ऑस्ट्रेलिया से एक बहुत ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक पाकिस्तानी महिला की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी और गाड़ी चलाने वाले की जेल की सजा निलंबित कर दी गई।
ऑस्ट्रेलिया में एक बीस वर्षीय युवक एशटोन फ्रेंड ने एक अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी सामिया मलिक को अपनी गाड़ी से उड़ा दिया था। जो शायद सड़क पर नमाज पढ़ रही थी। क्योंकि मलिक के हाथ ऐसे ही दिख रहे थे, कि वह नमाज पढ़ रही हो।
क्या है पूरा मामला ?
6 मई 2025 की रात 11 बजे पाकिस्तान मूल की साइमा मलिक सड़क पर घुटने के बल बैठी हुई थीं। अब वे नमाज पढ़ रही थीं या क्या कर रही थीं, यह स्पष्ट नहीं है। सीसीटीवी से पता चला कि वे लगभग चार मिनट तक उसी स्थिति में थीं। उस समय एशटोन फ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड के घर से लौट रहे थे। फ्रेंड की गाड़ी मलिक से टकराई, मगर फ्रेंड को यह पता नहीं चला कि गाड़ी किससे टकराई है। फ्रेंड गाड़ी ड्राइव करते रहे, क्योंकि उन्हें लगा कि उन्होंने किसी कंगारू को टक्कर मारी है।
हालांकि, फ्रेंड को लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण और मृत्यु के बाद दुर्घटना स्थल से भाग जाने के कारण एक साल, तीन महीने और 29 दिनों की जेल की सजा सुनाई गई थी और उसमें आठ महीने तक पेरॉल भी नहीं थी। मगर चूंकि फ्रेंड को अपनी गलती पर अफसोस था और उसने न्यायालय में भी खेद प्रकट किया, तो अच्छे आचरण के वादे, उसकी कम आयु, और अच्छे भविष्य को देखते हुए उसकी सजा को 500$ के बॉन्ड को भरवाने के बाद निलंबित कर दिया।
मगर सोशल मीडिया पर लोग यह प्रश्न कर रहे हैं कि रात को 11 बजे बीच सड़क पर इस तरह से क्या कोई लड़की बैठ सकती है? और लोग इस बात पर भी प्रश्न कर रहे हैं कि इस लड़की की अपनी गलती के कारण कोई युवक दस साल तक गाड़ी नहीं चला पाएगा? यह कैसा न्याय है?
एक यूजर ने एक्स पर लिखा कि उसने वास्तव में ही किसी पशु को मारा होगा क्योंकि इंसान बीच सड़क पर प्रार्थना नहीं करते हैं।
यही प्रश्न सोशल मीडिया पर चल रहा है कि आखिर बीच सड़क पर नमाज क्यों पढ़ना है? और आखिर ये लोग इतने ब्रेनवाश कैसे हो जाते हैं?
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मूल प्रश्न से दूर femicide और अल्पसंख्यक जैसे विमर्श
मगर वहीं सोशल मीडिया पर इसे इस तरह से भी पेश किया जा रहा है कि जैसे सामिया को जानबूझकर मारा गया। इसे सड़क पर लापरवाही वाली ड्राइविंग घोषित किया जा रहा है। पाकिस्तान से चलने वाले न्यूज पोर्टल bedaridigital.com.pk ने इस विषय में लिखा कि सामिया मलिक की मृत्यु यह बताती है कि कैसे एक सड़क दुर्घटना जीवन को बदल सकती है, जबकि कोर्ट का निर्णय यह बताता है कि लापरवाही पूर्वक गाड़ी चलाने और दुर्घटना स्थल से भाग जाने का क्या परिणाम होता है।
मगर इस प्रश्न पर इसमें भी बात नहीं की गई है कि आखिर वह रात को 11 बजे बीच सड़क पर और वह भी अंधेरी सड़क पर नमाज क्यों पढ़ रही थी?
महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली शेरेलमूडी ने शुरू की फंड रेजिंग
वहीं ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं के अधिकारों पर काम करने वाली ShereleMoody ने इसे femicide से जोड़ा। और बहुत ही भावनात्मक रूप से पोस्ट लिखा कि एक लड़की अपने बेहतर भविष्य के लिए अपना मुल्क छोड़कर आती है और जिसे विश्वास होता है कि वह सुरक्षित रहेगी, मगर उसे बीच सड़क पर मार दिया जाता है और फिर वह रुकता भी नहीं है।
कायरों की तरह उसे मारने वाला भाग जाता है। उसके बाद उसने लिखा कि 1 जनवरी 2024 से अभी तक 130 महिलाओं की मौत इसी प्रकार हो चुकी है। और उसने यह भी लिखा कि सामिया के घर वाले पाकिस्तान में है, जो ऑस्ट्रेलिया नहीं आ सकते और उन्हें पैसे चाहिए, तो उसने फंड रेज़र का लिंक भेजा था।
उसने लिखा कि सामिया के भाई के अनुसार वह पढ़ने में होशियार थी और उसके पास कोई भी वर्ककवर नहीं था, न ही कोई बीमा और रक्षा के लिए कुछ नहीं। एक बहुत ही भावनात्मक पोस्ट है, परंतु इस प्रश्न का उत्तर उसके पास भी नहीं है कि रात को 11 बजे बीच सड़क पर वह नमाज क्यों पढ़ रही थी?
उसकी पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा कि उसने काले कपड़े पहने हुए थे और उसके बाद वह काली सड़क पर थी और फिर अंधेरा था, तो वह बीच सड़क पर बुर्के में नमाज क्यों पढ़ रही थी?
यह प्रश्न अनुत्तरित है कि बीच सड़क पर नमाज पढ़ने की प्रवृत्ति भारत से लेकर यूरोप के देशों में क्यों बढ़ रही है, जबकि यदि खुले में नमाज पढ़नी है, तो सड़क के किनारे भी पढ़ी जा सकती है। सड़क के बीच में नमाज पढ़ने के कई वीडियो समय समय पर आते रहते हैं, परंतु रात को 11 बजे और वह भी बुर्के में शायद नमाज पढ़ने का पहला ही चित्र आया होगा!
इस पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा कि बिना किसी लिंग आधारित हिंसा के सबूत के क्या दुर्घटना को femicide कहना उचित है?
या फिर यह इस प्रश्न से ध्यान भटकाने की चाल है कि रात को 11 बजे बीच सड़क पर नमाज क्यों पढ़ी जा रही थी?












