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अंतरिक्ष में भारत की ‘तीसरी आंख’

भारत ने अंतरिक्ष में अपनी निगरानी क्षमता को नई ऊंचाई दी है। ईओएस-05 की सफल लॉन्चिंग के साथ देश को ऐसी ‘तीसरी आंख’ मिली है, जो अंतरिक्ष से धरती के बड़े हिस्से पर लगातार नजर रख सकेगी। कृषि, मौसम, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा में इसकी भूमिका बेहद अहम होगी

Written byडॉ. निमिष कपूरडॉ. निमिष कपूर
Sep 15, 2026, 07:39 pm IST
inभारत, रक्षा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने श्रीहरिकोटा से ईओएस-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने श्रीहरिकोटा से ईओएस-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:55 बजे एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इसरो ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के जरिए देश का पहला जियो-इमेजिंग सैटेलाइट ईओएस-05 (GISAT-1A) सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया।

निरंतर निगरानी की अद्वितीय क्षमता

यह उपग्रह पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊपर भू-समकालिक कक्षा में स्थित है, जहां से यह भारत और आसपास के विशाल क्षेत्रों पर लगातार नजर रख सकता है। उच्च-रिजॉल्यूशन इमेजिंग और सतत पृथ्वी-अवलोकन की क्षमता के कारण यह उपग्रह कृषि, मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात और आपदा प्रबंधन से लेकर सीमा निगरानी तक अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी कारण से इसे ‘तीसरी आंख’ कहा जा रहा है।

ईओएस-05 की सबसे बड़ी विशेषता बार-बार तस्वीर लेने की क्षमता है। यह पूरे भारतीय भू-भाग की तस्वीर लगभग हर 30 मिनट में और चुनिंदा क्षेत्रों की हर 5 मिनट में उपलब्ध करा सकता है, जिससे तेजी से बदलती स्थितियों पर तत्काल नजर रखी जा सकेगी। यह सफलता केवल एक नए उपग्रह का प्रक्षेपण नहीं, बल्कि उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण तकनीक और अंतरिक्ष-आधारित डेटा उपयोग में बढ़ती स्वदेशी क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रमाण है। चंद्रयान और गगनयान जैसी उपलब्धियों के बाद यह मिशन भारत को अंतरिक्ष में तकनीक उपयोग करने वाले देश से जटिल अंतरिक्ष प्रणालियां विकसित करने वाले देश के रूप में स्थापित करता है। यह उपग्रह अगले 10 वर्ष तक काम करेगा और भारत के भविष्य के पृथ्वी-अवलोकन एवं मानव अंतरिक्ष अभियानों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा

उपग्रह की असली ताकत

लगभग 2,345 किलो वजनी यह उपग्रह भू-समकालिक कक्षा में उपग्रह पृथ्वी के घूर्णन की गति के अनुरूप परिक्रमा करता है, जिससे वह आकाश में लगभग उसी क्षेत्र के ऊपर स्थित दिखाई देता है। इसकी यह खासियत किसी बड़े भौगोलिक क्षेत्र का नियमित और निरंतर अवलोकन संभव बनाता है। भू-समकालिक कक्षा में होने के कारण यह बड़े क्षेत्र का बार-बार अवलोकन कर सकता है, बिना पृथ्वी की निचली कक्षा में घूमने वाले उपग्रहों की तरह किसी स्थान के ऊपर से गुजरने का इंतजार किए। यही क्षमता तेजी से बदलती घटनाओं की निगरानी में इसे महत्वपूर्ण बनाती है। भारत ने केवल एक भारी उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता नहीं दिखाई, बल्कि उसे इस जटिल कक्षा में पहुंचाने और स्थापित करने की तकनीकी योग्यता भी प्रदर्शित की है।

ईओएस-05 की असली उपयोगिता इस बात में है कि अंतरिक्ष से मिलने वाली अनवरत जानकारी को आपदा प्रबंधन, कृषि, मौसम, पर्यावरण और रणनीतिक निर्णयों से जोड़ा जा सके। पृथ्वी की निचली कक्षाओं में घूमने वाले उपग्रह किसी स्थान को तभी देख सकते हैं, जब उनकी कक्षा उन्हें उस क्षेत्र के ऊपर से ले जाए, जिससे तेजी से बदलती घटना की लगातार निगरानी में समय का अंतर आ सकता है। ईओएस-05 भू-समकालिक कक्षा इस तस्वीर को बदलती है। लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई वाली इस कक्षा में उपग्रह पृथ्वी के एक बड़े क्षेत्र को बार-बार देख सकता है, जिससे किसी घटना की केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि समय के साथ हो रहे बदलावों की पूरी कहानी सामने आती है।

आपदा से कृषि तक उपयोग

ईओएस-05 की सबसे बड़ी खासियत केवल पृथ्वी की तस्वीरें लेना नहीं, बल्कि इन तस्वीरों के माध्यम से धरती पर हो रहे बदलावों को समझने में मदद करना है। प्राकृतिक आपदा के समय परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं, जिसमें बार-बार प्राप्त होने वाले पृथ्वी चित्र महत्वपूर्ण साबित होंगे। खासकर जब चक्रवात कुछ ही घंटों में अपना मार्ग बदल सकता है, बाढ़ तेजी से फैल सकती है और जंगल की आग बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती है। ऐसे समय में ईओएस-05 की लगातार निगरानी से चक्रवात की बादल प्रणाली की दिशा, बाढ़ के पानी का फैलाव और प्रभावित क्षेत्र का आकलन संभव होगा।

भारत की लंबी तटीय सीमा चक्रवातों के लिहाज से संवेदनशील है। बार-बार प्राप्त उपग्रह चित्रों से तूफान के विकास और संभावित मार्ग का बेहतर आकलन हो सकेगा, जिससे समय पर चेतावनी, बेहतर तैयारी और प्रभावी निकासी एवं राहत व्यवस्था संभव होगी।

ईओएस-05 की नजर खेतों और जंगलों पर भी होगी। उपग्रह आंकड़ों की मदद से फसल की स्थिति में बदलाव, सूखे या बाढ़ का प्रभाव, वन क्षेत्र में परिवर्तन और जलाशयों के फैलाव का समय के साथ आकलन किया जा सकेगा। अलग-अलग समय की तस्वीरों की तुलना से किसी क्षेत्र में हरियाली, भूमि उपयोग या जल निकायों में हो रहे बदलावों को समझने में मदद मिलेगी।

भू-समकालिक कक्षा से बड़े क्षेत्र को लगातार देखते हुए बादलों के बनने, बढ़ने और आगे बढ़ने की प्रक्रिया पर नजर रखी जा सकेगी। मानसून के दौरान ऐसी जानकारी मौसम प्रणालियों और व्यापक वर्षा पैटर्न को समझने में विशेष रूप से उपयोगी होगी। अलग-अलग समय की उपग्रह तस्वीरों की तुलना से दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, भूमि उपयोग और तटीय क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को समझने में सहायता मिलेगी। ईओएस-05 पृथ्वी-अवलोकन डेटा आपदा से पहले तैयारी, घटना के दौरान निगरानी और आपदा के बाद नुकसान के आकलन के साथ-साथ खेती, जंगल, जल, मौसम और पर्यावरण में हो रहे बदलावों को समझने की क्षमता को मजबूत करेगा।

निजी क्षेत्र और नई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था

भारत की अंतरिक्षीय ‘आंखें’ अब केवल सरकारी प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं। निजी क्षेत्र और शोध संस्थानों की तेजी से बढ़ती भागीदारी से अंतरिक्ष से मिलने वाले आंकड़ों के नए उपयोग और सेवाओं की संभावनाएं बढ़ रही हैं। अब अंतरिक्ष आधारित सूचना और सेवाओं की एक नई अर्थव्यवस्था आकार ले रही है।

अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता केवल रॉकेट बनाने तक सीमित नहीं है। इसमें उपग्रह निर्माण, अंतरिक्ष यान प्रणालियां, प्रक्षेपण, कक्षा संचालन, भू-आधारित नियंत्रण, संचार, आंकड़ा प्राप्ति और प्रसंस्करण सभी शामिल हैं। इन सभी क्षमताओं के साथ ही कोई अंतरिक्ष मिशन धरती पर उपयोगी परिणाम दे पाता है। ईओएस-05 इसी व्यापक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो भारत की पृथ्वि-अवलोकन क्षमता को और मजबूत करता है। इसके माध्यम से अंतरिक्ष से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग कृषि, जल संसाधन, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों में किया जा सकेगा, जिससे विकास से जुड़े फैसलों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

भविष्य की ओर संकेत

ईओएस-05 का महत्व उस क्षमता में है, जो भारत को अंतरिक्ष से अपनी धरती को बेहतर ढंग से देखने और समझने में सक्षम बनाती है। चंद्रयान से गगनयान और पृथ्वी-अवलोकन से भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तक, भारत की अंतरिक्ष यात्रा लगातार नए आयाम जोड़ रही है। इसका उद्देश्य केवल अंतरिक्ष तक पहुंचना नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की तकनीकी शक्ति को धरती के जीवन और विकास से जोड़ना है। ईओएस-05 इसी सोच का हिस्सा है, जो अंतरिक्ष से धरती को देखने की क्षमता को मजबूत करता है और उस भविष्य की ओर संकेत करता है, जिसमें अंतरिक्ष से मिली जानकारी भारत की सुरक्षा, विकास और बेहतर भविष्य के लिए अधिक उपयोगी बनेगी।

Topics: तीसरी आंखGSLV-F17भू-समकालिक कक्षाआपदा प्रबंधनजियो-इमेजिंग सैटेलाइटआत्मनिर्भरताचक्रवात और मौसम पूर्वानुमानसतीश धवन अंतरिक्ष केंद्रसीमा निगरानीFEATURED. पाञ्चजन्य विशेषस्वदेशी क्षमताअंतरिक्ष अर्थव्यवस्थाइसरो (ISRO)पृथ्वी-अवलोकनईओएस-05
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