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‘आग को और भड़का रहे थे CJP के आयोजक’ : 20 जुलाई हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने वाली याचिका पर SC तुरंत सुनवाई को तैयार

यह याचिका सेवानिवृत्त वायु सेना अधिकारी ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विरोध प्रदर्शन पर सरकार के उदार रवैया अपनाने के बाद भी सीजेपी के आयोजकों ने भड़काऊ बयान देना जारी रखा।

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सुनीता मिश्रा

सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के खिलाफ ‘संसद चलो’ अभियान के दौरान हुई हिंसा में आयोजकों की जवाबदेही तय करने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई की सहमति दे दी है। यह याचिका सेवानिवृत्त वायु सेना अधिकारी ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विरोध प्रदर्शन पर सरकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आयोजकों ने भड़काऊ बयान देना जारी रखा। ये आग बुझाने के बजाय उसे और हवा दे रहे थे। याचिका में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग राज्य सरकारें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उन्हें वापस लेने को लेकर अलग-अलग फैसले ले रही हैं। इसी वजह से याचिकाकर्ता ने देशभर में एफआईआर पर एक समान नीति बनाने की मांग की है।

याचिकाकर्ता के वकील रिजवान अहमद ने सोमवार (3 अगस्त) को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की बेंच के समक्ष आयोजकों का भूमिका का जिक्र करते हुए कहा, “आयोजक सरकार का लगातार उदार रवैया देखने के बावजूद 20 जुलाई से आग को बुझाने के बजाय उसे भड़का रहे थे। आयोजकों ने लगातार गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए। इसके लिए उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।” अधिवक्ता ने याचिका के बारे में सीजेआई से तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की।

देश में समान राष्ट्रीय नीति की मांग

याचिका में विरोध-प्रदर्शन के बाद हुई गिरफ्तारियों और एफआईआर से जुड़ी एक जैसी राष्ट्रीय नीति की मांग की गई है। वकील के अनुसार, अलग-अलग राज्यों ने एफआईआर वापस लेने के बारे में अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए हैं। एफआईआर वापस लेने के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाने से जनता में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हुई है। वकील ने दलील दी कि इस विरोध-प्रदर्शन का असर पूरे देश पर पड़ा है। इसलिए यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है। यहां एक समान नीति अपनाने की जरूरत है, ताकि देश के शांतिप्रिय नागरिकों के मन में इससे असंतोष की स्थिति पैदा न हो। सुप्रीम कोर्ट को स्वयं इस मामले पर फैसला करना चाहिए।

नाबालिगों को कम्युनिटी सर्विस कराने का आदेश दिया जाए

याचिका में अलग से उन नाबालिगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का मुद्दा उठाया गया है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में आपत्तिजनक शब्द कहे, गाली-गलौज की और अपमानजनक कंटेंट पोस्ट किया था। वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कहा कि युवाओं की तरफ से सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और गाली-गलौज वाली पोस्ट डाली जा रही हैं, जिन्हें रोका जाना चाहिए। इस तरह के व्यवहार में सुधार की जरूरत है, लेकिन आपराधिक मुकदमों से फायदे से ज्यादा नुकसान होगा। समाज में और कड़वाहट बढ़ेगी। उन्होंने कोर्ट से आगे कहा कि इन नाबालिगों को एफआईआर का सामना करने के बजाय कम से कम सात दिन की कम्युनिटी सर्विस (समाज या स्थानीय लोगों की भलाई के लिए बिना किसी वेतन के किया जाने वाला कार्य) कराने का आदेश दिया जाए। शीर्ष न्यायालय अब इस मामले पर बुधवार (5 अगस्त) को सुनवाई करेगा।

विपक्ष पर राजनीतिक हित साधने का आरोप

बता दें कि नीट परीक्षा लीक को लेकर जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हुए प्रदर्शनों के दौरान कई पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मियों पर पथराव करते और उन्हें दौड़ाकर मारते हुए देखा गया। सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो वायरल हुए हैं। सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वे इस आंदोलन का उपयोग अपने राजनीतिक हित के लिए कर रहा है। प्रदर्शनकारियों की सभी मांगे मानने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दिपके और उनके समर्थक भड़काऊ बयान दे रहे हैं। उनके कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें वे मांगे पूरी होने के बाद भी सत्ता पक्ष के खिलाफ जहर उगलते दिखाई दे रहे हैं।

 

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