पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत लंबित आवेदनों पर सुनवाई और प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की घोषणा की है। पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत लगभग 2.30 लाख लोगों ने आवेदन किया है। इनमें से 11 प्रतिशत से अधिक 23,000 पात्र लोगों को नागरिकता का प्रमाण-पत्र सौंप दिया गया है। शेष आवेदनों पर तेजी से काम किया जा रहा है। यह प्रमाण-पत्र संबंधित जिलाधिकारियों के जरिए दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने धार्मिक उत्पीड़न के कारण बांग्लादेश से आए लोगों से जल्द से जल्द सीएए के तहत आवेदन करने का आग्रह किया है। यह कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों के लिए है। जो लोग धार्मिक उत्पीड़न के कारण बिना वैध दस्तावेजों के भारत आए हैं, वे इस प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने जिला स्तर पर अधिकारियों को नागरिकता आवेदन की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का अधिकार दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत पश्चिम बंगाल सहित आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लंबित आवेदनों की प्रक्रिया को तेज करने के लिए जिला कलेक्टरों को सीधे नागरिकता प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार सौंपा है। अब केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई ‘सशक्त समितियों’ की जगह सीधे जिला कलेक्टर आवेदनों की जांच, सुनवाई और प्रमाण पत्र जारी करेंगे। जिला कलेक्टर दस्तावेजों का सत्यापन करने, पूछताछ करने और पात्र आवेदकों को शपथ दिलाकर नागरिकता देने के लिए अधिकृत किए गए हैं। यह आदेश पश्चिम बंगाल के अलावा गुजरात, राजस्थान, पंजाब, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर लागू किया गया है।
हर घुसपैठिया भारत से निकाला जाएगा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 21 अगस्त 2026 को सिलीगुड़ी में दिए बयान में पात्र हिंदू, सिख और जैन शरणार्थियों को छह महीने के भीतर सीएए के तहत भारतीय नागरिकता देने की घोषणा की थी। रैली के दौरान यह भी कहा गया कि राज्य से हर घुसपैठिये की पहचान कर उसे बाहर निकाला जाएगा। सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने में असहयोग को लेकर उन्होंने ममता सरकार पर तीखा हमला बोला था।

















