अनुच्छेद 370 : एक संवैधानिक भूल? विशेष दर्जे की अनकही परतें
August 25, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

अनुच्छेद 370 : एक संवैधानिक भूल? विशेष दर्जे की अनकही परतें

अनुच्छेद 370 के कारण भारतीय संसद जो पूरे देश के लिए कानून बनाने का अधिकार रखती थी उसका अधिकार भी जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में सीमित था।

Written byअभय कुमारअभय कुमार
Aug 4, 2026, 11:30 pm IST
inभारत, जम्‍मू एवं कश्‍मीर

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 ने दशकों तक कश्मीर में जटिलताओं को जन्म दिया और राष्ट्रीय जीवन को भी प्रभावित किया। भारतीय मीडिया विशेषकर कांग्रेस शासनकाल के दौरान अनुच्छेद 370 को अक्सर इस रूप में प्रस्तुत करता था कि देश के अन्य नागरिक जम्मू-कश्मीर में भूमि नहीं खरीद सकते थे। अचल संपत्ति से जुड़ा हुआ मुद्दा के तौर पर प्रस्तुत किया जाता था।

इसके पीछे कई ऐसी व्यवस्थाएं थीं, जिन पर अपेक्षाकृत बहुत कम चर्चा होती थी। अनुच्छेद 370 के कारण भारतीय संसद जो पूरे देश के लिए कानून बनाने का अधिकार रखती थी उसका अधिकार भी जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में सीमित था। अनेक केंद्रीय कानूनों में अपवाद स्वरूप यह उल्लेख किया जाता था कि ये जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होंगे। इस प्रावधान के कारण भारत की कई प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं की शक्तियां भी जम्मू-कश्मीर में सीमित थीं। सर्वोच्च न्यायालय, चुनाव आयोग तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के अधिकार अन्य राज्यों की तुलना में अलग व्यवस्था के अधीन थे।

कई केंद्रीय कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होते थे

अनेक केंद्रीय कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होते थे। उदाहरण के लिए भारत के राज्य चिन्ह (अनुचित उपयोग निषेध) अधिनियम, 2005 तथा राष्ट्रीय प्रतीकों से संबंधित कई प्रावधान जम्मू-कश्मीर में उस प्रकार लागू नहीं थे जैसे देश के अन्य राज्यों में थे। इसी प्रकार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 भी स्वतः वहां लागू नहीं होते थे। अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से भिन्न संवैधानिक और विधिक व्यवस्था प्रदान किया था।

पत्थरबाजी के लिए मस्जिदों से होती थी घोषणा

जम्मू-कश्मीर और खासकर कश्मीर घाटी में मस्जिदों को राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया था। जुमे की नमाज के दौरान दिए जाने वाले खुतबे और भाषणों को लेकर अलग-अलग विचार और विवाद सामने आते थे। कई अवसरों पर कुछ मस्जिदों से लाउडस्पीकर की घोषणा से पत्थरबाज इकट्ठे होते थे और आतंकियों से मुठभेड़ करती हमारी सुरक्षा बलों पर पथराव करते थे।

अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को अपनी नागरिकता और स्थायी निवासी से जुड़े प्रावधान निर्धारित करने की विशेष स्वायत्तता प्राप्त थी। इसी व्यवस्था के अंतर्गत लागू अनुच्छेद 35A के कारण विभाजन के बाद पाकिस्तान से जान बचाकर भारत आकर जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में बसे लाखों हिंदू, सिख और बौद्ध समुदाय के लोगों को राज्य के स्थायी निवासी का दर्जा नहीं मिल सका था। इन लोगों को लोकसभा चुनाव में मतदान का अधिकार था, लेकिन जम्मू-कश्मीर विधानसभा, स्थानीय निकायों और पंचायत चुनावों में मतदान नहीं कर सकते थे। चुनाव लड़ने की सोचना भी उनके लिए अपराध जैसा था। स्थायी निवासी का दर्जा न होने के कारण वे राज्य सरकार की नौकरियों के पात्र नहीं थे। उनके बच्चों को सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश, सरकारी छात्रवृत्तियों तथा राज्य सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता था। इसके अतिरिक्त वे जम्मू-कश्मीर में भूमि, मकान, दुकान, खेत या बाग जैसी अचल संपत्ति भी नहीं खरीद सकते थे।

महिलाओं के साथ भेदभाव

अनुच्छेद 370 और उससे जुड़े प्रावधानों के तहत जम्मू-कश्मीर में महिलाओं के साथ काफी भेदभावपूर्ण व्यवस्था लागू थी। अनुच्छेद 370 और 35A के तहत यदि कोई स्थानीय महिला राज्य के बाहर के व्यक्ति से शादी करती थी तो उसे पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकार से जुड़े संकट का सामना करना पड़ता था। यदि जम्मू-कश्मीर की कोई महिला राज्य के बाहर विवाह कर लेती तो उसके बच्चों को उसकी पैतृक संपत्ति पर अधिकार नहीं मिलता था। बाद में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने इस संबंध में ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

सैकड़ों वाल्मीकि परिवार के साथ अन्याय

इसी प्रकार वर्ष 1958 में जम्मू-कश्मीर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण गंभीर संकट उत्पन्न हो गया। स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने पंजाब के गुरदासपुर और अमृतसर से कुछ वाल्मीकि परिवारों को यह कहकर बुलाया कि उनकी तत्काल आवश्यकता है वरना हालात और बिगड़ जाएंगे। पंजाब सरकार ने यह आशंका जताई कि जम्मू-कश्मीर के कठोर स्थायी निवासी (Permanent Resident) कानूनों के कारण ये परिवार अधिकारों से वंचित रह जाएंगे। इस पर जम्मू-कश्मीर सरकार ने आश्वासन दिया कि विशेष कार्यकारी आदेश (Special Executive Order) के माध्यम से उन्हें आवश्यक अधिकार प्रदान किए जाएंगे। इसके बाद सैकड़ों वाल्मीकि परिवार जम्मू-कश्मीर आकर बस गए और सफाई कर्मचारी के रूप में कार्य करने लगे। लेकिन जब उनके बच्चों ने शिक्षा प्राप्त करने के बाद अन्य सरकारी नौकरियों या व्यवसायों में जाने का प्रयास किया तो उन्हें बताया गया कि उनके परिवार को केवल सफाई कर्मचारी के रूप में कार्य करने के लिए ही राज्य में अधिकार दिए गए थे। यदि वे यह पेशा छोड़ते हैं, तो उनके अधिकार समाप्त हो सकते हैं। इस कारण वे पीढ़ियों तक उसी पेशे तक सीमित रहने को विवश रहे। अनुच्छेद 370 और उससे संबंधित व्यवस्थाओं के दौरान इस प्रकार का सामाजिक और जातिगत भेदभाव लंबे समय तक बना रहा।

अलग संविधान था

अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान था। इसमें अल्पसंख्यक’ शब्द का भी कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया था। अनुच्छेद 370 और उससे जुड़े प्रावधानों के विरोधियों का आरोप था कि राज्य में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर दोहरे मानदंड अपनाए गए। आलोचकों का यह भी कहना है कि कश्मीर घाटी में मुस्लिम आबादी 95 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद वहां मुस्लिम समुदाय को विभिन्न योजनाओं और संस्थानों में अल्पसंख्यक संबंधी लाभ दिए जाते रहे। दूसरी ओर कश्मीर घाटी में रहने वाले हिंदू, बौद्ध और सिख जो संख्या के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय थे उनको अल्पसंख्यक होने का कोई भी अधिकार नहीं मिलता था। इसी कारण यह व्यवस्था लंबे समय तक विवाद और राजनीतिक बहस का विषय रहा था। इससे राज्य में समानता और न्याय के सिद्धांत पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए।

1952 में जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा के चुनाव में कुल 75 सीटों में से 73 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता शेख अब्दुल्ला ने अपने अधिकांश राजनीतिक विरोधियों के नामांकन पत्र निरस्त करवा दिए जिसके कारण उनके समर्थक उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। उस समय देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी इस स्थिति को रोकने के लिए कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठता हैं ।

अनुच्छेद 35A को भारतीय संविधान में वर्ष 1954 में राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से जोड़ा गया था। इसे संसद में एक नए विधेयक के रूप में पेश नहीं किया गया था, बल्कि संविधान (जम्मू और कश्मीर पर लागू) आदेश, 1954 के तहत लागू किया गया था। इसे संविधान के अनुच्छेद 370(1) से मिली शक्ति के आधार पर जोड़ा गया था। इन प्रावधान का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन विशेष व्यवस्था और उसकी जनसांख्यिकीय संरचना को बनाए रखना था।

 

Topics: जम्मू-कश्मीरअनुच्छेद 370भारत का संविधानअनुच्छेद 370 हटाया गयाक्या था अनुच्छेद 370
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

एनआईए (प्रतीकात्मक चित्र)

NIA ने जम्मू-कश्मीर में 10 ठिकानों पर मारा छापा, स्थानीय नेटवर्क और आतंकी साजिश के गठजोड़ की जांच तेज

Explainer: सर्जियो गोर के जम्मू कश्मीर को लेकर बयान से क्यों बिलबिला उठा पाकिस्तान?

प्रतीकात्मक तस्वीर

पुंछ के मेंढर सेक्टर में बारूदी सुरंग विस्फोट, सेना के दो जवान घायल

अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में आया बड़ा बदलाव (फोटो सांकेतिक है और एआई द्वारा निर्मित)

5 अगस्त 2019 का ऐतिहासिक फैसला: अनुच्छेद 370 हटने से बदला जम्मू-कश्मीर और भारतीय राजनीति का नक्शा

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 35ए को निरस्त करने के बाद आया बदलाव

पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्थानीय लोग

छूटती पकड़, टूटती अकड़

Load More

ताज़ा समाचार

कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब की अनुमति नहीं, इलाहाबाद हाईकाेर्ट ने खारिज की छात्रा की याचिका

ध्रुव जुरेल

IND vs SL : ध्रुव जुरेल का धमाकेदार शतक, बाजुओं पर ‘जय जवान-जय किसान’, कारगिल हीरो पिता का बढ़ाया मान

Odisha Weather: बारिश-बाढ़ की स्थिति पर सरकार की कड़ी नजर, प्रशासन 24 घंटे सतर्क

तस्करों के पास से बरामद हेरोइन और पिस्तौल

पंजाब पर विदेशी तस्करों की नजर: अमृतसर में 6 किलो हेरोइन और तुर्की की पिस्तौल बरामद, पांच गिरफ्तार

सुकमा में नक्सली डम्प से 23 हथियार, 492 जिंदा राउंड और 240 जिलेटिन स्टिक बरामद

उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सोमवार को समीक्षा बैठक की

उत्तराखंड में SIR : लापरवाह अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी, उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने की समीक्षा बैठक

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर इस बार नहीं रहेगा भद्रा का साया, 28 अगस्त को ही बांधी जाएगी राखी

CM धामी ने कहा- 500 वर्षों से अधिक पुरानी हिलजात्रा पिथौरागढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान

रोपवे परियोजनाओं के संबंध में समीक्षा बैठक करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

रोपवे परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर मुख्यमंत्री ने जताई नाराजगी, राज्य स्थापना दिवस तक दी समय-सीमा

Pushkar Singh Dhami

जौनसार-बावर के लगभग 700 बीघा जनजातीय भूमि प्रकरण पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा- मामला गंभीर, शीघ्र होगी कार्रवाई

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies