नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य एवं गरिमापूर्ण कार्यक्रम में विशेष पुस्तक “आरएसएस @100: एक सदी संकल्प की” का आधिकारिक विमोचन किया.
इस महत्वपूर्ण पुस्तक को वरिष्ठ भाजपा नेता श्याम जाजू और वरिष्ठ पत्रकार अनुपम त्रिवेदी ने संयुक्त रूप से लिखा है, जिसका प्रकाशन प्रभात प्रकाशन द्वारा किया गया है.
विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर प्रकाशित इस पुस्तक के लोकार्पण का हिस्सा बनना उनके लिए एक अत्यंत व्यक्तिगत सम्मान की बात है.
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि संघ के साथ उनका जुड़ाव बहुत पुराना और गहरा रहा है.
पवित्र गंगा नदी की तरह निस्वार्थ बहता है संघ: उपराष्ट्रपति
अपने उद्बोधन के दौरान उपराष्ट्रपति ने संघ के सेवा भाव को रेखांकित करने के लिए एक प्रसिद्ध तमिल कविता का विशेष रूप से उल्लेख किया.
उन्होंने कहा-
“यह तमिल कविता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना पवित्र और पावन गंगा नदी से करती है। जिस प्रकार गंगा बिना किसी भेदभाव और निःस्वार्थ भाव से दूसरों के कल्याण के लिए निरंतर बहती है, ठीक उसी प्रकार संघ का निस्वार्थ सेवा भाव है। इसी निस्वार्थ भाव और सेवा के संकल्प ने संगठन को उसकी एक सदी (100 वर्ष) की लंबी यात्रा में हमेशा सही मार्ग दिखाया है।”
उन्होंने पुस्तक के मूल शीर्षक की सराहना करते हुए कहा कि संघ की यह 100 वर्षों की यात्रा वास्तव में भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक जड़ों, समृद्ध विरासत और महान परंपराओं को पुनर्जीवित करने, सुदृढ़ करने और राष्ट्र के पुनर्निर्माण की यात्रा रही है. इन महान आदर्शों ने स्वयंसेवकों की कई पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया है.

शाखा क्या है? “यह है आत्मा की कार्यशाला”
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने स्वयंसेवकों के निर्माण की प्रक्रिया को समझाते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ‘शाखा’ को “आत्मा की कार्यशाला” के रूप में परिभाषित किया. उन्होंने कहा कि यह वह स्थान है जहाँ युवाओं की कच्ची और असीमित ऊर्जा को एक अनुशासित राष्ट्रीय चरित्र में ढाला जाता है.
उपराष्ट्रपति द्वारा रेखांकित संघ के तीन मुख्य स्तंभ:
- सेवा: जो समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के प्रति पूर्ण और निःस्वार्थ समर्पण को दर्शाती है.
- एकता: जो भारत की भाषाई, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विविधताओं से ऊपर उठकर सभी को एक सूत्र में पिरोती है और बंधनों को मजबूत करती है.
- त्याग: जो यह याद दिलाता है कि कोई भी स्थायी और महान संस्थान केवल व्यक्तिगत समर्पण, अटूट दृढ़ता और निस्वार्थ सामूहिक प्रयासों से ही खड़ा होता है.
उन्होंने आगे कहा कि एक सच्चे स्वयंसेवक का मुख्य सार यही है कि उसे समाज में जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाए, वह उसे पूरी गरिमा, पूर्ण समर्पण और उत्कृष्टता के साथ निभाए. संघ ने हमेशा भारत की सभ्यतागत विरासत, आध्यात्मिक विचारों और विविध भाषाओं में गौरव की भावना पैदा करके राष्ट्रीय चेतना को निरंतर बढ़ावा दिया है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई राष्ट्रीय हस्तियां रहीं मौजूद
उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित इस प्रतिष्ठित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में देश की कई शीर्ष हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. मुख्य अतिथियों में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशेष रूप से शामिल हुए.
उनके अलावा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र के संघचालक पवन जिंदल, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय, पुस्तक के लेखक द्वय श्याम जाजू एवं अनुपम त्रिवेदी तथा प्रभात प्रकाशन के प्रबंध निदेशक प्रभात कुमार सहित कई प्रबुद्धजन, शिक्षाविद और विशिष्ट गणमान्य नागरिक इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने.
















