Explainer: पाकिस्तान का संसाधन-समृद्ध प्रांत बलोचिस्तान क्यों हो रहा रक्त रंजित?
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Explainer: पाकिस्तान का संसाधन-समृद्ध प्रांत बलोचिस्तान क्यों हो रहा रक्त रंजित?

"बलूचिस्तान में फिर खून बह रहा है। 5 जुलाई को 5 नागरिकों और 6 जुलाई को 27 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद ऑपरेशन शाबान शुरू। जानिए बलूच विद्रोह की 1947 वाली जड़ें, संसाधन शोषण, लापता लोग और पाकिस्तान की सख्त नीति की पूरी कहानी।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jul 20, 2026, 02:09 pm IST
inविश्व
Pakistan Balochistan violence

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत के खिलाफ नित नए षड्यंत्र रचने वाला पाकिस्तान अपनी ही लगाई आग में झुलस रहा है। उसका सबसे बड़ा प्रान्त बलूचिस्तान रक्तरंजित है। वहां हर दिन हिंसा हो रही है। बलूचिस्तान में हाल ही में दो हमले हुए। 5 जुलाई को हन्ना उरक में 5 आम नागरिक मारे गए और 6 जुलाई को जियारत में 27 पुलिसकर्मी मारे गए। इन हमलों के बाद पुलिसवालों के परिवार 10 दिन तक धरने पर बैठे रहे। उन्होंने शवों को दफनाने से इनकार कर दिया। आखिरकार सरकार ने न्यायिक आयोग बनाने का वादा किया, तो धरना खत्म हुआ।

इसी दौरान पाकिस्तानी अधिकारियों ने ऑपरेशन शाबान शुरू किया, जिसमें 5 जुलाई से अब तक 129 “आतंकवादियों” को मारने का दावा किया गया है। बलूचिस्तान में यह नया नहीं है — यहां लंबे समय से हिंसा, विद्रोह और राज्य की कार्रवाई चल रही है। पाकिस्तान भारत पर यहां मुश्किलें भड़काने का आरोप लगाता है।

बलूचिस्तान ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से लगा हुआ है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। फिर भी यहां संघर्ष क्यों जारी है? इसे पांच मुख्य बिंदुओं में समझते हैं।

1. विभाजन के समय की जड़ें

1947 में जब ब्रिटिश चले गए, तो रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का विकल्प था। बलूचिस्तान तब कई छोटी-छोटी आदिवासी रियासतों का इलाका था। ब्रिटिशों ने बलूच क्षेत्रों को मनमाने ढंग से बांटा था, कुछ हिस्से फारस (ईरान) को दे दिए। मुख्य रियासत कलात थी। इसके खान मीर अहमद यार खान स्वतंत्र रहना चाहते थे। लेकिन आसपास की दूसरी रियासतें पाकिस्तान में शामिल हो गईं। दबाव बढ़ा और पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी के बीच 27 मार्च 1948 को कलात पाकिस्तान में शामिल हो गया।

बलूच राष्ट्रवादियों के लिए यह एक बड़ी शिकायत बन गई। वे कहते हैं कि जबरन शामिल किया गया। पाकिस्तान इसे कानूनी और अंतिम मानता है।

इसके बाद पाकिस्तान के हर दशक में बलूचिस्तान में विद्रोह हुआ है। मौजूदा विद्रोह परवेज मुशर्रफ के समय शुरू हुआ माना जाता है — यह पांचवां विद्रोह है। 2005 में सुई गैस प्लांट पर एक बलूच डॉक्टर के साथ बलात्कार और 2006 में स्थानीय नेता अकबर बुग्टी की हत्या ने इसे भड़का दिया।

2. जातीय अंतर और संसाधनों पर विवाद

बलूच लोग जातीय रूप से अलग हैं। पाकिस्तान के सभी प्रांत (सिंध, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब) अलग पहचान रखते हैं और तीनों ने पंजाबी प्रभुत्व की शिकायत की है। बड़ी बात यह है कि बलूचिस्तान में तांबा, सोना, प्राकृतिक गैस आदि के बड़े भंडार हैं। लेकिन आबादी कम है और बलूच लोग आरोप लगाते हैं कि उनके प्रांत की दौलत का फायदा उन्हें नहीं मिलता।

यहां पाकिस्तान के बड़े प्रोजेक्ट्स हैं — ग्वादर पोर्ट (CPEC का मुख्य हिस्सा), चीन द्वारा चलाया जा रहा सैंदक तांबा-सोना खदान, और रेको डीक खदान (अमेरिका ने 1.3 बिलियन डॉलर निवेश की घोषणा की)। बलूच लोग कहते हैं कि उनकी जमीन का फायदा विदेशी जेबों में जा रहा है। अच्छी नौकरियां (इंजीनियर, मैनेजर) अक्सर पंजाब या सिंध के लोगों को मिल जाती हैं। चीनी प्रोजेक्ट्स और चीनी कामगार बलूच लड़ाकों के मुख्य निशाने रहे हैं।

जबकि, बलूचों के पीड़ा को दकिनार करते हुए पाकिस्तानी सरकार इसे खारिज करती है। सुरक्षा विशेषज्ञ अली चिश्ती कहते हैं कि लाखों बलूच राजनीति, अर्थव्यवस्था और सेना में हिस्सा ले रहे हैं। जबकि,बलूच लोग लगातार आजादी की मांग कर रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली में तनाव: परमीशन बिना कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का संसद मार्च, बैरिकेडिंग तोड़ी, पुलिस से भिड़े

3. बलूच लोगों की मांगें

सभी बलूच एक जैसी बात नहीं करते। कुछ स्वतंत्र बलूचिस्तान चाहते हैं और इसके लिए हिंसा का रास्ता अपनाते हैं। कई लोग पाकिस्तान के संवैधानिक ढांचे में रहकर ज्यादा स्वायत्तता और अपने इलाके के फैसलों में ज्यादा नियंत्रण चाहते हैं। समय के साथ असंतोष बदला है। मध्य वर्ग सक्रियतावाद, याचिकाएं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के जरिए आवाज उठाता है। लेकिन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसी हिंसक संगठन मजबूत हुए हैं। वे मुख्य रूप से राज्य और सेना से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाते हैं, लेकिन आम नागरिक भी मारे गए हैं।

अफगानिस्तान में NATO की लड़ाई के कारण लोगों के पास अच्छे हथियार और ट्रेनिंग है। 2021 में अमेरिका के जाने के बाद आधुनिक हथियार छूट गए। तालिबान के सत्ता में आने के बाद BLA और पाक तालिबान (TTP) के बीच सहयोग के संकेत मिले हैं।

4. बलूचिस्तान के ‘गायब’ लोग

एक बहुत संवेदनशील मुद्दा है लापता लोग। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने हजारों लोगों, करीब 5000 लोगों का अपहरण कर लिया, जिनमें से कई महीनों-वर्षों बाद मृत पाए गए। पिछले महीने लापता लोगों पर काम करने वाली प्रमुख कार्यकर्ता महरंग बलूच को उम्रकैद की सजा हुई।

5. राज्य की प्रतिक्रिया

पाकिस्तानी सरकार की प्रतिक्रिया आमतौर पर सख्त रही है — ऑपरेशन शाबान भी उसी सिलसिले की कड़ी है। पाकिस्तान में कुछ आवाजें कहती हैं कि अगर स्थानीय समर्थन वाला विद्रोह है तो सिर्फ ताकत से उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

Topics: बलूचिस्तानबलूच लिबरेशन आर्मीबलूच विद्रोहऑपरेशन शाबानपाकिस्तान बलूचिस्तान हिंसा
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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