गत 3 सितंबर को भुवनेश्वर में पाञ्चजन्य द्वारा ‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने समसामयिक विषयों के साथ ओडिशा के विकास और वहां की उपलब्धियों पर बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके संपादित अंश
कन्वर्जन के मुद्दे को लगातार उठाने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की 2008 में हत्या कर दी गई थी और उसकी जिम्मेदारी भी सीपीआईएमएल ने ली थी। इस हत्याकांड से संबंधित फाइल गायब कैसे हुई? इसके लिए कौन दोषी है?
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की हत्या बहुत ही निंदनीय घटना थी। इस मामले की जांच के लिए नायडू आयोग का गठन किया गया था और आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। उस रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर नहीं रखा गया। जब इस रिपोर्ट की तलाश शुरू की तो काफी समय तक जानकारी नहीं मिल सकी कि रिपोर्ट कहां है। लगभग छह महीने तक रिपोर्ट को तलाशने का प्रयास किया गया। अब हमें जानकारी मिली है कि इस मामले से संबंधित कुछ दस्तावेज और फाइल जांच के दायरे में हैं। इसलिए जब तक पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक मैं इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकता। लेकिन मैं स्पष्ट कहूंगा कि इस मामले की पूरी जांच होगी। फाइल कहां गई, किसने गायब की, क्यों गायब की और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है-इन सभी सवालों के जवाब सामने आएंगे। किसी भी परिस्थिति में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार इस मामले को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
आज भी जनजातीय क्षेत्रों में कन्वर्जन की समस्या दिखाई देती है। यह एक बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए आपकी सरकार क्या कदम उठा रही है?
एक तरफ कन्वर्जन के प्रयास होते हैं और दूसरी तरफ यह भी देखा गया है कि जहां विकास नहीं पहुंचता, वहां लोगों की कमजोर परिस्थितियों का फायदा उठाना आसान हो जाता है। इसलिए हमारी सरकार का मानना है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों का सामाजिक और आर्थिक विकास होना चाहिए। जब लोगों की आय बढ़ेगी, जीवन स्तर बेहतर होगा और उन्हें मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी तो वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन में नहीं आएंगे। कई क्षेत्रों में लोगों के पास रहने के लिए घर नहीं थे, पीने का पानी नहीं था, सड़कें नहीं थीं, स्वास्थ्य और शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। ऐसी परिस्थितियों का फायदा उठाकर प्रलोभन के माध्यम से कन्वर्जन की कोशिशें होती थीं। इसलिए हमारी प्राथमिकता है कि दूर-दराज के क्षेत्रों तक सड़क, पेयजल, आंगनबाड़ी, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका की सुविधाएं पहुंचाई जाएं। प्रधानमंत्री जनधन योजना के माध्यम से भी विशेष रूप से जनजातीय समुदायों के लिए घर, पानी, स्कूल, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
कन्वर्जन रोकने के प्रयासों के साथ-साथ जनजातीय समाज की आस्था, अस्मिता, पहचान, परंपरा और अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखने के लिए आपकी सरकार क्या कर रही है?
हमारा मानना है कि विकास के साथ शिक्षा और संस्कार भी जरूरी हैं। जब जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा की अच्छी व्यवस्था होगी और बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ा जाएगा तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। हम जनजातीय क्षेत्रों में गुरुकुल जैसी शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं, जहां बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार भी मिलें। पहले बड़ी संख्या में जनजातीय विद्यार्थी कुछ कक्षाओं के बाद पढ़ाई छोड़ देते थे। ऐसे विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की गईं। हमने विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की है। उदाहरण के तौर पर स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को 5,000 रुपए तक की सहायता दी जा रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आ रही है।
राज्य के संसाधनों की प्रचुरता को आम व्यक्ति की संतुष्टि और उसके जीवन की समस्याओं के समाधान का माध्यम बनाने के लिए आपकी सरकार की क्या रणनीति है?
पिछली सरकार की प्राथमिकता लंबे समय तक वोट बैंक की राजनीति रही। विकास और बुनियादी सुविधाओं पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। हमारी प्राथमिकता विकास है। हमारा उद्देश्य है कि राज्य के संसाधनों का लाभ आम जनता तक पहुंचे। ओडिशा के विकास के लिए हमने बुनियादी सुविधा पर विशेष जोर दिया है। राज्य के बजट में भी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बड़ी राशि का प्रावधान किया गया है। सड़क, बिजली, रेल, राष्ट्रीय राजमार्ग, बंदरगाह और औद्योगिक क्षेत्र में विकास का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। डबल इंजन सरकार होने का भी हमें लाभ मिल रहा है। केंद्र सरकार की ओर से ओडिशा को बड़ी मात्रा में सहायता और निवेश मिल रहा है। रेल, राष्ट्रीय राजमार्ग, बंदरगाह और अन्य बुनियादी ढांचों पर केंद्र और राज्य मिलकर काम कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि मूलभूत विकास केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित न रहे, बल्कि अस्पताल बनें, डॉक्टर और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, रोजगार के अवसर पैदा हों और लोगों की आजीविका की बेहतर व्यवस्था हो।
महिला सशक्तिकरण आपकी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। इस दिशा में आपकी सरकार की प्रमुख योजनाएं और लक्ष्य क्या हैं?
महिला सशक्तिकरण हमारी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तो परिवार और समाज दोनों मजबूत होंगे। इसी दिशा में हमने सुभद्रा योजना शुरू की है। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर वर्ष 10,000 रुपए की सहायता दो किस्तों में दी जा रही है। हमारा उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे-चाहे वह महिला हो, जनजातीय समाज हो, गरीब परिवार हो या ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला व्यक्ति। यही हमारी सरकार के सुशासन और विकास का मूल उद्देश्य है।
ओडिशा की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चक्रवात और उसके बाद बाढ़ जैसी आपदाओं का खतरा बना रहता है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था और तैयारियां क्या हैं?
शून्य-जीवन हानि की नीति को अपनाया गया है। हम चक्रवात के 72, 48 या 24 घंटे पहले ही सुरक्षित जगह पर लोगों को पहुंचाते हैं। लोगों को ही नहीं, बल्कि पशुओं को भी ऊंचाई पर पहुंचा दिया जाता है। आपदा में हमारा प्रयास है कि एक भी जीवन की हानि न हो। चक्रवात के कारण बिजली कट जाती है, पानी भर जाता है, बाढ़ आ जाती है। यह बहुत ही कठिन समय होता है। आपदा प्रबंधन करने के मामले में ओडिशा में बहुत अच्छी व्यवस्था है। इसी आधार पर कई साल से कोई भी जीवन हानि नहीं हुई है। बाढ़ के बाद सांप के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसके आधार पर ‘एंटी वेनम इंजेक्शन’ और ‘वैक्सीन’ के साथ चिकित्सक और आशा सहायक उपस्थित रहते हैं, ताकि ऐसे लोगों को तत्काल इलाज मिले। हाल में 500 से अधिक लोग सर्पदंश के शिकार हुए, उनमें किसी की जीवन हानि नहीं हुई।
अगले 100 वर्ष में आप ओडिशा को किस रूप में देखना चाहते हैं? आपके सपनों का ओडिशा कैसा होना चाहिए?
देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में ओडिशा चौथे पायदान पर है। सेमीकंडक्टर और ड्रोन का निर्माण कार्य ओडिशा कर रहा है, जो देश की सामरिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण साबित होगा। प्रदेश के किसानों को खरीफ और रबी की फसल के लिए उचित मूल्य दिया जा रहा है। साथ ही, पीएम किसान सम्मान निधि योजना की राशि सरकार किसानों को उपलब्ध करवा रही है। ओडिशा सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक विकास के मामले में विकास के नए कीर्तिमान गढ़ेगा, ऐसी अपेक्षा है।

















