गत 7 जुलाई का दिन बिहार के सीमांचल क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि से भरा रहा। इस दिन किशनगंज के मोतीबाग स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में सैनिक स्कूल के प्रथम सत्र का श्रीगणेश हुआ। इसके साथ ही विद्या भारती द्वारा संचालित किशनगंज का यह सरस्वती विद्या मंदिर अब बिहार का चौथा सैनिक स्कूल बन गया है। इससे पहले रक्षा मंत्रालय से पटना, भागलपुर और रोसड़ा के सरस्वती विद्या मंदिरों को यह मान्यता प्राप्त हो चुकी है।
विद्यालय के प्राचार्य नागेंद्र तिवारी ने बताया, “जुलाई, 2024 में विद्यालय को सैनिक स्कूल का दर्जा मिला था और अब प्रथम सत्र का शुभारंभ संस्थान के लिए गौरव का क्षण है। विद्यालय में कुल 80 सीटें निर्धारित हैं। इनमें 48 सीट पर विद्यालय के विद्यार्थियों तथा 32 सीट पर देशभर में होने वाली चयन परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को कक्षा छह में प्रवेश दिया जाएगा। वर्तमान में कुल 30 छात्र का नामांकन हुआ है। विद्यार्थी बारहवीं तक यहां अध्ययन करेंगे।”
सैनिक स्कूल के प्रथम शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसमें संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का समावेश हो। यही मूल्य सशक्त भारत के निर्माण की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके शिक्षित, अनुशासित और चरित्रवान युवा होते हैं।
सैनिक शिक्षा केवल सेना में भर्ती का माध्यम नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, समय-पालन, कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की योग्यता और राष्ट्र-सेवा की भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र सीमांचल में सैनिक स्कूल की स्थापना दूरगामी महत्व की पहल है, जिससे यहां के विद्यार्थियों को अब गुणवत्तापूर्ण सैनिक शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
लोक शिक्षा समिति, बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह ने बताया कि भारत में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत कई निजी विद्यालयों को सैनिक स्कूल का दर्जा मिला है। उनमें से एक किशनगंज का सरस्वती विद्या मंदिर भी है। अब यहां छात्रों को नियमित शिक्षा के साथ शारीरिक दक्षता, नेतृत्व विकास, व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन तथा एनडीए, सेना, अर्द्धसैनिक बलों एवं अन्य प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
ऐसे विद्यार्थी भविष्य में विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विद्यालय प्रबंध समिति के सह सचिव अनिल अग्रवाल ने कहा कि रक्षा मंत्रालय द्वारा किशनगंज को यह जिम्मेदारी मिलना पूरे सीमांचल के लिए गर्व का विषय है। संस्थान इस दायित्व का पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करेगा।
समारोह में राष्ट्रगान और सरस्वती वंदना की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र और पुस्तक भेंट कर किया गया। बड़ी संख्या में अभिभावक, विद्यार्थी, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता समारोह के साक्षी बने।
















