
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वक्तव्य देते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन सत्र को संबोधित करते हुए वैश्विक समावेशी विकास, लचीलेपन और नवाचार के लिए भारत का दृष्टिकोण पेश किया। ब्रिक्स परिवार का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक तनाव, महामारियों और सप्लाई चेन की रुकावटों के इस दौर में सामूहिक सहयोग ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने भारत की अध्यक्षता के चार मुख्य स्तंभों-लचीलापन , नवाचार, सहयोग और स्थिरता का खाका प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के शस्त्रीकरण के खिलाफ चेतावनी देते हुए ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं को ब्रिक्स के केंद्र में रखा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में हमने सभी प्रयास लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और स्थिरता ( Sustainability), इन चार स्तंभों पर केंद्रित किये हैं। मुझे खुशी है कि आप सबके सहयोग और समर्थन से हम अपने साझा दृष्टिकोण को परस्पर सहयोग में बदल सके।
आज विश्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। सामान्य मानव के जीवन पर इसका नकारात्मकऔर व्यापक प्रभाव भी हो रहा है। महामारियों, प्राकृतिक आपदा और सप्लाई चेन में रुकावटों ने दिखाया है कि आज के वैश्विक परिदृश्य में (interconnected world) में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसलिए हमने ब्रिक्स समूह में लचीलापन बढ़ाने पर विशेष बल दिया है। चुनौतियों को समय रहते पहचानना, उनके लिए तैयार रहना और तुरंत कार्रवाई करना भी उतना ही आवश्यक है।
इसी सोच के साथ, संक्रामक रोगों के रोकथाम और इलाज के लिए ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (BRICS Integrated Early Warning System) पर सहमति बनी है। आपदा प्रबंधन के लिए शुरुआती चेतावनी डेटा एकीकरण दिशानिर्देश (Early Warning Data Integration Guidelines) तैयार की गई हैं। ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन सहयोग ढांचा हमारी सप्लाई चेन को अधिक भरोसेमंद और मजबूत बनाने में सहायक होगा।
पीएम मोदी ने बताया कि नवाचार के अंतर्गत ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क हमारे स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स को आपस में जोड़ेगा। अभिनव और प्रसार योग्य समाधान को बढ़ावा देने के लिए हमने ब्रिक्स स्टार्टअप्स इनोवेशन फंड का प्रस्ताव रखा है।
ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर किसानों के लिए नई संभावनाएं तैयार करेगा। इसके माध्यम से एआई, भौगौलिक सूचना तकनीक (geospatial technology) और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (Digital Public Infrastructure) को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ा जाएगा।
तकनीक और महत्वपूर्ण खनिज का रणनीतिक हथियार की तरह प्रयोग हमारी साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए हमने तकनीक के अपनाने में समावेशीकरण पर बल दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने ब्रिक्स के मंच से मित्रता, सहभागिता और सहयोग को आगे बढ़ाया है। हमारा प्रयास रहा है कि ब्रिक्स सहयोग केवल सरकारों तक सीमित न रहे। हमारे उद्मी, किसान, शोधार्थी, महिलाएं, युवा और सामान्य नागरिक भी इसके सक्रिय भागीदार बनें। हमने ब्रिक्स कनेक्ट के माध्यम से कौशल, रोजगार, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी, सामाजिक सुरक्षा और दक्षता निर्माण को बढ़ावा दिया है। छोटे उद्यमों को जानकारी, वित्त और नए बाजार से जोड़ने के लिए, ‘ब्रिक्स सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम सहयोग पोर्टल’ (BRICS MSME Cooperation Portal) का इनिश्यटिव लिया गया है। हमारे शहरों के बीच सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने के लिए ‘ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब’ की स्थापना की गई है।
भारतीय सभ्यता में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है। सदियों से हमारी मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, पूरक हैं। ब्रिक्स में भी हमने मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दिया है। यही स्थिरता का आधार है। यह भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है। इस दिशा में हमने कई पहलुओं पर प्रगति की है।
स्मार्ट ग्रिड्स और ऊर्जा भंडारण के लिए हमने ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र (BRICS Digital Centre of Excellence) बनाया है। यह हमारे अक्षय ऊर्जा को अधिक भरोसेमंद, कुशल और सुलभ बनाने में मदद करेगा।
कृषि पारिस्थितिकी और पुनर्योजी कृषि के उत्कृष्टता केंद्र , पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ेंगे। स्थानीय समुदायों को ध्यान में रखकर बनाए गए जलवायु अनुकूलन के ये सिद्धांत, हमारे पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान को क्लाइमेट एक्शन का एक मजबूत आधार बनाएंगे।
इन चारों स्तंभों पर आगे बढ़ते हुए ब्रिक्स के माध्यम से हमने वैश्विक समावेशी विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। क्योंकि हमारा मानना है कि ब्रिक्स में विकसित उपायों का लाभ केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन्हें ग्लोबल साउथ की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलनीय और सुलभ बनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं मेरे निजी अनुभव से कह सकता हूं कि ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है, क्योंकि ब्रिक्स में- उनकी आवाज सुनी जाती है। उनके अनुभव का सम्मान होता है। और उपाय उनके लिए नहीं, उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं। ब्रिक्स की शक्ति हमारी विविधताऔर सहयोग में है। हमारी विविधता हमारी पहचान रहे, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने, और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आए।