9 सितंबर 2011, की तिथि सहज ही भूले जाने वाली तिथि नहीं है। इसने पहली बार पश्चिम को दिखाया था कि आतंक का चेहरा क्या होता है? और इस आतंकी हमले में एक दो या सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों लोग मारे गए थे। 3000 के लगभग विभिन्न देशों के लोग इस हमले का शिकार हुए थे, मगर क्या आज इतने वर्षों बाद इसकी बरसी पर मुस्लिम विक्टिमहुड का राग छेड़ा जा सकता है? वह भी तब जब मारे गए हजारों लोगों के घरवाले उस शोक को अनुभव कर रहे थे?
मगर ऐसा हुआ है और यह किया है न्यूयॉर्क के चुने गए मेयर जोहरान मामदानी ने! सोशल मीडिया के अनुसार जोहरान मामदानी को बुलाए जाने पर वैसे तो पीड़ित लोगों के परिजन तैयार नहीं थे, परंतु न्यूयॉर्क के मेयर होने के नाते जोहरान का वहाँ रहना और भाषण एक आधिकारिक औपचारिकता भी हो सकती थी।
जोहरान मामदानी के कई असंवेदनशील वीडियोज़ भी सामने आए हैं। एक वीडियो सामने निकलकर आया है, जिसमें जोहरान इस आतंकी हमले में मारे गए लोगों के नाम पढे जाने के समय हँसते हुए दिखाई दे रहे हैं।
एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें उनका यह कहना है कि उनकी चाची को 9/11 के हमले के बाद नकाब पहनकर सबवे में जाना सेफ फ़ील नहीं होता था।
हालांकि यह वीडियो उनका पुराना है और उस समय का है जब वे मेयर के प्रत्याशी के रूप में खड़े थे। उन्होनें साल 2025 में यह कहा था। और 9/11 की बरसी पर उनका यह बयान एक बार फिर से वायरल है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या उन्होनें इस हमले के जिम्मेदार लोगों को उनकी कट्टरपंथी सोच को लेकर कोसा या फिर उन्होनें केवल यही महसूस किया कि 9/11 के हमले के बाद आखिर मुसलमानों को कैसा अनुभव हुआ था?
क्या यह पीड़ितों को नजरअंदाज करना नहीं है? क्या यह पीड़ितों की परिभाषा को बदल देना नहीं है? ऐसे कई प्रश्न जोहरान मामदानी के उस वीडियो से लगातार उत्पन्न होते हैं।
9 सितंबर 2011 को हुए आतंकी हमले की बरसी पर जोहरान मामदानी ने जो वीडियो जारी किया है, उसमें आतंकी हमले का उल्लेख किया है, परंतु वह आतंकी हमला किसने कराया था और वह किस मानसिकता के लोग थे, यह सब मामदानी ने नहीं कहा है।
मामदानी की तरफ से जारी वीडियो में कहा गया है कि 9 सितंबर 2011 को हुए आतंकी हमले को कोई भी भूल नहीं सकता है। उसमें 2753 न्यूयॉर्क वासी मारे गए थे और उसके बाद हजारों मौतें उस जहरीली हवा के कारण हुई थीं, जो उसका मलबा हटाने के कारण हुई थीं।
मगर जोहरान मामदानी इन मौतों को लेकर यह कहने से परहेज कर रहे हैं कि आखिर उन लोगों के नाम क्या थे, जिन्होनें यह जघन्य अपराध किया था?
अगर विक्टिमहुड मजहब के नाम पर तो आतंकियों के नाम लेने में शर्म कैसी?
यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि अगर जोहरान मामदानी अपने चुनाव अभियान में यह कह रहे हैं कि 9/11 के हमले के बाद विक्टिमहुड स्थापित कर सकते हैं तो फिर ऐसा क्या कारण है कि आखिर वे हमलावरों का नाम ही नहीं ले सकते हैं? मामदानी ने एक नहीं दर्जनों बार अपने अकाउंट में, अपने भाषणों में और अपने बयानों में 9/11 का उल्लेख किया है, परंतु एक बार भी मामदानी ने अलकायदा, बिन लादेन का उल्लेख नहीं किया है। न ही उन्होनें उस नफरत का उल्लेख किया है, जिस नफरत के चलते 9/11 का हमला किया गया था।
लोगों का प्रश्न है मामदानी से कि आखिर वे अलकायदा और बिन लादेन का नाम लेने से हिचकते क्यों हैं? कहते भी है कि आधा सच बहुत खतरनाक होता है क्योंकि उस आधे सच पर पैदा विक्टिमहुड दूसरे के अस्तित्व को स्वीकार करने से भी हिचकने लगता है।
सोशल मीडिया पर लोगों के प्रश्न वायरल
सोशल मीडिया पर लोग मामदानी के इस सिलेक्टिव दृष्टिकोण पर प्रश्न उठा रहे हैं। पत्रकार लौरा लूमर ने मामदानी के पोस्ट को दोबारा पोस्ट करते हुए लिखा कि जाहीर है कि न्यूयॉर्क का जेहादी मेयर यह बताना भूल गया कि आखिर वे किस प्रकार के आतंकवादी थे, जिन्होनें 9/11 को लगभग 3000 लोगों को मार डाल था।
Of course the jihadist Mayor of New York City refuses to say what type of terrorists killed nearly 3,000 people on 9/11.
Islamic terrorists.
I hope everyone is paying attention to how history is being erased before our eyes by feckless politicians and Muslims who want to… https://t.co/FH6jrwWApl
— Laura Loomer (@LauraLoomer) September 11, 2026
क्या यह इतिहास मिटाने जैसा है?
क्या आधा सच बताना या फिर आधे सच को छिपा ले जाना, इतिहास को मिटा देता है? यह भी अपने आप में महत्वपूर्ण है। लौरा ने लिखा कि मुझे आशा है कि हर कोई इस बात पर ध्यान देगा कि आखिर कैसे इतिहास को हमारी ही आँखों के सामने इन राजनेताओं और मुसलमानों द्वारा मिटाया जा रहा है, जो 9/11 पर हुए हर गलत काम के लिए मुसलमानों को माफ करना चाहते हैं। हमें इस तरह नहीं जीना है।
पत्रकार Katie Pavlich ने भी एक्स पर पोस्ट में लिखा कि बात को घुमाफिरा कर कहने वाले इस व्यक्ति ने यह नहीं बताया है कि कौन इस्लामिक आतंकवादी थे और वे किस पर यकीन करते थे। लोग प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर जो लोग मारे गए, वे किस मारे गए थे?
जाहिर है कि यह सब मामदानी के लिए सहज नहीं है कि वह उन लोगों के नाम ले सकें, जिन्होनें यह हमला किया था, परंतु यह तो न्याय नहीं है। जब अपने चुनावी अभियान में जोहरान यह कह सकते हैं कि 9/11 के बाद उनकी चाची को खतरा महसूस होने लगा था, तो फिर इस अधूरे सच को पूरा क्यों नहीं कहते कि जो 3000 लोग मारे गए थे और उसके बाद हजारों लोग जो जहरीली हवा से मारे गए, आखिर उन्हें मारने वालों के नाम क्या थे? अलकायदा तो आतंकी संगठन है, और एक आतंकी संगठन का नाम लेने में इतनी हिचक क्यों है?













