संयुक्त राष्ट्र में भारत के साथ अमेरिका ने मिलकर जिन्ना के देश में पनाह पाए आतंकवादी संगठनों पर संयुक्त राष्ट्र से कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। ताजा जानकारी के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने भारत के साथ मिलकर पाकिस्तान से संचालित होने वाले प्रमुख आतंकी संगठनों, जैसे लश्करे तैयबा और जैशे मोहम्मद के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की है। यह अपील संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 1267 कमेटी सिस्टम के तहत की गई है, जो अल-कायदा और तालिबान से जुड़े आतंकवादियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए जाना जाता है।
अमेरिका और भारत ने संयुक्त रूप से इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा के सहयोगियों लश्करे-तैयबा (LeT) और जैशे-मोहम्मद (JeM) तथा उनके छद्म नामों से चल रहे तानेबाने पर नए प्रतिबंध लगाने की मांग की है। नि:संदेह यह कदम दक्षिण एशिया में बढ़ते आतंकवाद को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन संगठनों को पनाह देने की वजह से बदनाम पाकिस्तान की सरकार अब भी खुलेआम जिहादी संगठनों से संबंध बनाए हुए है।
आस्ट्रेलिया में कल हुए जिहादी हमले से उपजे आक्रोश के बीच यह अपील प्रस्तुत किया जाना मायने रखता है। साफ है कि इन संगठनों ने वैश्विक स्तर पर अपनी हरकतें तेज कर दी हैं। 1267 कमेटी सिस्टम यात्रा प्रतिबंध लगाने, संपत्ति जब्त करने और हथियार प्रतिबंध लगाने जैसे उपायों से आतंकवादियों पर चूल कसने का इंतजाम करता है। पिछले ट्रंप कार्यकाल के दौरान (2017-2021) अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवाद को पनाह देने वाला देश घोषित किया था और आर्थिक सहायता रोक दी थी। भारत ने तो हमेशा से इन संगठनों को पाकिस्तान प्रायोजित बताया है और उसके प्रमाण दिए हैं। भारत में 2008 का मुंबई हमला लश्करे तैयबा और 2019 में पुलवामा हमला जैशे मोहम्मद ने कराया था जिसके सारे सबूत सामने रखे गए थे।

क्या है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का 1267 सिस्टम
UNSC प्रस्ताव 1267 अल-कायदा, तालिबान और आईएस से जुड़े व्यक्तियों व संगठनों पर ध्यान केन्द्रित करता है। अमेरिका-भारत की अपील में लश्कर सरगना हाफिज सईद, जैश के सरगना मसूद अजहर और इस गुट के छद्म नाम से चल रहे गुट, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और आईएस खोरासान के नाम जोड़े गए हैं। बाद के दो जिहादी संगठन मुख्यत: अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर सक्रिय हैं और भारत, अमेरिका सहित पश्चिमी देशों पर निशाने साधते हैं।
भारत और अमेरिका की संयुक्त अपील के अनुसार, पाकिस्तान इन संगठनों पर अपने एजेंडा के तहत लगाम नहीं कस रहा। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने भी पाकिस्तान को कई साल ग्रे लिस्ट में रखा। ट्रंप प्रशासन ने 2018 में लश्कर और जैश पर लाखों डॉलर का इनाम घोषित किया था। इस प्रस्ताव के संबंध में भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह आतंकवाद के वैश्विक नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास है। संयुक्त राष्ट्र में संभव है चीन इस पर वीटो लगा दे क्यों कि वह पहले भी पाकिस्तानी जिहादी गुटों के संदर्भ में ऐसा कर चुका है।
जैसा पहले बताया, इस अपील का तात्कालिक संदर्भ आस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में बांडी बीच पर कल हुआ जिहादी हमला है। तीन पाकिस्तानी मूल के आतंकवादियों ने समुद्रतट पर यहूदी उत्सव मनाती भीड़ पर अंधाधुंध गोलीबारी करके कई लोगों की जान ले ली थी। अब तक करीब 15 लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।
आस्ट्रेलियाई पुलिस ने हमलावरों को जैश और आईएस—के के संयुक्त मोड्यूल से जुड़ा बताया है। एक संदिग्ध, 28 वर्षीय अब्दुल्लाह खान (पाकिस्तान के कराची का), ने सोशल मीडिया पर आईएस का झंडा लहराते वीडियो पोस्ट किया था। दूसरा, 22 वर्षीय फैसल अहमद, लश्कर के पूर्व कैडर के रूप में जाना जाता है। तीसरा जिहादी फरार बताया जा रहा है। आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने इसे आतंकवादी हमला घोषित कर राष्ट्रीय आपातकाल लगाया है। सिडनी में सुरक्षा बढ़ाई गई हे, 500 सैनिक तैनात किए गए हैं। एफबीआई ने पुष्टि की है कि हमलावर पाकिस्तान से ऑनलाइन नफरती सबक ले रहे थे।
यह घटना एक बार फिर विश्व पर मंडराते आतंकवाद के खतरे को उजागर करती है। अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार होता है तो इससे बेशक, पाकिस्तान पर दबाव बढ़ेगा। भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता में इसे प्राथमिकता दी गई है। क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) ने भी संयुक्त बयान जारी कर पाकिस्तान को चेतावनी दी है।

















