देहरादून। जौनसार-बावर में कथित रूप से गलत तरीके से बाहरी लोगों के नाम पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिए जाने को तत्काल रद्द करने तथा कथित रूप से कब्जाई गई भूमि वापस दिलाने की मांग को लेकर रुद्रसेना ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।
जिलाधिकारी को सौंपा गया विस्तृत ज्ञापन
रुद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड-हिमाचल के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी के नेतृत्व में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर चकराता विधानसभा क्षेत्र (जौनसार-बावर अनुसूचित जनजाति क्षेत्र) में बाहरी/गैर-जौनसारी व्यक्तियों को कथित रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ दिए जाने की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई।
अनुसूचित जनजाति क्षेत्र होने का दिया गया हवाला
ज्ञापन में कहा गया है कि जौनसार-बावर को वर्ष 1967 से अनुसूचित जनजाति क्षेत्र का दर्जा प्राप्त है तथा जनजातीय भूमि एवं अधिकारों का संरक्षण संविधान एवं प्रचलित कानूनों के अंतर्गत किया गया है।
ज्ञापन के अनुसार, वर्ष 1983 के बाद गैर-जौनसारी व्यक्तियों के नाम कथित रूप से भूमि दर्ज किए जाने के मामलों की पहले भी जांच कराई गई थी। संगठन का कहना है कि यदि भूमि अभिलेखों की वैधता पर प्रश्न हैं, तो ऐसे मामलों में सरकारी योजनाओं का लाभ दिए जाने की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
1983 के बाद दर्ज भूमि और सरकारी योजनाओं की जांच की मांग
राकेश उत्तराखंडी ने मांग की है कि वर्ष 1983 के बाद गैर-जौनसारी व्यक्तियों के नाम दर्ज भूमि तथा उसके आधार पर स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, आयुष्मान, उद्यान विभाग एवं अन्य सरकारी योजनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
साथ ही, जांच पूरी होने तक विवादित मामलों में योजनाओं का लाभ रोका जाए तथा यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाए।
वास्तविक जौनसारी परिवारों के अधिकारों की रक्षा की मांग
संगठन ने यह भी मांग की कि वास्तविक जौनसारी अनुसूचित जनजाति परिवारों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए और पात्र लाभार्थियों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।
इन लोगों ने भी किया मांग का समर्थन
इस अवसर पर श्याम जोशी, अतर सिंह चौहान, गीता राम जोशी, आशु बंसल एवं जवाहर दत्त जोशी भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की मांग का समर्थन किया











