Explainer: क्यों मायने रखती है UNSC सदस्यता? भारत का अभियान और वैश्विक कूटनीति
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Explainer: क्यों मायने रखती है UNSC सदस्यता? भारत का अभियान और वैश्विक कूटनीति

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 के दो साल के कार्यकाल के लिए अभियान शुरू कर दिया है। ताजिकिस्तान से मुकाबला, चुनाव जून 2027 में। क्षेत्रीय समूह, चुनाव प्रक्रिया और महत्व जानें।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 17, 2026, 01:21 pm IST
inविश्व
UNSC

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 के दो साल के कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी का अभियान शुरू कर दिया है। अगर भारत जीत जाता है तो यह उसका नौवां मौका होगा। चुनाव जून 2027 में होगा। एशिया से एक सीट के लिए ताजिकिस्तान भी मुकाबला कर रहा है।

UNSC के सदस्य कौन होते हैं?

संयुक्त राष्ट्र को पांच क्षेत्रीय समूहों में बांटा गया है—एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, पूर्वी यूरोप और पश्चिमी यूरोप व अन्य (WEOG)। WEOG में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इजरायल शामिल हैं। पूर्वी यूरोप समूह ठंडे युद्ध के समय की याद दिलाता है। UNSC के पांच स्थायी सदस्य (P5)—अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन—द्वितीय विश्व युद्ध के विजेता मित्र राष्ट्रों से जुड़े हैं।

UNSC में दस अस्थायी सदस्य भी होते हैं। ये संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो साल के लिए चुने जाते हैं। इनमें अफ्रीका से तीन, पूर्वी यूरोप से एक, और एशिया, लैटिन अमेरिका व WEOG से दो-दो सदस्य होते हैं।

चुनाव कैसे होते हैं?

हर साल पांच अस्थायी सदस्य रिटायर होते हैं और नई बारी आती है। अभी पाकिस्तान 2025-26 के लिए एशिया से सदस्य है। बहरीन का कार्यकाल 2027 में खत्म होगा। किर्गिस्तान 2027 में पाकिस्तान की जगह लेगा और 2028 तक रहेगा। बाहर से देखने पर भारत का ताजिकिस्तान के खिलाफ मुकाबला आसान लगता है। भारत की वैश्विक स्थिति, जी-20 सदस्यता जैसी चीजें मजबूत हैं। लेकिन संयुक्त राष्ट्र के चुनाव कभी-कभी अजीब तरीके से चलते हैं। इस साल जून में पश्चिमी देशों के लिए तीन उम्मीदवारों में से दो सीटों के चुनाव में पुर्तगाल और ऑस्ट्रिया ने जर्मनी को पीछे छोड़ दिया। जर्मनी संयुक्त राष्ट्र को बड़ा वित्तीय योगदान देता है और स्थायी सदस्यता चाहता है। वह हर सात-आठ साल में सदस्य बनने की कोशिश करता है। पिछली बार 2019-20 में था।

यह चुनाव गुप्त मतदान से हुआ। लगता है कि ग्लोबल साउथ में जर्मनी के गाजा युद्ध पर रुख को लेकर नाराजगी थी। छोटे देशों में बड़े देशों के खिलाफ एकजुटता भी दिखी।

एशिया समूह में किर्गिस्तान ने फिलीपींस को हराया। फिलीपींस लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है और आसियान का समर्थन था। किर्गिस्तान को 191 में से 142 वोट मिले। दो-तिहाई यानी 127 वोटों की जरूरत आसानी से पार हो गई। इसमें 50 से ज्यादा सदस्यों वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और चीन के समर्थन ने मदद की। इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्षता के चुनाव में भी बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने साइप्रस के उम्मीदवार को हराया। यहां भी छोटे देशों और कुछ समूहों का असर दिखा।

आम तौर पर किर्गिस्तान की सदस्यता मध्य एशिया को प्रतिनिधित्व देती है और भारत का रास्ता आसान कर सकती है। लेकिन किर्गिस्तान और बांग्लादेश की जीत व जर्मनी की हार दिखाती है कि भारत को मजबूत वैश्विक अभियान चलाना जरूरी है। अभियान समय से शुरू हो चुका है। 2010 में भारत के सामने कजाखस्तान का मुकाबला था। मजबूत द्विपक्षीय संबंधों से कजाखस्तान ने अपनी उम्मीदवारी 2017-18 पर शिफ्ट कर दी। फिर भी भारत ने न्यूयॉर्क और दुनिया भर में कूटनीतिक मेहनत की। नतीजा यह हुआ कि भारत को रिकॉर्ड 187 वोट मिले। यह स्थायी सदस्यता के लिए वैश्विक समर्थन का संकेत था।

UNSC सदस्यता क्यों मायने रखती है?

आजकल “संयुक्त राष्ट्र कहां जा रहा है” जैसी बातें सुनने को मिलती हैं। ताकतवर देशों के पास अपनी ताकत होती है, लेकिन कानूनी वैश्विक वैधता के लिए संयुक्त राष्ट्र जरूरी है। अमेरिका को भी ट्रंप की गाजा शांति पहल—बोर्ड ऑफ पीस—के लिए UNSC प्रस्ताव की जरूरत पड़ी।

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई देशों से कूटनीतिक संपर्क साधा। उनमें से ज्यादातर वे देश थे जो 2025 और 2026 में UNSC में थे, जब पाकिस्तान सदस्य था। अब तक पाकिस्तान अपनी सदस्यता का इस्तेमाल भारत पर दबाव डालने में नहीं कर पाया। दूसरी तरफ, पहलगाम आतंकी हमले की निंदा वाला UNSC प्रस्ताव भारत के लिए महत्वपूर्ण था।

Topics: UNSC अस्थायी सदस्यसंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समाचारभारत UNSC उम्मीदवारीUNSC 2028-29भारत ताजिकिस्तान UNSC
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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