जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाल ही में एक ऐसे आतंकवादी मॉड्यूल का पता लगाया है, जिसमें कई डॉक्टर शामिल थे। इसे ‘व्हाइट-कॉलर’ टेरर मॉड्यूल कहा जा रहा है। इन पढ़े-लिखे आतंकियों के इस मॉड्यूल को ‘अंसार अंतरिम’ नाम दिया गया है। इस मामले की जांच अब NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) ने अपने हाथ में ले लिया है।
कट्टरपंथी मौलवियों ने बहकाया
ये डॉक्टर और कुछ मौलवी 2016 से कट्टरपंथी विचारों की ओर झुक गए थे। उस समय वे एक्टिव आतंकियों से संपर्क खो चुके थे। बाद में उन्होंने खुद एक नया ग्रुप बनाया, जिसका नाम रखा ‘अंसार अंतरिम’। ये नाम अल-कायदा से जुड़े ग्रुप्स में इस्तेमाल होने वाले ‘अंसार’ से मिलता-जुलता है।
कैसे बनाया गया ये समूह
अप्रैल 2022 में श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में ईदगाह पर ये लोग मिले। इसमें शामिल थे:
- डॉ. अदील रदर (आमिर/चीफ बनाया गया)
- मौलवी इरफान अहमद (डिप्टी आमिर)
- डॉ. मुजामिल गनी (ट्रेजरर, यानी खजांची)
- डॉ. उमर-उन-नबी (कोऑर्डिनेटर)
- अदील के भाई मुजफ्फर रदर (अभी फरार)
- कारी आमिर और तुफैल गाजी
ये लोग डॉक्टर थे या धार्मिक काम से जुड़े थे। ग्रुप का मकसद जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ देश के दूसरे हिस्सों में हमले करना था।
क्या थी योजना
2023 में उन्होंने हरियाणा के सोहना और नूंह से खाद (फर्टिलाइजर), और फरीदाबाद से NPK और केमिकल खरीदे। उमर-उन-नबी ने ऑनलाइन वीडियो देखकर TATP (ट्राइएसीटोन ट्राइपरॉक्साइड) नाम का खतरनाक विस्फोटक बनाना सीखा, जो IED में इस्तेमाल होता है।
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उमर सबसे ज्यादा कट्टर था। वो पुलवामा का 28 साल का डॉक्टर था। उसने पहले 2016 और 2018 में आतंकी ग्रुप्स में शामिल होने की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहा। उसने साउथ कश्मीर के एक लड़के दानिश अलियास जासिर को भर्ती करने की कोशिश की और उसे फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पास किराए के मकान पर ले गया, जहां विस्फोटक बन रहे थे। उमर ने उसे फिदायीन (सुइसाइड) अटैक के लिए तैयार करने की कोशिश की, लेकिन दानिश ने मना कर दिया–आर्थिक हालात और इस्लाम में सुसाइड की मनाही का हवाला देकर। उमर का प्लान था दिल्ली में किसी भीड़-भाड़ वाली जगह या धार्मिक महत्व वाली साइट पर VBIED (व्हीकल बोर्न IED) ब्लास्ट करना, फिर भाग जाना।
कैसे पकड़ा गया
19 अक्टूबर को श्रीनगर के बुनपोरा, नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर दीवारों पर चिपके मिले। श्रीनगर पुलिस ने केस दर्ज किया, CCTV चेक किया और तीन लोकल लड़कों को पकड़ा –अरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ, और मकसूद अहमद दार उर्फ शाहिद। ये पहले पत्थरबाजी के केस में थे।
पूछताछ से मौलवी इरफान अहमद का नाम आया, जिसने पोस्टर दिए और डॉक्टरों को कट्टर बनाया। आगे जांच में अंसार अंतरिम का पता चला। पुलिस ने मुजामिल गनी को गिरफ्तार किया और विस्फोटक बरामद किए। इससे उमर घबरा गया। 10 नवंबर को उसने दिल्ली के लाल किले के बाहर विस्फोटक से भरी कार में ब्लास्ट किया, जो समय से पहले फट गया। इसमें 12 से ज्यादा लोग मारे गए। उमर खुद भी मारा गया। अब NIA पूरी जांच कर रही है। मुजफ्फर रदर अभी फरार है। ग्रुप में कश्मीर, हरियाणा और यूपी तक का नेटवर्क था।

















