केवल महान इतिहास किसी राष्ट्र को वैश्विक स्तर पर सशक्त नहीं बनाता है। इसके लिए संगठन का बल होना जरूरी है। राष्ट्र के निवासी एकजुट रहें । जातिगत और सामाजिक भेदभाव न हो।
आज का श्लोक :
जन्मस्थानं महर्षीणां तपः स्थानं चोगिनाम्।
न जगद् वन्द्यतां राष्ट्रं भवेत् संघबलं विना।।
भावार्थ :
चाहे महर्षियों की जन्मभूमि हो, चाहे योगियों की तपोभूमि हो, किन्तु जिस राष्ट्र के निवासियों में संगठन का बल नहीं होता, वह संसार के लिए वन्दनीय नहीं हो सकता।
आज के लिए प्रासंगिक :
- चाहे कितने भी महान विचारकों, वैज्ञानिकों या योगियों की भूमि हो, अगर समाज में आपसी फूट, जातिगत या सामाजिक मतभेद हैं, तो वैश्विक स्तर पर सशक्त नहीं बन सकते।
- संगठन में ही शक्ति है : किसी भी देश की वास्तविक ताकत उसके नागरिकों की एकजुटता और ‘राष्ट्र-प्रथम’ की भावना में निहित होती है।
- आधुनिक दुनिया केवल इतिहास का आदर नहीं करती, बल्कि वह वर्तमान के अनुशासन, आर्थिक मजबूती और नागरिकों के आंतरिक संगठन का सम्मान करती है।

















