उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कालीन नगरी के रूप में प्रसिद्ध भदोही जिले को लेकर घोषणा की है। इसका नाम एक बार फिर बदला जाएगा और अब इस जिले को ‘संत रविदास नगर’ के नाम से जाना जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी अनलिमिटेड पोटेंशियल का प्रदेश था, लेकिन बीच में बीमारू मानसिकता वाली सरकारों ने इसे बीमारू बना दिया था। जिस उत्तर प्रदेश में कभी कारीगर और हस्तशिल्पी रोजी-रोजगार के लिए पलायन पर मजबूर थे, आज उन्हें अपनी ही माटी में हुनर दिखाने का मंच मिल रहा है। 2017 से पहले दंगा-कर्फ्यू और अराजकता से कारोबार बेहाल था, लेकिन अब कोई माफिया खुली जीप में पिस्टल लहराकर नहीं धमका सकता। न ही बेटी और व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगा सकता है। आज कालीन उद्योग को तकनीक, डिजाइन और बाजार के साथ बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षा मिली है। भदोही का कालीन दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बना रहा है।
मुख्यमंत्री ने रविवार को संत रविदास नगर, भदोही के कारपेट एक्सपो मार्ट में 4-7 अक्टूबर तक आयोजित इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ किया। उन्होंने स्टॉलों पर जाकर कारीगरों व हस्तशिल्पियों के उत्पाद देखे। इस एक्सपो में लगभग 250 एग्जीबिटर्स और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी बायर्स हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के 106 बायर्स भी हैं।
ओडीओपी ने कालीन को दिया बड़ा बाजार
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हताशा और निराशा थी। दंगा, कर्फ्यू, उपद्रव और माफियागिरी के कारण कारोबार का माहौल नहीं था। कारीगर को काम नहीं मिलता था और देशी-विदेशी खरीदार भी नहीं आते थे। सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना में भदोही के कालीन को शामिल कर कारीगरों को तकनीक, डिजाइन और बाजार से जोड़ा।
सिल्क क्लस्टर से ₹6,100 करोड़ का निर्यात
सीएम ने कहा कि संत रविदास नगर और सिल्क क्लस्टर से ₹6,100 करोड़ का निर्यात हो रहा है। देश के कुल कालीन निर्यात में संत रविदास नगर, मीरजापुर और वाराणसी के सिल्क क्लस्टर की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है। अकेले संत रविदास नगर में 2,500 एमएसएमई यूनिट हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर ₹10 हजार करोड़ है। इस उद्योग से पांच लाख से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिला है।
उन्होंने बताया कि जनपद में निर्मित 90 प्रतिशत कालीन अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन समेत विभिन्न देशों को निर्यात किए जाते हैं। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन को जीआई टैग भी मिला है। कारपेट और टेक्सटाइल क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा, डिजाइनिंग और डाइंग के प्रशिक्षण के लिए भदोही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपेट टेक्नोलॉजी स्थापित है।
अब कोई माफिया नहीं धमका सकता व्यापारी को
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में उपद्रव, कर्फ्यू और दंगे नहीं होते। कोई माफिया खुली जीप में पिस्टल लहराकर किसी को धमका नहीं सकता और बेटी व व्यापारी की सुरक्षा में सेंध नहीं लगा सकता। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था का परिणाम है कि प्रदेश को ₹50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। ₹15 लाख करोड़ के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और साढ़े सात लाख करोड़ रुपये के उद्योग बहुत जल्द धरातल पर उतरने जा रहे है। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं और प्रत्येक यूनिट को पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है।
14 हजार से 35 हजार के पार पहुंचे कारखाने
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में करीब 14 हजार कारखाने थे, जिनकी संख्या अब 35 हजार से अधिक हो गई है। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का निर्माण उत्तर प्रदेश में हो रहा है। देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड पर काम चल रहा है और प्रदेश में 12 निजी औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसी व्यवस्थाओं के जरिये निवेशकों को हरसंभव सुविधाएं दी जा रही हैं।
इंटरनेशनल ट्रेड शो से दुनिया ने देखी यूपी की ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में छह लाख से अधिक विजिटर पहुंचे। इसमें 2,400 से अधिक एग्जीबिटर्स और 650 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल हुए।
















