया गया, जहां स्थानीय लोगों, विद्यालय के गुरुजी-गुरुमाओं, प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों और संघ के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसके बाद पार्थिव शरीर को मंचेश्वर स्थित उत्कल विपन्न सहायता समिति परिसर ले जाया गया। वहां बड़ी संख्या में साधु-संतों और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि
इस अवसर पर संघ के अखिल भारतीय सद्भावना प्रमुख डॉ. गोपाल प्रसाद महापात्र, सह क्षेत्र प्रचारक जगदीश प्रसाद खाड़ंगा, क्षेत्र प्रचारक प्रमुख प्रसन्न कुमार मिश्र, क्षेत्र कार्यवाह दुर्गा प्रसाद साहू, पूर्व प्रांत संघचालक बिपिन बिहारी नंद, ओडिशा पूर्व प्रांत संघचालक समीर कुमार महांति, सहप्रांत संघचालक मनसुखलाल सेठिया, सह प्रांत कार्यवाह इंजीनियर सुदर्शन दास, प्रांत प्रचारक बिपिन प्रसाद नंद, सहप्रांत प्रचारक असित कुमार साहू सहित कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
ओडिशा पश्चिम प्रांत के संघचालक डॉ. सनातन प्रधान, प्रांत कार्यवाह गणेश महापात्र, प्रांत प्रचारक शंकर पंडा तथा दोनों प्रांतों के प्रचार प्रमुख सृष्टिधर विश्वाल समेत अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस दौरान आयोजित शोकसभा में डॉ. गोपाल प्रसाद महापात्र ने गुरूचरण जेना के संघमय जीवन और उनके सामाजिक योगदान को स्मरण करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कार्यों पर प्रकाश डाला।
उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने जताया शोक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक गुरुचरण जेना के निधन पर ओडिशा के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी शोक संदेश में कहा कि राष्ट्रसेवा और समाज कल्याण के क्षेत्र में गुरुचरण जेना का समर्पित योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने जेना के निधन को दुखद बताते हुए उनके सामाजिक एवं सेवाभावी कार्यों को याद किया।
सूर्यवंशी सूरज ने महाप्रभु श्रीजगन्नाथ से दिवंगत गुरुचरण जेना की आत्मा की सद्गति की प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में उन्हें धैर्य प्रदान करने की कामना की।
पैतृक गांव में अंतिम संस्कार
बाद में गुरूचरण जेना के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव ले जाया गया। वहां परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद गांव के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

















