
कहा जाता है कि नाम में क्या रखा है? शेक्सपियर का यह संवाद अक्सर लोग बोला करते हैं, परंतु यदि कहा जाए कि नाम में ही तो सब कुछ रखा है। यह नाम ही तो है, जिसे बनाए रखने के लिए लोग संघर्ष करते हैं। जो भूखंड भारत से अलग होकर पाकिस्तान बनता है, तो नाम बदलते ही वहाँ सब कुछ बदल जाता है। पहचान बदल जाती है, बोली बदल जाती है और बदल जाता है खान-पान और सब कुछ। इसलिए जो भी है, नाम में ही है। नाम एक खास पहचान लिए हुए होता है, और वह नाम उसी पहचान के साथ बना रह सकता है।
ऐसा ही एक संघर्ष यूके (UK) का एक गाँव कर रहा है, जिसे कभी प्रसिद्ध कवि विलियम वर्डसवर्थ ने “the loveliest spot that man hath ever found” अर्थात “मानव द्वारा खोजा गया सबसे सुंदर स्थान” कहा था। अब वह गाँव अपनी एक पहचान के लिए लड़ रहा है।
इंग्लैंड के लेक डिस्ट्रिक्ट, कंब्रिया में एक सुरम्य गाँव है—ग्रासमेयर (Grasmere)। यह बहुत ही सुंदर गाँव है, जिसे लेकर कवि विलियम वर्ड्सवर्थ बहुत मोहित रहे हैं और उन्होंने इसे मानव द्वारा खोजा गया सबसे सुंदर स्थान बताया था। यह गाँव अपनी प्राकृतिक सुंदरता, झीलों और साहित्यिक विरासत के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है।
यहाँ पर वर्ड्सवर्थ ने अपने जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा बिताया था और उनकी कब्र भी इसी गाँव में है। इस गाँव को ब्रिटिश रोमांटिक कविता के पर्याय के रूप में देखा जाता है।
अब यह प्रश्न उठता है कि आखिर इस जगह को लेकर विवाद क्या है? वह क्या समस्या है जो इतनी सुंदर जगह को परेशान कर रही है?
दरअसल, यहाँ पर एक स्थानीय रेस्टोरेंट है, जिसका संचालन ब्रिटिश मूल का तुर्की व्यक्ति ‘श्वान खदर’ करता है। अब वह इस रेस्टोरेंट को एक कबाब शॉप में बदलना चाहता है। इसके लिए उसने दीवार पर चिमनी लगाने और ग्रिल लगाने के प्रस्तावों को काउंसिल के पास भेजा था।
मगर इस प्रस्तावित परिवर्तन को लेकर स्थानीय ग्रामीण भड़क गए और उन्होंने काउंसिल से अनुरोध किया कि इस परिवर्तन को अनुमति न दी जाए। ग्रामीणों का मानना है कि यह कबाब शॉप गाँव के शांत वातावरण और सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुँचाएगी। उनका कहना है कि इससे यहाँ भीड़भाड़, शोर और असामान्य गतिविधियाँ बढ़ेंगी।
गाँव एक शांत स्थान है, जहाँ का वातावरण एक अलग तरीके का है और जहाँ की पहचान उसकी समृद्ध साहित्यिक विरासत है; यह कबाब शॉप उसमें बाधा डालेगी, क्योंकि इस कबाब शॉप के खुलने के बाद यहाँ पर आने वाली भीड़ पूरी तरह अलग तरीके की होगी या यूँ कहें कि वह एक अलग पहचान की होगी।
अब यह प्रश्न उठता है कि क्या महज एक कबाब शॉप एक पूरे गाँव का माहौल बिगाड़ सकती है? यह सवाल अपने आप में दिलचस्प है। क्योंकि यह कहने के लिए केवल एक कबाब शॉप है, मगर यह कबाब शॉप से कहीं अधिक है। यह कबाब शॉप अपने साथ ऐसे नए लोग लाएगी, जिन्हें कबाब तो पसंद होगा, मगर वर्ड्सवर्थ से उन्हें कोई मतलब नहीं होगा।
इसे ब्रिटेन के ही कई अन्य इलाकों के उदाहरण से समझा जा सकता है। वहाँ पर जैसे ही हलाल दुकानें खुलीं, और बांग्लादेश व पाकिस्तान के मुसलमानों की संख्या अधिक हुई, वहाँ के स्थानीय मुद्दे बदल गए और वहाँ की पहचान पूरी तरह से बदल गई। स्थिति यह है कि अब वहाँ काउंसिल तक में बांग्लादेश और पाकिस्तान के लोग चुनकर आने लगे हैं।
जैसे कि ब्रिक लेन (Brick Lane) का इलाका; पहले यह इलाका चर्च और सिनेगॉग से जुड़ा था। बाद में बांग्लादेशी समुदाय के आने से यहाँ मस्जिद और करी हाउस बन गए। आज यह जगह “Banglatown” कहलाती है और इसकी पूरी सांस्कृतिक पहचान बदल चुकी है।
ऐसी तमाम उदाहरण दुनिया भर में हैं और भारत में भी हैं। भारत में कश्मीर इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है। हालाँकि अब कश्मीर से हिंदू पहचान पूरी तरह से समाप्त होने की तरफ अग्रसर है, परंतु कश्मीर का नाम ही ऋषि कश्यप के नाम पर है। जब उस स्थान की मूल संस्कृति को न मानने वालों की संख्या बढ़ने लगती है, तो ‘वितस्ता’ नदी ‘झेलम’ हो जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य के नाम पर बना पर्वत (शंकराचार्य पर्वत) भी कुछ और हो जाता है।
यह सब किसी एक दुकान या एक व्यक्ति के कारण नहीं होता, बल्कि यह सब उन लोगों के लगातार आगमन और रहने के कारण होता है, जिनका अस्तित्व उस सभ्यता के साथ घृणा पर टिका होता है, जो वहाँ की मूल निवासी होती है। कोई भी समुदाय बिना हिंसा के भी जनसांख्यिकी बदलकर ऐसा कर सकता है, जैसा कि कई स्थानों पर देखा भी गया है।
ऐसे में किसी भी सांस्कृतिक पहचान को लेकर जीने वाले स्थान के निवासियों को हमेशा इस बात का भय रहता है कि कहीं उनकी पहचान ही समाप्त न हो जाए। क्योंकि किसी भी बाहरी विचार से बाहरी प्रभाव बढ़ता है, जैसी कि इस कबाब शॉप को लेकर वहाँ के स्थानीय लोगों की आशंका है।
यही कारण है कि उस कबाब शॉप के लिए मांगे गए संशोधनों को अनुमति नहीं मिल सकी और काउंसिल ने श्वान खदर के प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया। हालांकि, श्वान खदर का कहना है कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे और इस कबाब शॉप को हर हाल में खोलेंगे।
उसके अनुसार—
“यदि वर्ड्सवर्थ आज जीवित होते, तो वे भी उसकी दुकान में आकर बड़े चाव से कबाब खाते!”