पश्चिम बंगाल की भाजपा की अगुवाई वाली मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी की सरकार लगातार कट्टरपंथी और अलगाववादियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे नारे लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।
अलगाववादी नारों पर चेतावनी
शुभेंदु अधिकारी ने एक स्थानीय टीवी चैनल से बातचीत में साफ कहा कि राज्य में ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे नारे लगाने वालों को नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि राजनीतिक विरोध और लोकतांत्रिक असहमति का पूरा स्वागत है। सरकार, भाजपा या उसकी छात्र शाखा एबीवीपी की नीतियों के खिलाफ विरोध जताने का अधिकार सबको है। ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसे राजनीतिक नारे लगाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की छूट है। लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में देश की एकता और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले नारों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे नारे लगाने वाले तत्वों को तुरंत गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
धार्मिक जुलूसों में विदेशी झंडों का मुद्दा
राज्य में हाल ही में एक धार्मिक जुलूस के दौरान कथित रूप से फिलिस्तीनी झंडे दिखने की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि इस मामले में पहले ही गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। आगे भी ऐसे प्रतीकों के प्रदर्शन पर पाबंदी रहेगी। उनका कहना था कि अपने धार्मिक झंडे रखने में कोई दिक्कत नहीं है। तिरंगा लेकर निकलने वाले का स्वागत है। लेकिन जुलूसों में फिलिस्तीनी झंडे क्यों लाए जा रहे हैं, यह सवाल उन्होंने रखा।
राष्ट्र प्रथम और वैचारिक विरासत पर जोर
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी राजनीति और शासन के दो मुख्य आधार हैं—राष्ट्र प्रथम और भाजपा के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की वैचारिक विरासत। विश्वविद्यालय परिसरों की दीवारों पर मारे गए माओवादी नेता किशनजी के समर्थन में लिखे नारे और ‘लाल सलाम’ की संस्कृति पर उन्होंने टिप्पणी की। उन्होंने साफ किया कि राज्य की ऐतिहासिक राष्ट्रवादी पहचान को उग्रवादी या माओवादी विचारधारा से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
इसे भी पढ़ें: बारावफात जुलूस में रियाज ने लाउडस्पीकर पर बजाया ‘सर तन से जुदा’, हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का किया अपमान
बंगाल के स्वतंत्रता संग्राम की याद
बंगाल के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद दिलाते हुए उन्होंने अरबिंदो, सुरेंद्रनाथ बनर्जी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी हस्तियों का नाम लिया। उन्होंने कहा कि बंगाल हमेशा से भारत के राष्ट्रीय पुनर्जागरण और देशभक्ति का केंद्र रहा है। सरकार रचनात्मक आलोचना का स्वागत करती है और अपनी जवाबदेही से पीछे नहीं हटती। लेकिन राज्य को डराने या दबाव में लेने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ये बातें शुभेंदु अधिकारी ने स्थानीय टीवी चैनल से हुई बातचीत के दौरान कही हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि वे राष्ट्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करने की बात दोहरा रहे हैं।

















