दिल्ली के लाल किला इलाके में नवंबर 2025 में हुए आतंकी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट सामने आई है। सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति की निगरानी टीम ने यह रिपोर्ट तैयार की है। इसमें अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS को इस हमले का जिम्मेदार बताया गया है।
रिपोर्ट 16 दिसंबर 2025 से 9 जून 2026 तक की गतिविधियों पर आधारित है और अगस्त 2026 में सुरक्षा परिषद के सामने रखी गई। इससे पहले फरवरी में आई संयुक्त राष्ट्र की पिछली रिपोर्ट में लाल किला धमाके को जैश-ए-मोहम्मद से जोड़ने वाली बात का जिक्र था। इस हमले में 11 लोगों की मौत हुई थी।
NIA की जांच और चार्जशीट
भारत में इस मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA कर रही है। NIA ने मई 2026 में 10 आरोपियों के खिलाफ करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी के मुताबिक सभी आरोपी अल-कायदा से जुड़े अंसार गजवत-उल-हिंद यानी AGuH के मॉड्यूल से जुड़े थे। NIA ने इसे AQIS से जुड़ा संगठन बताया है। जांच में पता चला कि आरोपी हमले की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने IED, रॉकेट आधारित विस्फोटक और ड्रोन से जुड़े प्रयोग भी किए थे।
AQIS के बदलते तरीके
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में AQIS के बदलते तौर-तरीकों पर भी बात की गई है। रिपोर्ट के अनुसार संगठन अब बड़े और आसानी से पहचाने जाने वाले समूहों के बजाय छोटे-छोटे सेल और बिखरे हुए नेटवर्क के जरिए काम कर रहा है। वह अपने लॉजिस्टिक और फंडिंग नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश में भी है। रिपोर्ट में बांग्लादेश में संभावित ऑपरेशनल सेल स्थापित करने की कोशिशों को लेकर चिंता जताई गई है। इससे भारत समेत दक्षिण एशिया में आतंकी नेटवर्क फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
AI का इस्तेमाल
रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का भी जिक्र है। इसमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और सीमा पार आतंकी गतिविधियों से जुड़े खतरे पर चिंता जताई गई है। AQIS की गतिविधियों और पाकिस्तान में सक्रिय दूसरे आतंकी नेटवर्क के बीच संबंधों पर निगरानी की जरूरत बताई गई है।
आतंकियों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चेतावनी दी गई है। लाल किला धमाके की जांच में सामने आया था कि आरोपी जसिर बिलाल वानी ने रॉकेट और विस्फोटक तैयार करने की जानकारी के लिए यूट्यूब और चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया था। NIA के मुताबिक वह AGuH के मॉड्यूल में तकनीकी भूमिका निभा रहा था।
संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी संगठनों की बदलती रणनीति के बीच प्रतिबंध व्यवस्था में हुए बदलावों का भी जिक्र किया है। 27 फरवरी 2026 को निगरानी समिति ने अल-नुसरा फ्रंट फॉर द पीपल ऑफ द लेवांत यानी अल-नुसरा फ्रंट को प्रतिबंध सूची से हटा दिया। इस संगठन को हयात तहरीर अल-शाम यानी HTS के नाम से भी जाना जाता है।
















