दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। इसमें एजेंसी ने उमर उन नबी को मुख्य आरोपी बनाया है। लेकिन अब और जानकारी सामने आई है कि इस ब्लास्ट मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी के तीन डॉक्टरों से जुड़े एक मॉड्यूल शामिल था। इसमें डॉ. उमर उन नबी के अलावा डॉ. मुजम्मिल शकील गनी और डॉ. अदील अहमद रादर है। आरोप है कि ये लोग फरीदाबाद के आसपास अलग-अलग जगहों पर विस्फोटक और हथियारों की टेस्टिंग करते रहे।
यूनिवर्सिटी कैंपस में पहली टेस्टिंग
सितंबर-अक्टूबर 2025 में उमर, गनी और जासिर बिलाल वानी (एक छात्र) ने यूनिवर्सिटी कैंपस में ट्यूबवेल के पास नाइट्रोग्लिसरीन की टेस्टिंग की। ये विस्फोटक गनी के फ्लैट में तैयार किया गया था। उसके बाद ये लोग यूनिवर्सिटी के बाहर एक सुनसान मैदान में टेस्ट ब्लास्ट करने लगे।
अरावली में आगे की टेस्टिंग
फिर ये धौज के जंगली इलाके में गए। वहां उमर और गनी ने टीएटीपी (ट्राइएसिटोन ट्राइपरऑक्साइड) से टेस्ट किए। एनआईए के मुताबिक, एक टेस्ट में इस्तेमाल हुए पाइप जैसे डिवाइस के अवशेष बाद में गनी की बताई जगह से बरामद हुए। शुरू में ये लोग खाद आधारित मिश्रण से काम करते थे। टेस्ट के बाद जब टीएटीपी की ताकत पता चली तो उसी की तरफ शिफ्ट हो गए। बाद में बड़े आईईडी बनाने का काम भी शुरू हो गया।
हथियार खरीद और टेस्ट फायरिंग
एनआईए का आरोप है कि अल फलाह की फार्माकोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहीन शाहिद ने अनसार गजवात-उल-हिंद (एजीयूएच) नाम के ग्रुप को करीब 16 लाख रुपये दिए। ये पैसे गनी के जरिए पहुंचे। इससे क्रिनकोव राइफल, एक एके-47 और दो पिस्टल खरीदे गए। अक्टूबर-नवंबर 2024 में अदील जब अल फलाह आए तब गनी, अदील और शाहीन ने धौज के जंगल में क्रिनकोव की टेस्ट फायरिंग की।
सामग्री खरीद और स्टोरेज
उमर, गनी, शाहीन और वानी गुरुग्राम और फरीदाबाद के बाजारों से खाद, केमिकल, बिजली का सामान, ट्रॉली बैग, पानी के बैग, गैस स्टोव आदि खरीदते रहे। पहले ये सामान यूनिवर्सिटी कैंपस के फ्लैट्स में रखा जाता था। बाद में खोरी जमालपुर और धौज के किराए के मकानों में शिफ्ट कर दिया गया।
वानी का रोल
काजीगुंड रहने वाले वानी पॉलिटिकल साइंस ग्रेजुएट है। वो बार-बार अल फलाह आता था। विस्फोटक तैयार करने में मदद की और कच्चा माल किराए के मकानों तक पहुंचाने में सहयोग किया। उमर के कमरे में रहकर उन्होंने रॉकेट टाइप आईईडी भी बनाए। 2025 की शुरुआत तक मॉड्यूल ने कई सूटकेस टाइप आईईडी बना लिए थे। कुछ स्टॉक धौज के दूसरे किराए के मकान में रखा गया। 9 नवंबर को फतेहपुर टागा से करीब 2600 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद हुआ। अगले दिन रेड फोर्ट के पास मेट्रो स्टेशन के पास आई-20 कार में विस्फोट हुआ। उमेर को एनआईए ने उस कार का ड्राइवर और सुसाइड बॉम्बर बताया। इस ब्लास्ट में 15 लोग मारे गए और 29 घायल हुए थे।
















