राष्ट्र रक्षकों के प्रति अटूट स्नेह का भी अनन्य प्रतीक है रक्षाबंधन
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राष्ट्र रक्षकों के प्रति अटूट स्नेह का भी अनन्य प्रतीक है रक्षाबंधन

माना जाता है कि सौनिकों को राखी भेजने की इस परंपरा की शुरुआत 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय हुई थी। सीमा पर तैनात सैनिकों का हौसला बढ़ाने के लिए यह परंपरा सालों से निभायी जा रही है।

Written byपूनम नेगीपूनम नेगी — edited by Mahak Singh
Aug 26, 2026, 02:42 pm IST
inभारत

रक्षाबंधन का पावन पर्व सिर्फ खून के रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सीमाओं पर तैनात राष्ट्र रक्षकों के प्रति अटूट स्नेह का भी अनन्य प्रतीक है। अपने परिवारों से दूर देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात वीर सैनिक भाइयों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान के साथ देश की हजारों महिलाओं और स्कूली बच्चों द्वारा द्वारा हर साल राखियाँ भेजना हमारे देश की एक महान परंपरा है। माना जाता है कि सौनिकों को राखी भेजने की इस परंपरा की शुरुआत 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय हुई थी। सीमा पर तैनात सैनिकों का हौसला बढ़ाने के लिए यह परंपरा सालों से निभायी जा रही है। कहने की आवश्यकता नहीं कि देश की सीमाओं पर तैनात हमारे जांबाज शूरवीरों की कलाइयों पर सजी राखियां उनके भीतर ऐसी नवऊर्जा भर देती हैं कि कर्तव्य की बलिवेदी पर बलिदान होने में उन्हें जरा भी भय नहीं रहता। यह रक्षासूत्र देश के आम नागरिकों और सुरक्षा बलों के बीच की भरोसे की डोर को मजबूत बनाते हैं।

देश की सीमाओं पर डटे वीर जवानों को राखियों से मिलता है अपनों का प्यार और हौसला

ज्ञात हो कि माँ भारती के इन्हीं वीर सेनानियों की भुजाओं के बल पर आज दुनियाभर में भारत की सैन्य ताकत का डंका बज रहा है। जब-जब देश के दुश्मनों ने हमारी ओर आंख उठाकर देखा तो हमारे जांबाज सैनिकों ने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया। हालात चाहे जितने भी विकट हों, हमारी सेनाओं के वीर जवान भारतमाता की सुरक्षा में बढ़े कदम कभी पीछे नहीं खींचते; चाहे कहर बरपाती धूप हो या कड़ाके की सर्दी, घनघोर बारिश हो या घना कोहरा; ये वीर रणबांकुरे हर परिस्थिति में राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा में शान से डटे रहते हैं। देशवासियों द्वारा भेजी गई राखियां उन्हें अपनेपन का अहसास कराती हैं। राखियों के रूप में भेजा गया स्नेह और विश्वास सैनिकों के हौसले और देश की रक्षा के संकल्प को और मजबूत करता है।

यह पवित्र रक्षा सूत्र सैनिकों को हर मुश्किल परिस्थिति में डटे रहने और देश की रक्षा करने की असीम ऊर्जा देते हैं। बिना किसी खून के रिश्ते के, यह पावन बंधन देश के प्रति नागरिकों के समर्पण और प्रेम की सबसे सुंदर मिसाल है। सूत्र रूप कहें यह पर्व सैनिकों के बलिदान और कठोर परिश्रम के प्रति आभार जताने का एक भावनात्मक जरिया साधन है। प्रस्तुत है रक्षाबंधन के पर्व पर सोशल मीडिया पर वायरल इस काव्य में फौजी भाई के प्रति एक बहन के भावनात्मक उद्गार-

कलाई सूनी है तेरी, पर तू देश का मान है,
हे वीर फौजी भैया ! तू मेरा अभिमान है।
नहीं आ सके जो घर तू, राखी भेज रही हूँ मैं,
सरहद के उस पहरेदार को, तिलक लगा रही हूँ मैं।
माँ को छोड़कर नहीं आ सकता, फर्ज बड़ा है तेरा,
दुश्मन की हर चाल पर, बेहद कड़ा है पहरा तेरा।
गोली चले दुश्मन पर, ऐसा रक्षा सूत्र हो तेरा,
पूरा देश सुरक्षित है, क्योंकि जाग रहा भाई मेरा।।
इसी तरह दुर्ग (छत्तीसगढ़) के संदीप जैन ‘मित्र’ के काव्य में 
राखी पर एक सैनिक की भावनाएं बेहद भावपूर्ण तरीके से व्यक्त की गयी हैं-  
कलाई सूनी है बहना, मेरी राखी तो भिजवाना,
वतन के काम आ जाऊं, बस ये ही दुआ कर जाना।
खड़ा मैं हूं जो सरहद पर, तो सब महफूज रहते हैं,
नहीं दुश्मन का डर हमको, सभी मुझसे ये कहते हैं।
रहे महफूज सब डोरी में, यह आशीष भर जाना,
कलाई सूनी है बहना, मेरी राखी तो भिजवाना।
भले हिमपात या आंधी हो, मुझको पग जमाना है,
करे शत्रु जतन कितने, नहीं पग डगमगाना है।
निभाउंगा वचन सारे, यही विश्वास धर जाना,
कलाई सूनी है बहना मेरी, राखी तो भिजवाना।।

Topics: Rakhi traditionRakshabandhan specialRakshabandhan Kab HaiIndian ArmyRakshabandhanBharat MataRaksha SutraRakshabandhan DateRakshabandhan 2026Rakhi festival
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