कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों की संख्या बढ़ती जा रही है। कर्नाटक के अनेक लोगों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद वहां रह रहे घुसपैठियों में से कुछ बांग्लादेश चले गए, तो कुछ को कर्नाटक के विभिन्न शहरों में बसाया जा रहा है। घुसपैठियों के आका उन्हें कर्नाटक इसलिए ला रहे हैं कि वहां कांग्रेस की सरकार है और उन्हें पता है कि कांग्रेस की कोई भी सरकार घुसपैठियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं करती। यह भी कहा जा रहा है कि इन घुसपैठियों को कर्नाटक पुलिस के उन भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों का सहयोग भी मिल रहा है, जो पैसे लेकर इन्हें जगह-जगह बसने दे रहे हैं।
आश्चर्य तो यह है कि इन भ्रष्ट पुलिस-कर्मियों को घुसपैठिए आनलाइन पैसे दे रहे हैं। ऐसा ही एक घुसपैठिया है मोहम्मद बिलाल। कुछ ही दिन पहले बेंगलुरु के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मोहम्मद बिलाल को पकड़ा और उससे पूछा कि यहां कहां और कब से रह रहे हो! इस पर उसने जो बताया, वह बहुत ही चौंकाने वाला और चिंता पैदा करने वाला है। वह हर महीने कर्नाटक पुलिस को पैसे देकर बेंगलुरु में रह रहा है। वह माल ढुलाई के लिए एक छोटा ट्रक चलाता है। उसने बताया कि पुलिस को पैसे देकर वह ‘नो एंट्री’ के समय भी धड़ल्ले से गाड़ी भगाता रहता है।
मोहम्मद बिलाल की तरह अली अलीम, मोहम्मद कबीर जैसे अनेक घुसपैठिए हैं, जो बेंगलुरु में रहने के लिए पुलिस को पैसे देते हैं। यही कारण है कि इन घुसपैठियों की शिकायत मिलने के बाद भी पुलिस उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं करती है। उल्टे पुलिस उन लोगों को जेल भेज देती है, जो घुसपैठियों की जानकारी पुलिस-प्रशासन को देते हैं। इसके सबसे ज्वलंत उदाहरण हैं डॉ. नागेंद्रप्पा शिरूर, जो बेंगलुरु में डॉ. नागेंद्र के नाम से जाने जाते हैं।
पेशे से ये चिकित्सक हैं और अपना एक अस्पताल चलाते हैं। बात कुछ वर्ष पुरानी है। बेंगलुरु में आते-जाते उन्हें जब कुछ अधिक घुसपैठिए दिखने लगे तो वे चितिंत हुए। इसके बाद उन्होंने अपने कुछ कार्यकर्ताओं की मदद से बांग्लादेशी घुसपैठियों की जानकारी लेनी शुरू की और उनके बारे में पुलिस को बताने लगे। स्वाभाविक रूप से उनका यह काम बांग्लादेशी घुसपैठियों को तो बिल्कुल ठीक नहीं लगा और शायद कुछ भ्रष्ट पुलिस-कर्मियों को भी वे खटकने लगे।
इसका नतीजा यह हुआ कि डॉ. नागेंद्र पर कुछ घुसपैठियों ने मार-पीट का आरोप लगाकर पुलिस में उनकी शिकायत कर दी। आनन-फानन में पुलिस ने भी उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उन्हें एक दिन जेल में रहना पड़ा। जब इस मामले में उन्हें जमानत मिली, तो कुछ ही देर में एक दूसरा मामला पैदा कर दिया गया और पुलिस उन्हें फिर से गिरफ्तार करने के लिए भाग-दौड़ करने लगी। अंत में डॉ. नागेंद्र कर्नाटक उच्च न्यायालय पहुंचे और वहां उन्हें अग्रिम जमानत लेनी पड़ी।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने डॉ. नागेंद्र के विरुद्ध दर्ज 2 आपराधिक मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी जांच पर अंतरिम रोक लगा दी। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राज्य पुलिस और गृह विभाग के कामकाज पर सवाल उठाए। न्यायालय ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि घुसपैठियों को रोकने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, न कि ऐसे लोगों को संरक्षण देने पर। न्यायालय ने इस पूरे घटनाक्रम को पहली नजर में आपराधिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का मामला माना।
उच्च न्यायालय में डॉ. नागेंद्र के वकील गिरीश भारद्वाज ने बताया कि 22 जुलाई, 2026 को डॉ. नागेंद्र ने जांच अधिकारी को बांग्लादेशी घुसपैठियों की जानकारी दी थी। यह सूचना विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को भी भेजी गई, लेकिन इसके करीब 15 मिनट बाद ही घटनाक्रम पूरी तरह बदल गया। एक घुसपैठिए ने डॉ. नागेंद्र के विरुद्ध मारपीट की शिकायत दर्ज करा दी। इतना ही नहीं, उसी दिन बाद में डॉ. नागेंद्र की ओर से की गई दूसरी शिकायत के बाद भी दूसरे थाने में उनके विरुद्ध एक और आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया। उन्हें गिरफ्तार किया गया, न्यायिक हिरासत में भेजा गया और अगले ही दिन जमानत मिल गई।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने पूछा कि यदि कोई व्यक्ति घुसपैठियों की जानकारी देता है तो उसी घुसपैठिए की शिकायत के आधार पर उसके विरुद्ध मामला कैसे दर्ज किया जा सकता है!
न्यायालय ने कहा कि शिकायतकर्ता ने खुद अपनी शिकायत में बांग्लादेश का पता दर्ज किया है। ऐसे में पुलिस ने बिना प्रारंभिक जांच के एफआईआर कैसे दर्ज कर ली! बता दें कि डॉ. नागेंद्र के विरुद्ध नसरीना (शौहर मोहम्मद बिलाल) ने एफआईआर दर्ज कराई है। एफआईआर में उसके दो पते हैं एक बेंगलुरु का और दूसरा बांग्लादेश का। वह मूल रुप से गांव-राजापुर, पोस्ट-राजापुर, थाना-शरण कोल्ला रंधा, जिला-बोगुरा, बांग्लादेश की रहने वाली है। यानी वह खुद ही बता रही है कि वह बांग्लादेशी है। इसे देखते हुए ही उच्च न्यायालय ने कर्नाटक पुलिस और राज्य के गृह विभाग के कामकाज पर टिप्पणी की है।
खैर, इस प्रकरण ने यह बता दिया है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार खुल कर बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को बचा रही है। यही कारण है कि उन लोगों में गुस्सा है, जो मानते हैं कि भारत में रह रहा एक भी घुसपैठिया देश के लिए खतरा है। काश, यह समझ कांग्रेस को आती तो आज डॉ. नागेंद्र को वह जेल नहीं भेजती, बल्कि इस कार्य के लिए उनका सम्मान करती।

















