देश में एक अलग ही तरह की आतंकी पैठ बनाने में जुटी पाकिस्तानी आईएसआई के ‘डॉक्टर टेरर मॉड्यूल’ पर NIA ने अपनी चार्जशीट में बड़ा खुलासा किया है। इसमें कहा गया है कि यह अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGuH) नाम के आतंकी संगठन में बड़े बदलाव को दिखाता है। पहले यह जंगलों में सक्रिय था, अब शहरों में फैल रहा है। भारत में गजवा ए हिंद की सोच को फैलाना इन आतंकियों का मकसद था।
इस आतंकी मॉड्यूल की साजिश पाकिस्तान के हैंडलर्स ने रची थी। उन्होंने पुरानी तरीके की प्रोपागेंडा को छोड़कर पूरे भारत में तकनीकी आधार पर नेटवर्क बनाया है, जो कश्मीर की आतंकवादी गतिविधियों को वैश्विक जिहाद से जोड़ता है।
ज़ाकिर मूसा का दौर
ज़ाकिर मूसा, जिनका असली नाम ज़ाकिर राशिद भट था, हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी का करीबी था। वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव था। कश्मीरी युवाओं को आकर्षित करने के लिए उसने अल-कायदा की तारीफ में भाषण दिए। एक आतंकवाद विरोधी अधिकारी के मुताबिक, उसके समय में ‘आजादी’ की बात छोड़कर ‘शरीयत’ और शहादत पर जोर दिया गया है। उसकी सोच पैन-इस्लामिक थी — कश्मीर को वह राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि धार्मिक जिम्मेदारी मानता था।
उमर उन नबी भी था इसी सोच का नतीजा
दिल्ली बम ब्लास्ट से जुड़े उमर उन नबी भी इसी सोच के थे। एनआईए जांचकर्ताओं का कहना है कि मूसा जंगलों का चेहरा था, तो उमर शहरों और पढ़े-लिखे युवाओं को कट्टर बनाना था। उसने भी एक वीडियो जारी करके सुसाइड बॉम्बिंग को शहादत बताया था।
दोनों ही लोकतंत्र से नफरत करते थे और ‘ग़ज़वा-ए-हिंद’ की भविष्यवाणी में यकीन रखते थे। वे पारंपरिक कमांड स्ट्रक्चर को बायपास करके एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए युवाओं को भर्ती करते थे, जो आम आतंकी संगठनों की ‘धीमी’ कार्रवाई से तंग आ चुके थे।
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AQIS और पाकिस्तान का रोल
NIA की फाइंडिंग्स बताती हैं कि यह ‘स्वतंत्र’ ग्लोबल जिहादी लाइन उतनी आजाद नहीं थी। AGuH असल में अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) का कश्मीर एक्सटेंशन है, जो पाकिस्तान के डीप स्टेट से जुड़ा है। एक रिटायर्ड दिल्ली पुलिस अधिकारी के अनुसार, ISI लश्कर या जैश जैसी छवि से बचकर अल-कायदा स्टाइल को बढ़ावा देता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकार करने की गुंजाइश रहती है, साथ ही भारत के अंदरूनी इलाकों में रैडिकलाइजेशन होता है।
‘घर का भेदी वाली रणनीति’
इस रणनीति का अच्छा उदाहरण है सनाउल हक, जो उत्तर प्रदेश के संभल का रहने वाला था। ISI ने उसे असिम उमर बना दिया और AQIS का पहला चीफ बना दिया। यह मीरण शाह (पाकिस्तान के नॉर्थ वजीरिस्तान) में एक हाई-लेवल मीटिंग में तय हुआ था। एक विशेष अधिकारी ने बताया कि संभल के व्यक्ति को लीडर बनाकर ISI ने घर के भेदी को घरेलू चेहरा दे दिया, जबकि असल कंट्रोल बॉर्डर पार से ही था।
एनआईए की चार्जशीट में डॉक्टर उमर उन नबी (अब मृत) को मास्टरमाइंड बताया गया है, जो पहले फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। संगठन में कई अन्य डॉक्टर और लोग शामिल हैं। यह AGuH के जंगलों से शहरों की ओर शिफ्ट को साफ दिखाता है।

















