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रूस नॉर्दर्न सी रूट पर भारत और चीन के साथ सहयोग बढ़ाएगा, पुतिन ने किया बड़ा ऐलान

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि भारत और चीन नॉर्दर्न सी रूट पर सहयोग में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। जानें इस रूट के फायदे, चुनौतियां और आर्कटिक में बढ़ते तनाव के बारे में।

Published by
कुलदीप सिंह

रूस उत्तरी सागर कॉरिडोर बनाने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है। इसी क्रम में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि भारत उन खास देशों में शामिल है जो रूस के साथ नॉर्दर्न सी रूट पर सहयोग में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। पुतिन के मुताबिक, रूस को साझेदार देशों से इस रूट पर बढ़ती दिलचस्पी दिख रही है, जिनमें चीन और भारत भी हैं। उन्होंने साफ कहा कि सहयोग अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के दायरे में ही होगा।

पुतिन ने क्या कहा

पुतिन ने बताया कि रूस हमेशा से नॉर्दर्न सी रूट के फायदे इस्तेमाल करने के लिए तैयार रहा है और अब भी है। उन्होंने कहा, “हम देखते हैं कि इस मामले में हमारे साथ काम करने की इच्छा रखने वाले देशों की दिलचस्पी बढ़ रही है। इनमें सबसे पहले हमारे दोस्त चीन, भारत और कुछ अन्य देश शामिल हैं जो इस पर सक्रियता से बात कर रहे हैं।” ये बातें रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों और आर्कटिक में बढ़ती होड़ के बीच कही गईं। रूस इस रूट की व्यावसायिक संभावनाएं बढ़ाना चाहता है।

नॉर्दर्न सी रूट क्या है

यह रूट रूस के आर्कटिक तट के किनारे से होकर गुजरता है। यह आर्कटिक महासागर के रास्ते अटलांटिक और पैसिफिक महासागर को जोड़ता है। यूरोप और एशिया के बीच पारंपरिक स्वेज नहर वाले रास्ते की तुलना में यह काफी छोटा है। इससे यात्रा का समय करीब 10 से 14 दिन कम हो सकता है। आर्कटिक में बर्फ की परत लगातार घट रही है, इसलिए साल के ज्यादा दिनों तक जहाज चलने लगे हैं।

रूट की चुनौतियां

मौसम बहुत कठोर रहता है। बुनियादी ढांचा सीमित है। बर्फ तोड़ने वाले खास जहाजों की जरूरत पड़ती है। ये सब वजहें व्यापक व्यावसायिक इस्तेमाल में बाधा बनती हैं। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के विश्लेषण के मुताबिक रूस इसलिए साझेदार ढूंढ रहा है क्योंकि आर्कटिक तट पर पर्याप्त बंदरगाह और देश के औद्योगिक-व्यापारिक केंद्रों से जोड़ने वाली सुविधाएं कम हैं।

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भारत और चीन की भूमिका

भारत और चीन रूस की ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं। इसलिए ये दोनों इस रूट के विकास और संचालन में हिस्सा लेने की अच्छी स्थिति में हैं। ओआरएफ के अनुसार रूस भारत को शामिल करना चाहता है ताकि रूसी सुदूर पूर्व में चीन की बढ़ती आर्थिक मौजूदगी को संतुलित किया जा सके।

आर्कटिक में तनाव की बात

पुतिन ने आर्कटिक में “कृत्रिम तनाव” बढ़ने की चेतावनी भी दी। उन्होंने इसे व्यापक भू-राजनीतिक घटनाओं और नाटो के विस्तार से जोड़ा। उन्होंने दोहराया कि रूस अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मौजूदा समुद्री कानून के अंदर नॉर्दर्न सी रूट पर काम करने को तैयार है। इसी दौरान पुतिन ने एक और बात कही। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यूरोपीय देश रूसी व्यापारिक जहाजों को जब्त करते हैं तो रूस उसी तरह का जवाब देगा। उन्होंने ऐसे किसी कदम को “डकैती और डाकूगिरी” बताया। यह बात यूरोपीय संघ के रूस के तथाकथित शैडो फ्लीट को निशाना बनाने के प्रयासों के बीच कही गई।

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