फ्रांस के अधिकारियों ने पेरिस के सीन-सेंट-डेनिस इलाके में स्थित औलने-सूस-बोइस (Aulnay-sous-Bois) की चैंटेलूप मस्जिद को छह महीने के लिए बंद करने का आदेश दिया है। यह कदम मस्जिद के मौलानाओं और गेस्ट स्पीकर्स द्वारा कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा का प्रचार करने के बाद उठाया गया है। बताया जा रहा है कि फ्रांसीसी प्रशासन ने 27 जुलाई 2026 को यह आदेश जारी किया। आदेश में आतंकवाद को बढ़ावा देने, जिहाद को सही ठहराने, हिंसा के लिए उकसाने वाले भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया गया है। यह कार्रवाई इस्लामिक कट्टरपंथ से निपटने के लिए देश भर में चल रही व्यापक बहस के बीच हुई है।
आतंकवाद-विरोधी कानूनों के तहत की गई कार्रवाई
अक्टूबर 2017 में लागू किए गए एक प्रशासनिक सुरक्षा प्रावधान के तहत इस मस्जिद को बंद किया गया है। यह कानून स्थानीय अधिकारियों को उन इबादतगाह को बंद करने का सीधा अधिकार देता है, जहां इस्लामिक विचार और बयान आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं और हिंसा के लिए उकसाते हैं। सीन-सेंट-डेनिस प्रशासन की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, चैंटेलूप मस्जिद के इमाम और बाहर से आने वाले वक्ता यहां लगातार कट्टरपंथी विचार व्यक्त करते थे। वे आतंकवादी संगठनों की तरह जिहाद को सही ठहराते और शहादत का महिमामंडन करते थे। उनके द्वारा बार-बार इस तरह के बयान दोहराए जाने और आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए प्रशासन ने तत्काल इस मामले में दखल देना जरूरी समझा। इस साल की शुरुआत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो भी शेयर किया गया था, जिसमें एक इमाम चैंटेलूप मस्जिद में हिंसा को बढ़ावा देने की बात करते हुए सुना गया। वह मुस्लिमों से कह रहा था, “अगर 11 साल या उससे ज्यादा उम्र के बच्चे रोजाना नमाज नहीं पढ़ते हैं, तो उन्हें शारीरिक प्रताड़ना दी जानी चाहिए।” अधिकारियों ने जोर देकर यह भी कहा कि इस तरह सार्वजनिक तौर पर शारीरिक हिंसा को लेकर उपदेश देने के कारण मस्जिद को छह महीने के लिए बंद करने का फैसला लिया गया।
आदेश को पलटने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू
चैंटेलूप मस्जिद की देखरेख करने वाले संगठन ने प्रशासन के आरोपों का विरोध किया है और उनके आदेश को पलटने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की। मस्जिद की ओर से वकील रफीक चेक्कट ने सोशल मीडिया पर बताया कि संगठन ने मॉन्ट्रियल एडमिनिस्ट्रेटिव कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि मस्जिद को बंद करने का फैसला अस्पष्ट, अपर्याप्त और बिना पुष्टि किए गए सबूतों पर आधारित है।
मुस्लिमों, मस्जिदों की संख्या तेजी से बढ़ी
फ्रांस में डेमोग्राफिक बदलाव और मस्जिदों के बढ़ने को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024 में देश भर में मुसलमानों के इबादतगाह (जिनमें मस्जिदें और छोटी स्थानीय मस्जिदें दोनों शामिल हैं) की संख्या लगभग 2,600 तक पहुंच गई है। यह 1975 में पंजीकृत लगभग आठ मस्जिदों की तुलना में बड़ी बढ़ोतरी है। वहीं, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड इकोनॉमिक्स स्टडीज (INSEE) से जुड़े सर्वे के आंकड़ों से पता चलता है कि महानगरीय आबादी में मुस्लिमों की आबादी लगभग 10 प्रतिशत है, जो 60 से 70 लाख लोगों के बराबर है। इसके अलावा, नवंबर 2025 में पोलिंग संस्था IFOP द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि इस अवधि में वयस्क मुस्लिमों की आबादी कुल आबादी का 7 प्रतिशत थी, जबकि 1985 में यह आंकड़ा 0.5 प्रतिशत था।
10 साल पहले आतंकियों ने चर्च में पादरी को बनाया था निशाना
सेंट-एटियेन-डू-रूवरे (Saint-Etienne-du-Rouvray) में 26 जुलाई, 2016 को हुए आतंकवादी हमले के दस वर्ष पूरे होने के एक दिन बाद चैंटेलूप मस्जिद को बंद करने का आदेश जारी किया गया है। उस हमले में कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा से प्रेरित दो हमलावरों ने सुबह की प्रार्थना के दौरान चर्च के अंदर 85 वर्षीय कैथोलिक पादरी फादर जैक्स हैमेल की हत्या कर दी थी। फ्रांस के इतिहास में यह पहली बार था, जब किसी आतंकवादी हमले में चर्च के अंदर प्रार्थना करने वालों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया था।

















