आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस दुनियाभर में तेजी से अपने पांव पसार रहा है। ऐसा ही हाल भारत में भी है। यहां एक रिपोर्ट में ये सामने आया है कि AI के प्रति देश के नौकरीपेशा लोगों का बहुत ही सकारात्मक रवैया है। करीब 10 में से 9 भारतीय प्रोफेशनल्स (यानी 89%) का कहना है कि AI उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ाता है। खास बात ये है कि ये आंकड़ा ग्लोबल औसत से बहुत ज्यादा है, जहां सिर्फ 62% लोग ऐसा मानते हैं।
इकोनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ये सर्वे Randstad Workmonitor 2026 India ने किया है। इस सर्वे में 35 देशों के 27,000 वर्कर्स और 1,225 नौकरी प्रदाताओं से बात की गई। इसमें ये सामने आया है कि भारत में तो खास तौर पर लोग AI को लेकर बहुत उत्साहित दिख रहे हैं।
AI को लेकर क्या कहते हैं लोग और कंपनियां?
भारतीय पेशेवरों में 89% लोग मानते हैं कि AI से उनका काम बेहतर और तेज होता है। वहीं, भारतीय नौकरी प्रतादाताओं में भी 60% लोग यही कहते हैं कि AI प्रोडक्टिविटी बढ़ाती है। मतलब, यहां के लोग और कंपनियां दोनों AI को एक अच्छा टूल मान रहे हैं जो काम को आसान बनाता है।
कार्यस्थल में भरोसा और विश्वास बढ़ा
रिपोर्ट में एक अच्छी बात ये भी निकलकर आई कि भारतीय कार्यबलों में भरोसा काफी ज्यादा है। 89% पेशेवर अपनी कंपनी की लीडरशिप पर भरोसा करते हैं। वहीं विश्व की बात करें तो यह केवल 72% ही है। साथ ही, 88% लोग अपने साथी कर्मचारियों पर भरोसा जताते हैं। विश्वस्तर पर ये भरोसा 76% ही है। रिपोर्ट का मानना है कि उच्च भरोसे का ये स्तर क्वालिटी और टीमवर्क को बेहतर बनाता है।
हाइब्रिड और रिमोट वर्क की चुनौतियां
हालांकि, 85% भारतीय नौकरी प्रदाता इस बात को भी मानते हैं कि हाइब्रिड या रिमोट वर्क से टीम में आपसी सहयोग काफी मुश्किल होता है। विश्व स्तर पर ये समझ 81% फीसदी है। यानी ऑफिस से दूर रहने पर लोग एक-दूसरे से जुड़ने और साथ मिलकर काम करने में दिक्कत महसूस करते हैं।
आर्थिक दबाव और साइड जॉब का चलन
रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण पॉइंट ये है कि महंगाई और लिविंग कॉस्ट बढ़ने से 58% भारतीय पेशेवर दूसरी नौकरी को तरजीह दे रहे हैं। ग्लोबल औसत यह सिर्फ 40% है। लोग अपनी जिंदगी चलाने के लिए अतिरिक्त कमाई के रास्ते तलाश रहे हैं।

















