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होम धर्म-संस्कृति

राष्ट्रीय एकता का सूत्र है यह श्लोक, जो भारतभूमि को एक चेतना में बांधता है

सुभाषितम् में पढ़ें आज का श्लोक

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jul 22, 2026, 06:00 am IST
inधर्म-संस्कृति

आज का श्लोक भारत की भौगोलिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सीमाओं को जोड़ते हुए ‘हिंदू’ की एक राष्ट्रपरक परिभाषा प्रस्तुत करता है।

श्लोक

आसिन्धोः सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारतभूमिका।
पितृभूः पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरिति स्मृतः॥

भावार्थ-

सिन्धु (सिन्धु नदी) से सिन्धु (दक्षिण में हिन्द महासागर) तक इस विस्तृत भारत-भूमि को, जो पितृभूमि और पुण्यभूमि स्वीकार करता है, वही ‘हिन्दू’ के नाम से जाना जाता है।

प्रासंगिकता
आज के दौर में यह श्लोक राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव और अपनी मातृभूमि के प्रति नागरिक कर्तव्यों व साझा विरासत का बोध कराने के लिए बेहद प्रासंगिक है।

 

Topics: प्रगतिशील जीवनसांस्कृतिक एकताअखंड भारतसिंधु नदीपाञ्चजन्य विशेषपुण्यभूमिराष्ट्रीय भावनाआज का श्लोकभौगोलिक राष्ट्रवादपितृभूमिहिमालयसनातन जीवनहिंद महासागर
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