
इस श्लोक का भाव यह दर्शाता है कि भारत की भूमि केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक दिव्य कर्मभूमि है, जहाँ जन्म लेने की अभिलाषा स्वयं देवगण भी करते हैं।
आज का श्लोक :
भावार्थ :
(देवता लोग भी भारत में जन्म लेने के लिए तरसते हैं) कि कब वह पुण्य दिन प्राप्त होगा, जब भारतभूमि पर जन्म का सौभाग्य मिलेगा और परम पद प्राप्त हो सकेगा।
आज के लिए प्रासंगिक :
यह श्लोक प्राचीन काल की भावना को दर्शाता है, लेकिन आज के दौर में यह हमें तीन मुख्य बातें याद दिलाता है.